Circulatory system in hindi | परिसंचरण तंत्र या वाहिकातंत्र क्या है, कार्य इत्यादि

सर्कुलेटरी सिस्टम हमारे शरीर में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है हमारे पूरे शरीर में रक्त लगातार चौबीसों घंटे संचारित होता रहता है जिससे हमें ऊर्जा मिलती है तथा शरीर का तापमान और पीएच लेवल सामान्य रहता है इसके अलावा सर्कुलेटरी सिस्टम की मदद से शरीर में उत्पन्न होने वाला वेस्ट पदार्थ भी शरीर से बाहर निकल पाता है। इसलिए सर्कुलेटरी सिस्टम हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। 

हम इस आर्टिकल में सर्कुलेटरी सिस्टम के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि सर्कुलेटरी सिस्टम क्या है, सर्कुलेटरी सिस्टम के कार्य क्या है इत्यादि (circulatory system in hindi)

सर्कुलेटरी सिस्टम क्या है – What is circulatory system in Hindi

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मनुष्यों और अन्य पशुओं का सर्कुलेटरी सिस्टम अंगों का वह तंत्र होता है जो शरीर के भीतर सामग्रियों के परिवहन का जिम्मेदार होता है। इसमें हृदय, धमनियां, नसें, केशिकाएं और रक्त होते हैं । हृदय रक्त को बाहर की तरफ धक्का देने वाले पंप के रूप में काम करता है। धमनियां, नसें और केशिकाएं नली या ट्यूब की तरह काम करती हैं जिनसे होकर रक्त प्रवाहित होता है। मनुष्य के शरीर में तीन प्रकार की रक्त वाहिकाएं होती हैं– धमनियां, नसें और केशिकाएं।

सर्कुलेटरी सिस्टम के कार्य – Function of circulatory system in Hindi

सर्कुलेटरी सिस्टम का कार्य पूरे शरीर में रक्त को स्थानांतरित करना है। यह रक्त संचार अंगों, मांसपेशियों और ऊतकों को स्वस्थ रखता है और आपको जीवित रखने का काम करता है। सर्कुलेटरी सिस्टम आपके शरीर को अपशिष्ट उत्पादों से छुटकारा पाने में भी मदद करती है। इस कचरे में शामिल हैं:

  • श्वसन (श्वास) से कार्बन डाइऑक्साइड
  • आपके अंगों से अन्य रासायनिक उपोत्पाद।
  • खाने-पीने की चीजों से बर्बादी।

सर्कुलेटरी सिस्टम कैसे काम करता है – How does circulatory system works in Hindi

आपका संचार तंत्र रक्त वाहिकाओं की मदद से काम करता है जिसमें धमनियां, नसें और केशिकाएं शामिल हैं। ये रक्त वाहिकाएं आपके दिल और फेफड़ों के साथ मिलकर आपके शरीर में लगातार रक्त का संचार करती हैं। ऐसे:

  • दिल का निचला दायां पंपिंग कक्ष (दायां वेंट्रिकल) फेफड़ों में ऑक्सीजन (ऑक्सीजन-गरीब रक्त) में कम रक्त भेजता है। रक्त फुफ्फुसीय ट्रंक (मुख्य फुफ्फुसीय धमनी) के माध्यम से यात्रा करता है।
  • रक्त कोशिकाएं फेफड़ों में ऑक्सीजन ग्रहण करती हैं।
  • फुफ्फुसीय शिराएं ऑक्सीजन युक्त रक्त को फेफड़ों से हृदय के बाएं आलिंद (ऊपरी हृदय कक्ष) तक ले जाती हैं।
  • बायां अलिंद ऑक्सीजन युक्त रक्त को बाएं वेंट्रिकल (निचले कक्ष) में भेजता है। हृदय का यह पेशीय भाग धमनियों के माध्यम से शरीर में रक्त पंप करता है।
  • जैसे ही यह आपके शरीर और अंगों के माध्यम से चलता है, रक्त पोषक तत्वों, हार्मोन और अपशिष्ट उत्पादों को इकट्ठा और छोड़ देता है।
  • नसें ऑक्सीजन रहित रक्त और कार्बन डाइऑक्साइड को वापस हृदय में ले जाती हैं, जो रक्त को फेफड़ों में भेजती है।
  • जब आप सांस छोड़ते हैं तो आपके फेफड़े कार्बन डाइऑक्साइड से छुटकारा पाते हैं।

सर्कुलेटरी सिस्टम के मुख्य घटक क्या है – Parts of circulatory system in Hindi

 सर्कुलेटरी सिस्टम (Circulatory System) के अन्तर्गत निम्नलिखित अंग आते हैं। 

  • ह्रदय (Heart) 
  • रक्त वाहिनियाँ (Blood Vessels) 

हृदय (Heart) 

मानव ह्रदय लाल रंग का तिकोना, खोखला एवं माँसल अंग होता है जो पेशीय ऊतकों का बना होता है।  यह एक आवरण द्वारा घिरा होता है जिसे ह्रदयावरण कहते हैं।  इसमें पेरिकार्डियल द्रव्य भरा होता है जो ह्रदय की बाह्य आघातों से रक्षा करता है। हदय पम्प की भाँति कार्य करता है। यह अन्दर के तापमान को बनाए रखने तथा कोशिकाओं को नियमित रूप से सन्तुलित आहार पहुँचाने का कार्य निरन्तर रूप से करता है। यदि हृदय अपना कार्य बन्द कर दे तो शरीर में लेक्टिक अम्ल, एसिड, फॉस्फेट, कार्बन डाई-ऑक्साइड आदि पदार्थों की मात्रा बढ़ने लगेगी जिसके  फलस्वरूप कोशिकाओं में जीवन समाप्त हो जाएगा तथा व्यक्ति की मृत्यु हो जाएगी। हृदय के अध्ययन को कार्डियोलॉजी कहते हैं। एक वयस्क मनुष्य का हृदय एक मिनट में 72 बार धड़कता है जबकि एक नवजात शिशु का 120-60 बार धड़कता है । 

ह्रदय की बाह्य संरचना (External Structure of Heart) 

मनुष्य का हृदय शंक्वाकार पेशीय अंग होता है। इसका ऊपरी भाग कुछ चौड़ा तथा निचला भाग कुछ नुकीला तथा बायीं ओर झुका हुआ होता है।  हृदय के अगले चौड़े वाल्व को अलिन्द (Atrium) तथा पिछले नुकीले भाग को निलय (Ventricle) कहते हैं। दोनों भागों के मध्य अनुप्रस्थ विभाजन रेखा कोरोनरी त्वचा पाई जाती हैं। 

ह्रदय की आन्तरिक संरचना (Internal Structure of Heart) 

मनुष्य का हृदय चार कक्षीय होता है। अलिन्द में एक अन्तरालिन्द भी होता है जो अलिन्द को दाएँ तथा बाएँ अलिन्द में बाँट देता है। इस पर दाईं ओर एक अण्डाकार भाग होता है जिसे फोसा ओवेलिस कहते हैं। दाएँ अलिन्द में पश्च महाशिरा तथा अग्र महाशिरा के छिद्र होते हैं। पश्च महाशिरा के छिद्र पर यूस्टेकियन कपाट पाया जाता है। अग्र महाशिरा के छिद्र के समीप ही एक छिद्र कोरोनरी साइनस होता है। इस छिद्र पर कोरोनरी कपाट या थिवेसियन कपाट पाया जाता है । बाएँ अलिन्द में दोनों फुस्फुसीय शिराएँ एक सम्मिलित छिद्र द्वारा खुलती हैं।  

निलय, अन्तरा निलय पटल द्वारा दाएँ तथा बाएँ निलय में बँटा रहता है।  निलय का पेशीय स्तर अलिन्द से अधिक मोटा होता है। दाएँ निलय से पल्मोनरी वॉल्व निकलता है एवं बाएँ निलय से कैराटिको सिस्टेमिक वाल्व निकलता है जो पूरे शरीर में शुद्ध रक्त पहुंचता है।  इन चापों के  आधार पर तीन-तीन छोटे अर्द्ध चन्द्ररकार कपाट लगे रहते हैं। अलिन्द निलय में अलिन्द निलय छिद्रों द्वारा खुलते हैं। 

इन छिद्रों पर अलिन्द निलय कपाट स्थित होते हैं। ये कपाट रूधिर को अलिन्द से निलय जाने देते हैं किन्तु निलय से अलिन्द में नहीं। निलय की भित्ति तथा कपाटों में हृदय  रज्जु जुड़े रहते हैं। दाएँ अलिन्द व निलय के  मध्य के  अलिन्द-निलय कपाट में तीन वलन होते हैं। त्रिवलनी कपाट कहते हैं। बाएँ अलिन्द व निलय के बीच के कपाट पर दो वलन होते हैं।इसे द्विवलन कपाट या मिट्रल कपाट कहते हैं। 

हृदय का कार्य (Functions of Heart) 

हमारे शरीर का रक्त प्रवाह मुख्यत: ह्रदय के ऊपर ही निर्भर करता है। रक्त का बाएँ निलय से धमनियों में फिर उसके  बाद कोशिकाओं से वापस दाएँ अलिन्द में शिराओं के द्वारा आना, सामान्य प्रवाह कहलाता है। रक्त का बाएँ निलय से फेफड़ों में फिर बाएँ अलिन्द में आना, फेफड़े सम्बन्धी प्रवाह कहलाता है । 

सामान्य प्रवाह में फेफड़े सम्बन्धी प्रवाह की अपेक्षा अधिक शक्ति होती है। अत: हृदय का प्रमुख कार्य शरीर के विभिन्न भागों को रक्त पम्प करना है। यह कार्य अलिन्द व निलय के  लयबद्ध रूप से संकुचन एवं विश्रान्ति (सिकूड़ना व फैलना) से होता है । इस क्रिया में ऑक्सीकृत रक्त फुस्फुस शिरा से बाएँ अलिन्द में आता है वहाँ से बाएँ निलय से होता हुआ महाधमनी द्वारा शरीर में प्रवाहित होता है।  

रक्त वाहिनियाँ (Blood Vessels) 

शरीर में रक्त परिसंचरण वाहिनियाँ के द्वारा होता है, जिन्हें रक्त वाहिनियाँ (Blood Vessels) कहते हैं।मानव शरीर में निम्न तीन प्रकार की रक्त वाहिनियाँ होती हैं 

धमनियाँ (Arteries)

शुद्ध रक्त को ह्रदय से शरीर के अन्य अंगों तक ले जाने वाली वाहिनियाँ धमनी कहलाती है।  इनमें रक्त प्रवाह तेज व उच्च दाब पर होता है। इसका मुख्य कारण धमनियां का लचीला होना और माँसपेशियों की दीवारों का मोटा होना है। धमनी की संरचना तथा उसकी मोटाई धमनी के आकार पर निर्भर करती है। अधिक फैलाव की शक्ति होने के  कारण धमनियाँ इस योग्य हो जाती हैं कि ह्रदय के संकुचन के परिणामस्वरूप रक्त की जो अतिरिक्त मात्रा धमनियों में आती हैं, वे उसको आराम से अपने अन्दर समाहित कर लेती हैं।

शिराएँ (Veins)

ये अंगो से रूधिर को वापस हृदय में लाती हैं । शिराओं की भित्ति महीन व पिचकने वाली होती है। शिराओं में अशुद्ध रूधिर बहता है तथा रूधिर बहुत दाब के साथ बहता है। शिराओं की भित्ति में पेशीय स्तर बहुत पतला होता है। इनकी गुहा काफी चौड़ी होती है तथा इसमें थोड़ी-थोड़ी  दूर पर कपाट लगे होते हैं । ये अर्धचन्द्राकार कपाट रूधिर को एक दिशा में बहने देते हैं । 

केशिकाएँ (Capillaries)

ये शिराओं और धमनियों को आपस में जोड़ती हैं। ऊतकों में पहुँचकर धमनियाँ महीन शाखाओं का जाल बनाती हैं जिन्हें केशिकाएँ कहते हैं। केशिकाओं की भित्ति केवल अन्तःस्तर (Endothelium) के एक स्तर की बनी होती है। केशिकाओं में रूधिर प्रवाह की गति बहुत धीमी होती है। केशिकाएँ आपस में मिलकर शिराएँ बनाती है।  शिराएँ आपस में मिलकर शिरा बनाती हैं। केशिकाएँ निम्नलिखित तीन प्रकार की होती हैं

  • फेनेस्ट्रेटेड केशिकाएँ (Fenestrated Capillaries)
  • निरन्तर केशिकाएँ (Continuous Capillaries)
  • सॉइनोसूडल केशिकाएँ (Sinusoidal Capillaries)

सर्कुलेटरी सिस्टम से संबंधित बीमारियां – Diseases related to circulatory system in Hindi

कई स्थितियां आपके सर्कुलेटरी सिस्टम के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं, जिनमें शामिल हैं

एन्यूरिज्म

एन्यूरिज्म तब होता है जब धमनी की दीवार कमजोर हो जाती है और बढ़ जाती है। कमजोर स्थान उभार सकता है क्योंकि रक्त धमनी के माध्यम से चलता है। कमजोर जगह फट सकती है, जिससे जान को खतरा हो सकता है। एन्यूरिज्म किसी भी धमनी को प्रभावित कर सकता है, लेकिन महाधमनी धमनीविस्फार , उदर महाधमनी धमनीविस्फार और मस्तिष्क धमनीविस्फार सबसे आम हैं।

उच्च रक्तचाप

आपकी धमनियां पूरे शरीर में रक्त के संचार के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। जब दबाव (रक्त वाहिकाओं की दीवारों के खिलाफ रक्त का बल) बहुत अधिक हो जाता है, तो आप उच्च रक्तचाप का विकास करते हैं । जब धमनियां कम लोचदार (खिंचाव) हो जाती हैं, तो कम रक्त और ऑक्सीजन हृदय जैसे अंगों तक पहुंचती है। उच्च रक्तचाप आपको हृदय रोग, दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे में डालता है ।

प्लाक जमा

उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह रक्त में वसा और अन्य पदार्थ जमा कर सकते हैं। ये पदार्थ धमनी की दीवारों पर प्लाक नामक जमाव बनाते हैं। यह स्थिति एथेरोस्क्लेरोसिस , या संकुचित या कठोर धमनियां है। एथेरोस्क्लेरोसिस से रक्त के थक्के और स्ट्रोक, कोरोनरी धमनी रोग , परिधीय धमनी रोग (और अन्य धमनी रोग), दिल के दौरे और गुर्दे की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है ।

शिरापरक रोग

शिरापरक रोग निचले शरीर में नसों को प्रभावित करते हैं। पुरानी शिरापरक अपर्याप्तता और वैरिकाज़ नसों जैसी समस्याएं तब होती हैं जब रक्त हृदय में वापस नहीं जा सकता और पैर की नसों में जमा हो जाता है। पैरों में खून का थक्का डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (डीवीटी) जानलेवा पल्मोनरी एम्बोलिज्म का कारण बन सकता है।

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निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने सर्कुलेटरी सिस्टम के बारे में जानकारी दिया है जैसे कि सर्कुलेटरी सिस्टम क्या है, सर्कुलेटरी सिस्टम के कार्य क्या है इत्यादि (circulatory system in hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारे आर्टिकल पसंद आता है या आप क्या कोई सवाल या जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद।