Tissue in hindi | उत्तक क्या है, परिभाषा, प्रकार इत्यादि

आपने कई बार कोशिका के बारे में सुना होगा परंतु आज इस आर्टिकल में हम कोशिका से ही बने एक विशिष्ट अंग की बात करेंगे जो हमारे शरीर के निर्माण में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसका नाम है ऊतक। बता दें कि ऊतक कोशिकाओं द्वारा ही बनता है और ऊतक द्वारा ही शरीर के भिन्न-भिन्न अंगो का निर्माण होता है, भिन्न-भिन्न अंग मिलकर अंग तंत्र बनाते हैं, यह अंग तंत्र मिलकर एक संपूर्ण शरीर का निर्माण करते हैं इसलिए शरीर के निर्माण में जितनी महत्वपूर्ण भूमिका कोशिका की है उतनी ही अहम भूमिका ऊतक की भी है।

हम इस आर्टिकल में उत्तक के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि उत्तक क्या है, ऊतक किसे कहते हैं, परिभाषा, प्रकार इत्यादि (Tissue in Hindi)

ऊतक क्या है – What is tissue in Hindi

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हमारा शरीर भिन्न भिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है और हमारे शरीर में केवल एक ही कोशिका नहीं होती बल्कि बहुत सारी कोशिकाएं होती हैं और इन सभी कोशिकाओं का कार्य भी अलग अलग होता है। ऊतक इन कोशिकाओं के समूह को ही कहते हैं ऊतक विशेष रूप से किसी जीव के शरीर में कोशिकाओं के उस समूह को कहते हैं जिस समूह की सभी कोशिकाएं एक जैसी हो तथा उनके कार्य भी समान हो।

ज्यादातर ऊतकों का आकार और बनावट एक जैसी होती है परंतु कुछ ऊतकों के आकार और उसकी बनावट में असमानता पाई जाती है यह कई कारणों से हो सकती हैं परंतु ऊतकों की उत्पत्ति एवं कार्य समान होते हैं बहुत सारी कोशिकाएं मिलकर ऊतकों का निर्माण करती है ऊतक की संरचना और कार्य समान होते हैं।

ऊतक कई प्रकार के होते हैं यह सभी जीवित चीजों में पाए जाते हैं मुख्य रूप से ऊतकों को दो मुख्य भागों में बांटा जाता है पहला पादप ऊतक और दूसरा जंतु ऊतक। पादप ऊतक मतलब पेड़ पौधों में उपलब्ध ऊतक और जंतु ऊतक अर्थात जितने भी जीव जीवित हैं जैसे इंसान जानवर इत्यादि उन सब में उपस्थित ऊतक।

छोटे छोटे एक कोशिकीय जीवो को छोड़कर संपूर्ण जीव जगत में कोशिकाएं आपस में मिलकर संयोजी ऊतक का निर्माण करती हैं जो किसी विशेष प्रकार के कार्य को करने में निपुण होते हैं।

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पादप तथा जंतु ऊतक – Plant and Animal tissue in Hindi

क्या आपने कभी सोचा है कि पेड़ पौधे और जीव जंतुओं में क्या एक ही प्रकार के ऊतक होते हैं? नहीं पेड़ पौधे और जीव जंतुओं में अलग-अलग प्रकार के ऊतक होते हैं क्योंकि पौधों और जंतुओं की बात की जाए तो इन दोनों की ही शारीरिक संरचना बिल्कुल अलग अलग होती है साथ ही साथ उनका जीवन यापन भी बिल्कुल अलग अलग होता है इसलिए उनके ऊतक भी अलग-अलग होते हैं।

