Eyes in hindi | आँख क्या है, कार्य, संरचना, चित्र इत्यादि

हमारे शरीर में आंखें एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है आंखों की वजह से ही हम अपने आसपास की सुंदर दुनिया को देख पाते हैं विभिन्न रंगों में अंतर कर पाते हैं। अगर कुछ समय के लिए हम कल्पना करें कि हमारी आंखें नहीं है तब हम यह पाएंगे कि यह संसार बेरंग हो गया है। और हमें कुछ भी दिखाई नहीं देगा सिर्फ हम उसे महसूस कर पाएंगे और सुन पाएंगे यहां तक कि अगर आपकी आंखें ना हो तो आपको दैनिक जीवन के कार्य करने में भी बहुत सारी कठिनाइयां होंगी।

हम इस आर्टिकल में आँख के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि आँख क्या है, कार्य, संरचना, चित्र इत्यादि (Eyes in Hindi)

आंख क्या है – What is eye in Hindi

Human eye iris 3

हमारे शरीर में पांच इंद्रियां होती हैं किसी भी चीज के बारे में हम उस चीज को छूकर सुनकर सुंदर और खा कर उसके बारे में पता कर सकते हैं परंतु जब बात रंगों के बीच में अंतर करने की आती है तब यह सारी इंद्रियां विफल हो जाती हैं हमें रंगों के बीच में अंतर करने के लिए आंखों की आवश्यकता होती है आंखें हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है और हमारे शरीर का एक अभिन्न अंग है बिना आंखों के हमें सुंदर संसार को नहीं देख सकते हमारी आंखें हमें इस सुंदर संसार में भिन्न-भिन्न प्रकार के रंगों को देखने में मदद करती हैं।

आंख का चित्र

The structure of the human eye 10 12 15 42 1

आंख कैसे कार्य करती है – Function of eye in Hindi

आंख शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। जिसकी सहायता से हमें वस्तुओं को देखते है। आँख (About eye in hindi) एक camera की भाँति कार्य करती है। आँख बाहर से एक कठोर व अपारदर्शी श्वेत झिल्ली से ढकी होती है। इस श्वेत झिल्ली को दृढ़पटल (Sclerotic) कहते हैं । दृढ़पटल के सामने का भाग कुछ उभरा हुआ होता है ।

इस भाग को कार्निया कहते हैं। कार्निया के पीछे एक पारदर्शी द्रव भरा होता है जिसे नेत्रोद (Aqucous humour) कहते हैं। कार्निया के ठीक पीछे एक पर्दा होता है। जिसे आइरिस (Iris) कहते हैं।

आइरिस के बीच में एक छेद होता है। इसे आँख की पुतली (Pupil) कहते है। आइरिस का कार्य आँख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करना होता है। अधिक प्रकाश में यह सिकुड़कर छोटा हो जाता है तथा अंधेरे या कम प्रकाश में फैल जाता है।

नेत्र में यह क्रिया स्वत: होती रहती है। पुतली के पीछे नेत्र लेंस स्थित होता है। इसके द्वारा बाहरी वस्तुओं का उल्टा, छोटा व वास्तविक प्रतिबिम्ब लेंस के पीछे दृश्य-पटल (Retina) पर बनता है।

नेत्र लेंस पक्ष्माभिकी पेशियों (Cilliary muscles) के निलंबन स्नायुओं (Suspensory ligaments) द्वारा लटका रहता हैं । ये पेशियाँ लेंस पर दाब डालकर उसके पृष्ठों की वक्रता को घटाती-बढ़ाती रहती हैं। इस प्रकार लेंस की फोकस दूरी कम-ज्यादा होती रहती है।

लेंस के पीछे एक पारदर्शी द्रव भरा होता है, जिसे कॉचाभ द्रव (Vitreous humour) कहते हैं। यह द्रव गाढ़ा, पारदर्शी व उच्च अपवर्तनाँक का होता है । दृढ़ पटल के नीचे अन्दर की ओर एक काली झिल्ली होती है। इसे रक्तक पटल (Choroid) कहते हैं। रक्त का पटल प्रकाश का अवशोषण कर लेता है, जिससे नेत्र गोलक के अन्दर प्रकाश का परावर्तन नहीं होता ।

रक्त के पटल के नीचे, नेत्र के भीतर एक पारदर्शी झिल्ली पर विशेष प्रकार की तंत्रिकाओं के सिरे होते हैं। इन पर प्रकाश पड़ने से संवेदन उत्पन्न होते है। ये संवेदन तंत्रिकाओं के समूह दृष्टि-तंत्रिका (optic nerve) के द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचते है।

किसी वस्तु से चलने वाली प्रकाश किरणें कार्निया तथा नेत्रोद से गुजरने के बाद लेंस पर आपतित होती है तथा इससे अपवर्तित होकर काँचाभ द्रव से होती हुई रेटिना पर पड़ती हैं। रेटिना पर वस्तु का उल्टा एवं वास्तविक प्रतिबिम्ब बन जाता है।

