चन्द्रप्रभा वटी के नुकसान व फायदे | Chandraprabha Vati Kya Hai

चंद्रप्रभा वटी एक आयुर्वेदिक अति उत्तम दवाई है इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है क्योंकि यह एक आयुर्वेदिक दवाई है इसके दुष्प्रभाव भी बहुत कम है बिल्कुल ना के बराबर इस दवाई को कई लोग स्मरण शक्ति को बढ़ाने, दिमाग को मजबूत करने, नींद से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने और विभिन्न प्रकार की अन्य समस्याओं के लिए करते हैं।

हम इस आर्टिकल में चंद्रप्रभा वटी के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि चंद्रप्रभा वटी क्या है, चन्द्रप्रभा वटी के नुकसान व फायदे इत्यादि (Chandraprabha Vati Kya Hai)

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चंद्रप्रभा वटी क्या है – What is Chandraprabha vati in Hindi

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चंद्रप्रभा वटी आयुर्वेद में बहुत प्रसिद्ध और सहायक जड़ी बूटी है। इसमें ऐसे गुण भी हैं जो इसके नाम से जाने जाते हैं। चंद्र शब्द चंद्र शब्द से बना है जिसका अर्थ है चंद्रमा, और प्रभा का अर्थ है चमक। तो जब आप चंद्रप्रभा वटी का सेवन करते हैं तो इसका मतलब है कि आपके चेहरे पर चंद्रमा जैसी चमक है, और इसके साथ ही आपके शरीर में एक बल मिलता है। तो, शारीरिक कमजोरी और अन्य बीमारियों से निपटने के लिए चंद्रप्रभा वटी को अन्य दवाओं के साथ भी निर्धारित किया जाता है।

चंद्रप्रभा वटी के फ़ायदे – Chandraprabha vati k Fayde

किडनी के खराब होने पर मूत्र की उत्पत्ति बहुत कम होती है जो शरीर में अनेक रोग उत्पन्न करता है एवं मूत्राशय में विकृति होने पर मूत्र आने पर जलन, पेडू में जलन, मूत्र का रंग लाल होना या अधिक दुर्गन्ध होना इन सब में चन्द्रप्रभा वटी अति उपयोगी है। इससे गुर्दों की कार्यक्षमता बढ़ती है जो शरीर को साफ करते हैं। बढ़े हुए यूरिक एसिड (Uric acid) और यूरिया (Urea) आदि तत्वों को यह शरीर से बाहर निकालती है। अगर आप किडनी रोगों से पीड़ित हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेकर चंद्रप्रभा वटी का उपयोग करें. 

चंद्रप्रभा वटी है मूत्र सम्बन्धी विकारों में लाभदायक 

यह वटी पेशाब की परेशानियों और वीर्य विकार की काफी लाभकारी तथा प्रसिद्ध दवा है। मूत्र आने पर जलन, रुक–रुक कर कठिनाई से मूत्र आना, मूत्र में चीनी आना, मूत्र में एल्ब्युमिन जाना (Albuminuria),  मूत्राशय की सूजन तथा लिंगेन्द्रिय की कमजोरी इससे शीघ्र ठीक हो जाती है।

पतंजलि चंद्रप्रभा वटी से बढ़ाएं शारीरिक और मानसिक शक्ति 

पतंजलि चंद्रप्रभा वटी के नियमित सेवन से शारीरिक तथा मानसिक शक्ति मे वृद्धि होती है। यह थोड़े से श्रम से हो जाने वाली थकान और तनाव आदि को कम करती है, शरीर में स्फूर्ति लाती है और स्मरण शक्ति (memory) को बढ़ाती है। चंद्रप्रभा वटी के फायदे को देखते हुए इसे सम्पूर्ण स्वास्थ्य टॉनिक के रूप मे प्रयोग किया जाता है। इसके साथ लोध्रासव या पुनर्नवासव का भी प्रयोग करना चाहिए। टॉनिक होने के अलावा चंद्रप्रभा वटी शरीर को विभिन्न प्रकार के टॉक्सिन (toxins) से मुक्त करने का भी काम करती है।

वीर्य सम्बन्धी रोगों में चंद्रप्रभा वटी के लाभ 

पुरुषों में अधिक शुक्र क्षरण या स्त्रियों में अधिक रजस्राव होने से शारीरिक कान्ति नष्ट हो जाती है, शरीर का रंग पीला पड़ना, थोड़े ही परिश्रम से जल्दी थक जाना, आँखे अन्दर धँस जाना, भूख न लगना आदि विकार पैदा हो जाते है ऐसे में इस वटी का प्रयोग करने से लाभ मिलता है। यह रक्तादि धातुओं की पुष्टि करती है। यह स्पर्मकाउंट (sperm count) को बढ़ाती है, ब्लड सेल यानी रक्त कोशिकाओं का शोधन तथा निर्माण करती है। स्वप्नदोष (Nightfall) या शुक्रवाहिनी नाड़ियों के कमजोर पड़ जाने पर इसे गुडुची के क्वाथ से लेना चाहिए।

स्त्री रोगों में पतंजलि चंद्रप्रभा वटी के लाभ 

स्त्री रोगों के लिए भी यह एक अच्छी दवा है। यह गर्भाशय की कमजोरी दूर कर उसे स्वस्थ बनाती है। गर्भाशय के बढ़े आकार, उसकी रसौली, बारंबार गर्भपात आदि समस्याओं में चंद्रप्रभा वटी का सेवन रामबाण का काम करता है। यह गर्भाशयसंबंधी रोगों को दूर कर गर्भाशय को बल प्रदान करती है। अधिक मैथुन या अधिक संतान होने अथवा विभिन्न रोगों से गर्भाशय के कमजोर हो जाने, कष्ट के साथ मासिक धर्म आना (period pain), लगातार 10-12 दिन तक रजस्राव होना इन सब में चन्द्रप्रभा वटी को अशोक घृत या फलघृत के साथ लेना चाहिए।

चंद्रप्रभा वटी एक अच्छी दर्दनिवारक भी है 

दर्द से राहत दिलाने में भी चंद्रप्रभा वटी फायदेमंद है। यूरिक एसिड कम करने के गुण के कारण जोड़ों के दर्द, गठिया वात के दर्द, जोड़ों के सूजन आदि को यह कम और समाप्त करती है। इसके सेवन से स्त्रियों में मासिक धर्म की अनियमितताएं भी ठीक होती हैं और उसके कारण होने वाले पेड़ू के दर्द, कमर दर्द आदि में आराम मिलता है।

चंद्रप्रभा वटी के अन्य लाभ

मंदाग्नि, अजीर्ण, भूख न लगना कमजोरी महसूस करना इन सब में पतंजलि चंद्रप्रभा वटी लाभ करती है। मल–मूत्र के साथ वीर्य का गिरना, बार–बार मूत्र आना, ल्यूकोरिया (leukorrhea) , वीर्य दोष, पथरी (kidney stone), अंडकोषों में हुई वृद्धि, पीलीया (jaundice), बवासीर (Piles), कमर दर्द (backache), नेत्ररोग तथा स्त्री-पुरुषों के जननेन्द्रिय से संबंधित रोगों को यह ठीक करती है।

चंद्रप्रभा वटी के नुकसान – Chandraprabha vati K Nuksan

यह एक आयुर्वेदिक औषधि है और अभी तक इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन इसके अधिक इस्तेमाल से अधिक नींद की समस्या हो सकती हैं।

  • चंद्रप्रभा वटी का खुराक हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही शुरू करें। 
  • बच्चों को इसकी कम मात्रा देनी चाहिए। दिन में एक गोली ही दें। 
  • गर्भवती महिलाओं को इसके सेवन से बचना चाहिए, अगर जरूरत हो तभी इसका इस्तेमाल करें। 
  • अगर आपको इसके किसी घटक से एलर्जी है तो इसका सेवन है बंद कर देना चाहिए। 

चंद्रप्रभा वटी के मुख्य घटक – Ingredients of Chandraprabha vati in Hindi

  • गुग्गुल (Guggul)
  • शिलाजीत (Shilajit)
  • शरकारा (Sharkara)
  • लौहा भस्म (Lauha bhashma)
  • विदा लवन (Vida Lavan)
  • स्वर्णमक्षिका भस्म (Swarnamakshika Bhasma)
  • ट्रिविट (Trivit)
  • वंक्षलोचन (Vankshalochana)
  • इला (Ela)
  • तेजपत्ता (Tejpatta)
  • दालचीनी (Dalchini) 
  • दंती मूल (Danti Mool)
  • कपूर (Kapoor)
  • अतिविषा (Ativisha)
  • हरिदार (Haridar)
  • वाचा (Vacha)
  • आमलकी (Amalaki)
  • मुस्तक (Mustak)
  • बिभीतक (Bibhitak)
  • छाव्या (Chavya)
  • हरीतकी (Haritaki)
  • धनिया (Dhania)
  • पिप्पली मूल (Pippali Mool)
  • गज पिप्पली (Gaja Pippali)
  • गुडूची (Guduchi)
  • चित्रक छाल (Chitraka Bark)
  • दरवी (Darvi)
  • शुंथि (Shunthi)
  • देवदरु (Devdaru)
  • विदंगा (Vidanga)
  • भूनिम्बा (Bhunimba)
  • सैंधव लवन (Saindhava lavan)
  • सुवर्चल लवन (Suvarchal lavan)
  • यवक्षर (Yavkshaar)
  • मारीच (Maricha) 

चंद्रप्रभा वटी की सावधानियां – Precautions of Chandraprabha vati in Hindi 

दवा का उपयोग करने से पहले, अपने चिकित्सक को अपनी वर्तमान बीमारियों, शारीरिक बीमारियों और उन सभी दवाओं के बारे में बताएं जो आप ले रहे हैं। चिकित्सक के निर्देशानुसार दवा लें और सूचित करें कि आपकी शारीरिक स्थिति बिगड़ रही है या सुधार हो रहा है।

व्यक्तियों और शारीरिक बीमारियों के मामले में सतर्क रहना महत्वपूर्ण है।

  • उपयोग करने से पहले हमेशा एक चिकित्सक से परामर्श करें।
  • गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान चंद्रप्रभा वटी से बचें, या उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।
  • हाइपरएसिडिटी, थैलेसीमिया, अल्सरेटिव कोलाइटिस के मामलों में परहेज करें।
  • यदि आप एलोपैथिक दवाओं का सेवन करते हैं, तो खुराक के बीच कम से कम 1-2 घंटे का अंतर बनाए रखें।

चंद्रप्रभा वटी का मूल्य – Price of Chandraprabha vati in Hindi

दिव्या चंद्रप्रभा वाटी – 60 ग्राम 120 टैबलेट = 125 rupees

चंद्रप्रभा वटी किसे नहीं करना चाहिए – Who should not use Chandraprabha vati in Hindi  

वैसे तो चंद्रप्रभा वती बेहद गुणकारी और फायदेमंद औषधि हैं लेकिन किन्ही परिस्थितयों मैं इसका सेवन आपके लिए चिंताजनक हो सकता हैं तो आइये जानते हैं की चंद्रप्रभा वटी सेवन किन लोगो को और कब नहीं करना चाहिए। 

  • गर्भवती महिलाओ को चंद्रप्रभा वटी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योकि गर्भवस्था के दौरान कौन सी दवाई बच्चे और माँ पर क्या प्रभाव डालती यह अभी तक पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं हैं यदि गर्भवती महिलाये चंद्रप्रभा वटी का सेवन करती भी हैं तो चिकित्सक की सलाह से करे। 
  • चंद्रप्रभा वटी का सेवन हाई ब्लड प्रेसर एवं डाइबिटीज़ के मरीजों को बिना डॉक्टर के सलाह के नहीं करना चाहिए यह आपके शरीर मैं प्रवेश कर क्या प्रभाव डालती हैं यह सिर्फ डॉक्टर ही आपको बता पाएगा। 
  • ऐसी महिलाएं जो की हाल ही मैं माँ बनी है तथा बच्चे को स्तनपान कराती हैं उन्हें चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग नहीं करना चाहिए हलाकि अभी तक इस बात पर कोई शोध या पुष्टि उपलब्ध नहीं हैं लेकिन फिर भी यदि स्तनपान करने वाली महिलाये इसका सेवन करना चाहती हैं तो चिकित्सक की सलाह अवश्य ले।
  • शराब पिने के बाद चंद्रप्रभा वटी का सेवन नहीं करना चाहिए शराब पिने के बाद इसका सेवन आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता हैं। 
  • चंद्रप्रभा वती का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए डॉक्टरों द्वारा दिए गए सुझावों एवं चंद्रप्रभा वटी के पैकेट पर दिए गए निर्देश के अनुसार चंद्रप्रभा का सेवन भोजन के बाद ही करना चाहिए।  

यह भी पढ़ें:- पतंजलि दिव्य मेधा वटी के फायदे एवं नुकसान | Patanjali divya medha vati k Fayde or Nuksan

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने चन्द्रप्रभा वटी के बारे में जानकारी दिया है जैसे चंद्रप्रभा वटी क्या है, चन्द्रप्रभा वटी के नुकसान व फायदे इत्यादि (Chandraprabha Vati Kya Hai)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारे आर्टिकल पसंद आता है या आप क्या कोई सवाल या जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद।

क्या चंद्रप्रभा वटी को लेना सुरक्षित है?

चंद्रप्रभा वटी को मौखिक रूप से 500-1000 मिलीग्राम / दिन की खुराक पर 1 – 4 महीने में देने से कोई गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया या विषाक्तता के लक्षण नहीं देखी है। चंद्रप्रभा वटी, एक आयुर्वेदिक धातु-हर्बो-खनिज सूत्रीकरण निर्धारित खुराक में प्रशासित होने पर सुरक्षित है।

क्या चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha vati) को प्रेगनेंसी में इस्तेमाल कर सकते हैं?

प्रेगनेंसी के समय चंद्रप्रभा वटी का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें जिससे आपको किसी तरह की दिक्कत ना हो।

क्या मैं चन्द्रप्रभा वटी खाली पेट ले सकता हूँ ?

नही, इसके बारे में जानकारी के लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करे।

चंद्रप्रभा वटी किस काम आती है?

चंद्रप्रभा वटी मासिक धर्म की समस्याओं जैसे दर्द, ऐंठन आदि को प्रबंधित करने में मदद करती है। यह मांसपेशियों को आराम देता है और पेट में ऐंठन और ऐंठन से राहत देता है।

चंद्रप्रभा वटी किस काम आती है?

चंद्रप्रभा वटी मासिक धर्म की समस्याओं जैसे दर्द, ऐंठन आदि को प्रबंधित करने में मदद करती है। यह मांसपेशियों को आराम देता है और पेट में ऐंठन और ऐंठन से राहत देता है।

क्या चंद्रप्रभा वटी पाचन समस्याओं के लिए अच्छी है?

चंद्रप्रभा वटी एसिडिटी और अपच जैसी पाचन समस्याओं के प्रबंधन में उपयोगी है।

References

Patanjali. (n.d.). Divya Chandraprabha Vati. Patanjaliayurved.net. https://www.patanjaliayurved.net/product/ayurvedic-medicine/vati/divya-chandraprabha-vati/30

Observations on clinical safety of Chandraprabha vati-an ayurvedic metallo-herbo mineral formulation – BiblioMed.org – Deposit for medical articles. (n.d.). BiblioMed.org. https://www.bibliomed.org/?mno=228715

Antidiabetic activity of Chandraprabha vati ? A classical Ayurvedic formulation. (n.d.). ResearchGate | Find and share research. https://www.researchgate.net/publication/308535844_Antidiabetic_activity_of_Chandraprabha_vati_A_classical_Ayurvedic_formulation