पादप ऊतक – Plant tissue

पादप ऊतक में मुख्य रूप से दो प्रकार के ऊतक होते हैं

  • विभज्योतक (Meristematic Tissue) – इनमें विभाजन की अपार क्षमता पाई जाती है। इसे मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाता है
  • शीर्षस्थ विभाज्योतिकी ऊतक (Apical meristem)
  • पार्श्वस्थ विभाज्योतिकी ऊतक (Lateral meristern) तथा
  • अन्तर्वेशी विभाज्योतिकी ऊतक (Intercalary meristem)
  • स्थायी ऊतक (Permanent Tissue) – ये विभाजन की क्षमता खो कर विभिन्न प्रकार के कार्यों को संपादित करते हैं। स्थायी ऊतक को पुनः उनकी संरचना की जटिलता के आधार पर दो प्रकारों में बाँटा जाता है-
  • सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue) – सरल स्थायी ऊतकों को पुनः उनकी कोशिकाओं की प्रवृत्यिों एवं अंतरकोशिकीय अवकाश के आधार पर तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है-
    • पैरेनकाईमा (Parenchyma)
    • कोलेनकाईमा (Cholenchyma)
    • स्केलेरेनकाईमा (Schalerenchyma)
  • जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue) – इसी प्रकार जटिल स्थायी ऊतक भी उनके द्वारा संपादित कार्यों के आधार पर दो प्रकार के होते हैं-
    • जाइलम (Xylem)
    • फ्लोएम (Pholem)

जंतु ऊतक – Animal tissue

इस प्रकार जंतु ऊतकों को भी मोटे तौर पर चार भागों में बाँटा जा सकता है-

  • उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
  • संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
  • पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
  • तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

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पादप ऊतक – Plant tissue in Hindi

पादपों को समान उत्पत्ति तथा समान कार्यों को सम्पादित करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते हैं। ऊतक के अध्ययन करने को ऊतक विज्ञान (Histology) कहा जाता है। ऊतक शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम विचट (1771-1802) ने किया था। ऊतक की कोशिकाओं की विभाजन क्षमता के आधार पर पादप ऊतक दो प्रकार के होते हैं :

  • विभाज्योतिकी ऊतक (Meristematic tissue)
  • स्थायी ऊतक (Permanent tissue)

विभाज्योतिकी ऊतक (Meristematic tissue)

विभाज्योतिकी ऊतक ऐसी कोशिकाओं का समूह है जिनमें बार-बार सूत्री विभाजन (Mitosis division) करने की क्षमता होती है, और यह अवयस्क (Immature) जीवित कोशिकाओं का बना होता है। इस ऊतक की भित्ति सैल्यूलोज की बनी होती है। यह ऊतक स्थिति (Position) के आधार पर निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है

  • शीर्षस्थ विभाज्योतिकी ऊतक (Apical meristem)
  • पार्श्वस्थ विभाज्योतिकी ऊतक (Lateral meristern) तथा
  • अन्तर्वेशी विभाज्योतिकी ऊतक (Intercalary meristem)

शीर्षस्थ विभाज्योतिकी ऊतक

यह ऊतक जड़ एवं तने के शीर्ष भाग में उपस्थित होता है तथा लम्बाई में वृद्धि करता है। यह ऊतक प्राथमिक विभाज्योतिकी से बनता है। इससे कोशिकाएँ विभाजित एवं विभेदित (differentiated) होकर स्थायी (Permanent tissue) ऊतक बनाते हैं। इससे पौधों में प्राथमिक वृद्धि होती है।

पार्श्वस्थ विभाज्योतिकी ऊतक

यह ऊतक जड़ तथा तने के पार्श्व भाग में होता है एवं द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) करता है। इससे संवहन ऊतक (Vscular tissues) बनते हैं, जो भोजन संवहन का कार्य करते हैं एवं संवहन ऊतकों के कारण तने की चौड़ाई में वृद्धि होती है। संवहन ऊतक में अवस्थित कैम्बियम (Cambium) एवं वृक्ष के छाल के नीचे का कैम्बियम पार्श्वस्थ विभाज्योतिकी का उदाहरण है। पार्श्वस्थ विभाज्योतिकी ऊतक ही द्वितीयक विभाज्योतिकी है।

अंतर्वेशी या अंतर्विष्ट विभाज्योतिकी ऊतक

यह ऊतक स्थायी ऊतक के बीच-बीच में पाया जाता है। ये पत्तियों के आधार में या टहनी के पर्व (Internode) के दोनों ओर पाए जाते हैं। यह वृद्धि करके स्थायी ऊतकों में परिवर्तित हो जाते हैं।

स्थायी ऊतक (Permanent tissue)

विभाज्योतिकी ऊतक (अस्थायी ऊतक) की वृद्धि के बाद ही स्थायी ऊतक का निर्माण होता है। स्थायी ऊतक में विभाजन की क्षमता नहीं होती है लेकिन इनकी कोशिका का रूप एवं आकार निश्चित रहता है। इनकी कोशाद्रव्य में बड़ी रसधानी रहती हैं। सरंचना के आधार पर स्थायी ऊतक दो प्रकार के होते हैं –

  • सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue)
  • जटिल ऊतक (Complex Tissue)

सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue) 

यह ऊतक समरूप कोशिकाओं का बना होता हैं।

जटिल ऊतक (Complex Tissue) 

यह दो या दो से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है। ये एक इकाई के रूप में एक साथ कार्य करते हैं। ये जल, खनिज लवणों तथा खाद्य पदार्थ को पौधे के विभिन्न अंगों तक पहुंचाते हैं। जटिल ऊतक दो प्रकार के होते हैं 

  • जाइलम (Xylem)
  • फ्लोएम (Phloem)

जाइलम और फ्लोएम मिलकर संवहन बण्डल का निर्माण करते हैं। इस वजह से दोनों को संवहन ऊतक भी कहा जाता है।

जाइलम – यह पौधे की जड़, तना व पत्तियों में पाया जाता है। इसे चालन ऊतक (Conducting tissue) भी कहते हैं। ये पौधों को यांत्रिक सहारा प्रदान करते हैं तथा मिट्टी से खनिज तत्वों व जल का संवहन करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। पौधों के आयु की गणना जाइलम ऊतक के वार्षिक वलयों को गिनकर की जाती है। वार्षिक वलय का अध्ययन डेन्ड्रोक्रोनोलोजी (Dendrochronology) कहलाता है।

जन्तु ऊत्तक – Animal tissue

जन्तुओं में पाए जाने वाले ऊत्तक, जन्तु ऊत्तक कहलाते है। जिनका जन्तुओं के शरीर में एक विशेष कार्य होता है।

कार्य के आधार पर जन्तु ऊत्तकों को चार भागों में बाँट सकते हैं। जो निम्न प्रकार है –

  • उपकला / एपिथीलियमी ऊत्तक (epithelial tissue)
  • संयोजी ऊत्तक (connective tissues)
  • पेशीय ऊत्तक (muscular tissues)
  • तंत्रिका ऊत्तक (nervous tissues)

एपीथीलियम ऊत्तक

एपीथीलियम ऊत्तक जंतुओं के शरीर के विभिन्न बाहरी तथा भीतरी अंगों की सतह का आवरण बनाते हैं।

एपीथीलियम ऊत्तक दो प्रकार के होते है –

  • सरल एपीथीलियम ऊत्तक
  • संयुक्त एपीथीलियम ऊत्तक

सरल एपीथीलियम ऊत्तक

ये निम्न प्रकार के होते है –

  • शल्की सरल एपीथिलियम ऊत्तक
  • स्तंभी सरल एपीथिलियम ऊत्तक
  • घनाकार सरल एपीथिलियम ऊत्तक
  • रोमाभि सरल एपीथिलियम ऊत्तक
  • ग्रंथिल संवेदी सरल एपीथिलियम ऊत्तक
  • जनन सरल एपीथिलियम ऊत्तक
शल्की सरल एपीथिलियम ऊत्तक

शल्की ऊत्तक की कोशिकाएँ पतली, चोड़ी, चपटी तथा षट्कोणीय होती हे। कोशिकाओं की दीवारें एक-दूसरे से सटी रहती हैं। प्रत्येक कोशिका में एक पतला केंद्रक होता है। यह ऊत्तक त्वचा की बाहरी सतह, रक्तवाहिनियों, कान के लेविरिन्थ, फेंफड़ों वायुकोष्ठिकाओं और वृक्क के वोमेन सम्पुटों पर पाया जाता है।

स्तम्भी सरल एपीथीलियम ऊत्तक

स्तम्भी ऊत्तक आहारनाल के विभिन्न अंगों तथा ज्ञानेन्द्रियों व उनकी वाहिनियों की भीतरी सतहों पर पायी जाती है। तथा स्त्राव व अवशोषण में सहायक होती है।

घनाकार सरल एपीथीलियम ऊत्तक

घनाकार ऊत्तक की कोशिकाएँ घनाकार होती है तथा प्रत्येक कोशिका में एक गोलाकार केंद्रक पाया जाता है। यह श्वेद ग्रन्थियों, एवं वृक्क नलिकाओं, जनन ग्रंथियों व थाइराॅयड ग्रंथियों में पायी जाती है।

रोमाभी सरल एपीथीलियम ऊत्तक

रोमाभि ऊत्तक श्वासनली, अण्डवाहिनी तथा मुख्य गुहा में पायी जाती है।

ग्रंथिल सरल एपीथीलियम ऊत्तक

ग्रंथिल उपकला एककोशिकीय तथा बहुकोशिकीय दो प्रकार की होती है। एककोशिकीय आंत तथा श्लेष्मिक कला तथा बहुकोशिकीय श्वेद ग्रंथि, त्वचा की तेल ग्रन्थि, विष ग्रंथि तथा लार ग्रंथि में पायी जाती है।

संवेदी सरल एपीथीलियम ऊत्तक

तंत्रिका संवेदी उपकला में उद्दीपन ग्रहण करने के लिए इनके मुक्त सिरों पर संवेदी रोम होते है। इनके दूसरे सिरों पर तंत्रिका तंतु होते हैं, जो संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाने है। यह उपकला नाक, आँख व कान में पायी जाती है।

जनन सरल एपीथीलियम ऊत्तक

जनन उपकला स्तंभाकार कोशिकाओं की बनी होती है तथा वृषण व अण्डाशय की भीतरी सतह में पायी जाती है। यह बार-बार विभाजित होकर शुक्राणु तथा अण्डे बनाती है।

संयुक्त एपीथीलियम ऊत्तक

संयुक्त एपीथीलियम का कार्य जीवनपर्यंत विभाजन करके नयी कोशिकाओं को जन्म देना है। इससे निर्मित कोशिकाएँ बाहरी सतह की ओर खिसकती रहती है। तथा मृत कोशिकाओं की जगह लेती है। इस प्रकार की उपकला त्वचा की उपचर्म, नेत्रों की काॅर्निया, मुख्य ग्रासन गुहिका, ग्रासनली, मलाशय तथा योनी आदि में पायी जाती है। 

पेशीय ऊत्तक

पेशीय ऊत्तक तीन प्रकार के होते है। जो निम्न प्रकार है –

  • अरेखित पेशियाँ
  • रेखित पेशियाँ
  • हृदय पेशियाँ

अरेखित पेशियाँ

अरेखित पेशी ऊत्तक की चिकनी पेशी या अनैच्छिक पेशी ऊत्तक भी कहते है। अरेखित पेशियाँ स्वतः फैलती तथा सिकुड़ती है। इनके ऊपर जीवन की इच्छा का कोई नियंत्रण नहीं होता है।

रेखित पेशियाँ

इन पेशियों को ऐच्छिक पेशी भी कहते है। ये पेशियाँ जंतु के कंकाल से जुड़ी रहती हैं और इनमें एच्छिक गति होती है।

हृदय पेशियाँ

हृदय पेशियाँ केवल हृदय की मांसल दीवार पर पायी जाती है। ये पूर्णतः अनैच्छिक होती है। हृदय जीवनपर्यंत इन्हीं के कारण धड़कता रहता है।

संयोजी ऊत्तक

संयोजी ऊत्तक एक अंग को दूसरे अंग से अथवा एक ऊत्तक से दूसरे ऊत्तक को जोड़ता है। ये शरीर में सबसे अधिक फैले रहते हैं तथा शरीर का लगभग 30 प्रतिशत भाग इन्हीं से बना होता है।

संयोजी ऊत्तक की तीन प्रमुख श्रैणियाँ होती हैं। जो निम्न प्रकार है –

  • साधारण संयोजी ऊत्तक
  • तंतुमय संयोजी ऊत्तक
  • कंकाल संयोजी ऊत्तक

साधारण संयोजी ऊत्तक

साधारण संयोजी ऊत्तक तीन प्रकार के होते है – अंतरालित ऊत्तक, जो त्वचा के नीचे, पेशियों के बीच तथा रक्त वाहिनियों व तंत्रिका के चारों ओर स्थित होते है।

तंतुमय संयोजी ऊत्तक

तंतुमय संयोजी ऊत्तक में मेट्रिक्स की मात्रा कम व रेशेदार तंतुओं की संख्या अधिक होती है।

ये दो प्रकार के होते है –

श्वेत रेशेदार
पीत रेशेदार

श्वेत की अपेक्षा पीत रेशेदार लचीले ऊत्तक होते हैं, जैसे गर्दन, उंगलियों के पोर।

कंकाल संयोजी ऊत्तक

कंकाल संयोजी ऊत्तक कंकाल का निर्माण करता है।

ये दो प्रकार के होते है। जो निम्न है –

उपास्थि
अस्थि

उपास्थि ऊत्तक काॅण्ड्रिन नामक प्रोटीन का बना होता है तथा अर्द्धठोस होता है। अस्थि ऊत्तक दृढ़ होता है तथा ओसीन नामक प्रोटीन को बना होता है।

तंत्रिका ऊत्तक

बहुकोशिकीय जंतुओं में अनेक जैविक क्रियाओं का नियंत्रण तथा सभी प्रकार के उद्दीपनों की जानकारी देने व प्रतिक्रिया कराने में तंत्रिका तंत्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। समस्त तंत्रों व अंगों का सामंजस्य स्थापित करना तंत्रिका ऊत्तक की प्रमुख विशेषता है।

तंत्रिका ऊत्तक के प्रमुख भाग निम्न है –

  • तंत्रिका कोशिकाएँ
  • तंत्रिका तंतु
  • न्यूरोग्लिया

तंत्रिका कोशिकाएँ

तंत्रिका कोशिका के तीन प्रमुख भाग है जो निम्न है –

  • कोशिकाकाय या साइटोन
  • वृक्षिका या डेड्राॅन और
  • तंत्रिकाश या एक्साॅन

साइटाॅन तंत्रिका कोशिका का प्रमुख भाग होता है। इसके कोशिका द्रव्य में अनेक प्रोटीन युक्त रंगीन कण होते है। जिन्हें निसिल्स कण कहते है।

कोशिकाकाय के अनेक प्रवर्ध बाहर की ओर निकलते रहते है, जिनमें से एक लंबा मोटा व बेलनाकार होता है। इसे एक्साॅन या तंत्रिकाश कहते है। बाकी सब छोटे प्रवर्धों को डेड्राॅन या वृक्षिका कहते है .

तंत्रिका तंतु

तंत्रिका तंतु दो प्रकार के होते है। जो निम्न प्रकार है –

  • संवेदी या अभिवाही तंत्रिका तंतु
  • प्रेरक या अपवाही तंत्रिका तंतु

संवेदी तंत्रिका तंतु आवेग को ग्राही अंगों से मस्तिष्क या रज्जु में ले जाते है।

प्रेरक तंत्रिका तंतु आवेगों को मस्तिष्क या मेरूरज्जु से कार्यकारी अंगों में ले जाते है।

न्यूरोग्लिया

ये विशेष प्रकार की कोशिकाएँ हैं, जो मस्तिष्क गुहिकाओं को स्तरित करती है।

ऊतक संबंधी रोग – Diseases related to tissue in Hindi

ऊतक हमारे शरीर में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यह हमारे शरीर में भिन्न-भिन्न प्रकार के कार्य करता है जैसा कि आप ऊपर पढ़ चुके हैं कि यह हमारे शरीर के लिए कितना जरूरी है अगर हमारे शरीर में ऊतक संबंधी कोई समस्या हो जाए तो हमें उससे संबंधी रोग होने लगते हैं आमतौर पर ऊतक संबंधी निम्नलिखित रोग होते हैं।

Rheumatoid arthritis (RA)
Scleroderma.
Granulomatosis with polyangiitis (GPA)
Churg-Strauss syndrome.
Lupus.
Microscopic polyangiitis.
Polymyositis/dermatomyositis.
Marfan syndrome.

ऊतक संबंधी तथ्य – Tissue relateds facts in Hindi 

  • कोशिकाओं का ऐसा समूह, जिनकी कोशिकाएं, रचना, उत्पत्ति, विकास एवं आकार में समान हो, ऊतक (tissue) कहलाता है।
  • ऊतकों का अध्ययन करने वाली जीव विज्ञान की शाखा को औतिकी (Histology) कहते हैं।
  • पादप ऊतकों को विकास की दृष्टि से दो वर्गो में विभाजित किया जाता है – (1) विभज्योतिकी ऊतक, (2) स्थायी ऊतक
  • एक या एक से अधिक ऊतकों से बने शरीर के उस भाग को जो एक या कई विशिष्ट कार्य करता है, अंग (Organ) कहलाता है।
  • घनाकार उपकला ऊतक (cubic epithelial tissue) का प्रमुख कार्य युग्मकों का निर्माण करना तथा वज्र्य पदार्थों का उत्सर्जन (Emissions of substances) करना है।
  • संयुक्त उपकला ऊतक (Joint epithelial tissue) एक से अधिक कोशिकीय स्तरों से बनी होती है।
  • संवेदी उपकला ऊतक (Sensory epithelial tissue) घ्राण कोष, अन्तःकर्ण, आंख की रेटीना तथा मुखगुहा की म्यूकस झिल्ली में पाया जाता है।
  • संयोजी ऊतकों (Connective tissues) का प्रमुख कार्य अंगों एवं ऊतकों को एक-दूसरे से बांधे रखना है। 
  • कई समान कार्य करने वाले अंग मिलकर अंग-तंत्र (Organ System) का निर्माण करते है।
  • मृदूतकों (Parenchyma) का प्रमुख कार्य खाद्य व जल संग्रह तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) करना है।
  • संवहनी ऊतक (vascular tissue) पौधों के अंदर पदार्थो को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का कार्य करता है।
  • एपिथीलियमी ऊतक (Epithelium tissue), त्वचा, श्वसन अंगों, आहार नाल, रूधिर वाहिनियों तथा वृक्क नलिकाओं की बाहरी व भीतरी सतहों पर मिलता है।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने उत्तक के बारे में जानकारी दिया है जैसे कि उत्तक क्या है, ऊतक किसे कहते हैं, परिभाषा, प्रकार इत्यादि (Tissue in Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारे आर्टिकल पसंद आता है या आप क्या कोई सवाल या जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद।

ऊतक का निर्माण कैसे होता है?

ऊतक बहुत सारी कोशिकाओं से मिलकर बना होता है परंतु वह सभी कोशिकाएं एक समान होती हैं और उनके कार्य भी एक समान होते हैं ज्यादातर ऊतको की संरचना एक जैसी होती है लेकिन कुछ ऊत्तकों की संरचना अलग-अलग भी हो सकती है बहुत सारे ऊतक मिलकर एक अंग का निर्माण करते हैं और बहुत सारे अंग मिलकर एक संपूर्ण शरीर का निर्माण करते हैं।

क्या रक्त को टिशू या उतर कह सकते हैं?

हां रक्त को टिशू या ऊतक कह सकते हैं क्योंकि हमारे शरीर में लगभग सभी अंग छोटे-छोटे ऊतकों से मिलकर बने होते हैं रक्त संयोजी ऊतक होता है क्योंकि यह हमारे शरीर के सभी अंगों को एक दूसरे से जोड़ता है।

ऊतक को स्वस्थ कैसे रखें?

ऊतक को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपने शरीर को स्वस्थ रखना होगा और जैसा कि आप जानते हैं शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमें हमेशा दो चीजों का ध्यान रखना चाहिए पहला हमारी खानपान और दूसरा हमारे शरीर के लिए शारीरिक श्रम अगर हम अच्छा खान-पान नहीं खाएंगे तो कितना भी शारीरिक श्रम करने का कोई फायदा नहीं है और बहुत अच्छा खाना खाने के बाद भी अगर आप शारीरिक श्रम ना करें तू भी आपका काम नहीं चलेगा तो आपको इन दोनों चीजों को अपने लाइफ में जरूर अपनाना चाहिए

उत्तक से क्या तात्पर्य है?

किसी जीव के शरीर में कोशिकाओं के एक समूह को जिन की उत्पत्ति एक समान हो तथा वे सभी कोशिकाएं कोई विशेष कार्य करती हो को उत्तक कहा जाता है। उत्तकों के आकार एवं आकृति में समानता हो या असमानता हो लेकिन उनकी उत्पत्ति एवं कार्य समान ही रहेंगे।

सबसे कठोर उत्तक कौन सा है?

शोधकर्ताओं का मानना है कि कार्बाइन हीरे से तीन गुना मज़बूत है. शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कार्बाइन नाम का एक पदार्थ अब तक का सबसे कठोर ज्ञात पदार्थ हो सकता है. उनका कहना है कि यह हीरे और ग्रेफीन से भी कठोर है.