प्रतिबिम्ब बनने का संदेश दृश्य तन्त्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचता है व वस्तु हमें दिखायी देने लगती है। यद्यपि रेटिना पर बना वस्तु का प्रतिबिम्ब उल्टा होता है। लेकिन हमें यह सीधा अनुभव होता है।

आंखे के विभिन्न भाग – Parts of eye in Hindi

आंखे के विभिन्न भाग इस प्रकार है-

  • श्वेतपटल
  • रक्तक
  • दृष्टिपटल
  • नेत्रश्लेष्मला (कंजंक्टिभा)
  • स्वच्छमण्डल
  • परितारिका
  • पुतली
  • पूर्वकाल कक्ष
  • पश्च कक्ष
  • नेत्रोद
  • नेत्रकाचाभ द्रव
  • रोमक पिंड

आँखों के बारे में और जानकारी – Facts about eyes in hindi

  • हमारी याददाश्त 80% उन चीज़ों पर आधारित है, जिन्हें हम अपनी आँख़ों से देखते हैं।
  • तेज़ रोशनी में हमें टोपी और धूप का चश्मा पहना चाहिए। इससे हमारी आँखें पराबैंगनी किरणों (UV rays) से सुरक्षित रहतीं हैं।
  • जिस तरह से उंगलियों की छाप में 40 अनोखे तत्व होते हैं, उसी तरह हमारे आँख की पुतलियों में 256 प्रकार के अनोखे तत्व होते हैं।
  • हमारे पूरे जीवन काल में हम कम से कम 24 मिलियन चीजें देखते हैं।
  • यह साबित किया गया है कि पुरुषों में छोटे अक्षर पढ़ने की क्षमता, औरतों से ज़्यादा होती है।
  • बिच्छूओं को लगभग 12 आँख़ होते हैं।
  • बॉक्स जैलीफिश के 24 आँख होते हैं।
  • कॉर्निया हमारी आँखों की पुतलियों का एक पारदर्शक (transparent) कवर है।
  • चूहों के एक प्रकार का जन्म, खुली आँख़ों के साथ होता है।
  • कीड़ों के आँख़ नहीं होते हैं।
  • उल्लू एक हिलते चूहे को 150 फीट की दूरी से भी देख सकता है।
  • विश्व में लगभग 39 मिलियन लोग अंधे हैं।
  • हमारी आख़ों में जो कोशिकाएँ हैं, अलग-अलग आकार के हैं।
  • जो लोग अंधे होते हैं, लेकिन जन्म से नहीं, वो लोग नींद में सपने देख पाते हैं।
  • हमारी आँख़ों को भी धूप की कालिमा (sunburn) हो सकती है।
  • आँखों के डर को ओमाटोफोबिया (ommatophobia) कहते हैं।
  • हमारी आँखें चीज़ों को उलटी दिशा में देखतीं हैं, जिसे हमारा मस्तिष्क सीधा कर देता है।
  • मच्छलियाँ अपनी आँखें बंद नहीं कर सकतीं हैं।
  • आल्बर्ट आईंस्टाइन की आँखों को, न्यू यॉर्क में, एक डब्बे में रखा गया है।
  • लेज़र की एक प्रक्रिया से हम हमारी आँखों का रंग भूरे से नीला कर सकते हैं।
  • कहा जाता है कि सिर्फ 2% इंसानों की आँखें हरे रंग की होतीं हैं।
  • ऐसी भी एक बीमारी होती है जिसमें इंसानों के नेत्रगोलक से बाल उगते हैं।
  • तितलियों के चार आँख होते हैं।

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आंखों से संबंधित रोग – Eye Related Diseases In Hindi

अंर्तराष्ट्रीय दिवस पर हर साल अक्टूबर महीने में विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का ध्येय है, आंखों की बीमारियों और समस्याओं को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना है। हमारी आंखें अनमोल हैं और इनसे हम यह खूबसूरत दुनिया देखते हैं, लेकिन आंखों के प्रति हमारी थोड़ी सी भी लापरवाही हमें अंधेपन का‍ शिकार भी बना सकती है। हममें से बहुत से ऐसे लोग हैं, जो आंखों की समस्याओं के शुरूआती लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं और धीरे-धीरे उनमें यह समस्याएं गंभीर रूप ले लेती है।

इसलिए शरीर के अन्य अंगों की तरह आंखों की देखभाल को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। आज हम आपको आंखों से संबंधित कुछ सामान्य रोग, उनके लक्षण और उपचार के बारे में बता रहे हैं।

कंजक्टिवाइटिस – Conjunctivitis In Hindi

यह अत्यंत संक्रामक रोग है। इसका वाइरस या बैक्टेरिया स्पर्श के द्वारा किसी संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। पीडि़त व्यक्ति अपनी आंख छूने के बाद जो भी वस्तु या सतह छुएगा, वह संक्रमित हो जाएगी। स्वस्थ व्यक्ति द्वारा वह वस्तु या सतह छूने के बाद आंख को छूने से रोग स्वस्थ व्यक्ति की आंख तक पहुंच जाता है। हवा के द्वारा वाइरस का फैलाव बहुत सीमित ही होता है।

काले धब्बे यानि फ्लोटर्स – Floaters Diseases In Hindi

फ्लोटर्स गहरे धब्बे, लकीरें या डॉट्स जैसे होते हैं, जो नजर के सामने तैरते हुए दिखते हैं। यह ज़्यादा स्पष्ट रूप से आसमान की ओर देखते हुए दिखाई देते है। हालांकि फ्लोटर्स नजर के सामने दिखाई देते हैं, परन्तु वास्तव में ये आंख की अंदरूनी सतह पर तैरते हैं।

हमारी आंखों में एक जेली जैसा तत्व मौजूद होता है, जिसे विट्रियस कहते हैं। यह आंख के भीतर की खोखली जगह को भरता है। जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, वैसे ही विट्रियस सिकुडऩे लगता है। इस कारण आंख में कुछ गुच्छे बनने लगते हैं, जिन्हें फ्लोटर्स कहते हैं।

पार्किन्संस रोग – Parkinson’s Disease In Hindi

आंख के पीछे तंत्रिका कोशिकाओं की परत रेटिना के पतले होते जाने का पार्किन्संस रोग (पीडी) से संबंध हो सकता है। एक अनुसंधान में इस बात का खुलासा हुआ है। एक अध्ययन के मुताबिक, रेटिना का पतलापन मस्तिष्क कोशिकाओं की क्षति से जुड़ा हुआ है, जो डोपामाइन का उत्पादन करती हैं। डोपामाइन से गति को नियंत्रित किया जाता है। यह पीडी का एक हॉलमार्क है जो मोटर क्षमता को कम करता है।

अगर अन्य अध्ययनों में भी इसकी पुष्टि हो जाती है तो रेटिना स्कैन न केवल इसके शीघ्र उपचार का रास्ता खोल सकता है, बल्कि इससे उपचार की अधिक सटीक निगरानी भी संभव हो सकेगी। पार्किन्संस रोग की शुरुआत (ईओपीडी) 40 साल की उम्र से पहले भी हो सकती है। 60 साल की उम्र में इसकी प्रसार दर प्रति एक लाख आबादी में 247 है।

मोतियाबिंद – Cataract In Hindi

बढ़ती उम्र के साथ होने वाली आंखों की सबसे सामान्य समस्या मोतियाबिंद है। इस समस्या में आंख के अंदर के लेंस की पारदर्शिता धीरे-धीरे कम होती जाती है, जिसके परिणामस्वरूप अस व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है। दरअसल आंखों का लेंस प्रोटीन और पानी से बना होता है। जब उम्र बढ़ने लगती है तो ये प्रोटीन आपस में जुड़ने लगते हैं और लेंस के उस भाग को धुंधला कर देते हैं।

मोतियाबिंद धीरे-धीरे बढ़ कर पूरी तरह दृष्टि को भी खराब कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार 50 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को मोतियबिंद की जांच के लिए नेत्र चिकित्सक के पास जरूर जाना चाहिए। मोतियाबिंद की चिकित्सा में शल्य क्रिया द्वारा अपारदर्शी लेंस को निकाल कर कृत्रिम पारदर्शी लेंस लगा दिया जाता है। इसके बाद दृष्टी लगभग सामान्य हो जाती है।

ग्लूकोमा – Glaucoma In Hindi

ग्लूकोमा भी आंखों में होने वाली एक आम समस्या है। इसमें आंख के अंदर का दबाव बढ़ जाता है जिस कारण देखने मेंमदद करने वाले ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है। यदि ग्लूकोमा की चिकित्सा समय रहते ना की जाए तो यह अंधेपन का कारण भी बन सकता है। यह लंबे समय तक चलने वाला रोग है अर्थात इससे होने नुकसान भी धीरे-धीरे होता है।

इसलिए अधिकांश लोग इसे सामान्य दृष्टि की समस्या समझ कर ऐसे ही छोड़ देते हैं, जो हानिकारक हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ ही कॉर्निया की मोटाई कम हो जाती है, इसलिए ग्लूकोमा होने की आशंका भी बढ़ जाती है। ग्लूकोमा की पहचान जितनी जल्दी हो जाये, उतनी अच्छी तरह उसकी रोक-थाम व इलाज हो सकता है। इसका उपचार आइ ड्रॉप्स, लेजर चिकित्सा अथवा शल्य चिकित्सा द्वारा की जाती है।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने आँख के बारे में जानकारी दिया है जैसे कि आँख क्या है, कार्य, संरचना, चित्र इत्यादि (Eyes in Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारे आर्टिकल पसंद आता है या आप क्या कोई सवाल या जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद।