Chicken pox in Hindi | चिकन पॉक्स के लक्षण, इलाज इत्यादि

चिकन पॉक्स की बीमारी एक बहुत ही गंभीर बीमारी है और आमतौर पर यह ग्रामीण इलाकों में ज्यादा पाई जाती है। वैसे तो इस बीमारी का इलाज संभव है और सिर्फ अच्छी देखभाल द्वारा भी इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है परंतु जानकारी के अभाव में और इलाज की कमी के कारण हर साल कई बच्चों की मृत्यु चिकन पॉक्स की बीमारी की वजह से हो जाती है।

कुछ लोगों का तो यह भी मानना होता है कि व्यक्ति को जीवन में एक बार चिकन पॉक्स की बीमारी जरूर होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है यह बिल्कुल गलत है। आम तौर पर ग्रामीण इलाकों में चिकन पॉक्स पर इसे अंधविश्वास से जोड़ा जाता है और इलाज ना मिलने की वजह से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

हम इस आर्टिकल में हम चिकन पॉक्स के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि चिकन पॉक्स बीमारी क्या है, चिकन पॉक्स के लक्षण, इलाज इत्यादि (Chicken pox in Hindi)


Table of Contents

चिकन पॉक्स क्या है? – What is chicken pox in Hindi?


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चिकन पॉक्स एक गंभीर बीमारी है आम भाषा में इसे माता कहते हैं यह दो प्रकार की होती है स्मॉल चिकन पॉक्स (छोटी माता) और चिकन पॉक्स (बड़ी माता)। यह बीमारी काफी दुखदाई होती है चिकन पॉक्स के कारण पूरे शरीर में दाने निकल आते हैं और व्यक्ति काफी कमजोर महसूस करता है इन दानों में काफी दर्द और खुजली भी होती है।

यह बीमारी एक फैलने वाली बीमारी है जो एक से दूसरे व्यक्ति को होती है। इस बीमारी का समय पर इलाज कराना चाहिए अन्यथा इससे जान जाने का खतरा भी रहता है यह ज्यादातर बच्चों और बुजुर्गों को होती है। यह बीमारी एक से दूसरे में फैलती है इसलिए पहले जब इस बीमारी का इलाज नहीं था तब ग्रामीण क्षेत्रों में इसे एक महामारी के रूप में समझा जाता था। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस बीमारी को अंधविश्वास के साथ जोड़ते हैं जिससे व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और इसी कारण से बहुत सारे मरीजों की मृत्यु हो जाती है।

अगर आपको भी चिकन पॉक्स की बीमारी है तो घबराएं नहीं। आज के समय में इसका इलाज उपलब्ध है। इसका टीका भी उपलब्ध है अगर आप चाहें तो दवाइयों द्वारा इसका इलाज कर सकते हैं अन्यथा इसका टीका भी ले सकते हैं।

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चिकन पॉक्स के लक्षण क्या हैं – What are symptoms of chicken pox in Hindi


चिकन पॉक्स के लक्षण क्या हैं

चिकन पॉक्स बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण है खुजली वाले दाने हैं यह आमतौर पर संक्रमण होने के 10 से 12 दिन के बाद दिखाई देते हैं।

  • त्वचा पर छाले पड़ना
  • छालों पर पपड़ी जमना
  • त्वचा पर लाल धब्बे होना
  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • बुखार आना
  • भूख ना लगना
  • सिर दर्द होना
  • त्वचा पर खुजली होना
  • गले में खराश होना या गला बैठ जाना
  • त्वचा पर रैशेज हो जाना

यह सभी चिकन पॉक्स बीमारी के लक्षण हैं त्वचा पर दाने और छाले उग जाते हैं जो काफी दुखदाई होते हैं और इनमें काफी दर्द होता है और खुजली होती है।


चिकन पॉक्स के कारण क्या हैं – What are causes of chicken pox


चिकन पॉक्स एक बीमारी है जो विषाणु से होती है मुख्य रूप से यह व्यक्ति के मुंह गले और त्वचा पर असर दिखाती है यह रोग केवल मनुष्य में ही होता है और आमतौर पर यह छोटे बच्चे और बड़े बुजुर्गों को अधिक होता है।

यह रोग मुख्य रूप से 2 विषाणुऔं के द्वारा होता है

– वायरोला मेजर 

– वायरोला माइनर

वायरोला माइनर विषाणु वायरोला मेजर की तुलना में कम खतरनाक होता है और इससे मौतें भी कम होती हैं यह रोग अत्याधिक संक्रामक होता है और बहुत जल्दी-जल्दी फैलता है इसके टीके के आविष्कार से पहले यह रोग ग्रामीण क्षेत्रों में महामारी की तरह फैलता था और इससे बहुत लोगों की मृत्यु हो जाया करती थी।

वायरोला मेजर यह विषाणु ज्यादा खतरनाक होते हैं इसके कारण मौतें होने की संभावना भी अधिक है इसमें व्यक्ति को अंधापन, चेहरे पर दाग इसके साथ-साथ कई अन्य समस्याएं भी होती हैं।


चिकन पॉक्स से बचाव के उपाय – Prevention of chicken pox in Hindi


चिकन पॉक्स होने पर घबराएं नहीं किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श लें और दवाओं का सेवन करें यह बीमारी ठीक हो जाएगी।

  • यदि आप को बुखार है तो आप खूब ढेर सारा पानी पीते रहे।
  • फफोलो में खरोच या चोट से बचाव के लिए सोते समय सूती कपड़े का इस्तेमाल करें।
  • गर्भवती महिलाओं को संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचाएं
  • बीमार बच्चे को घर पर ही रखें स्कूल ना भेजें क्योंकि यह बीमारी फैलती है और अन्य बच्चों को भी हो सकती है।
  • अपने आसपास की जगह को साफ सुथरा रखें।
  • बीमार व्यक्ति का विशेष ध्यान रखें।
  • बीमार व्यक्ति का ध्यान रखें अगर व्यक्ति को लगातार तेज बुखार है या कोई खाने पीने में समस्या आ रही है तो तत्काल डॉक्टर से सलाह ले।
  • शुरुआत में ही चिकन पॉक्स के लक्षण होने पर डॉक्टर से मिले।
  • रोगी को घी और तेल से युक्त खाना ना दें
  • अच्छा खाना दे
  • अगर किसी छोटे बच्चे को चिकन पॉक्स हो तो उसके हाथों को बांधे जिससे वह खुजली ना कर सके।
  • बच्चे का बिस्तर हमेशा मुलायम और साफ सुथरा रखें।
  • घर में डिटॉल आदि का प्रयोग करें

स्मॉल पॉक्स और चिकन पॉक्स में क्या अंतर है? – What are the differences between small pox and chicken pox


स्मॉल पॉक्स और चिकन पॉक्स इन दोनों ही बीमारियों में पूरे शरीर में दाने निकलते हैं बड़ी माता या चिकन पॉक्स के दाने बड़े होते हैं और छोटी माता या स्मॉल पॉक्स के दाने छोटे होते हैं

स्मॉल पॉक्स में दाने सुखे रहते हैं और इनमें किसी प्रकार का मवाद नहीं जमता और ना ही इन पर पापड़ी जमती है यह बीमारी बच्चों को ज्यादातर छोटी उम्र में होती है।

चिकन पॉक्स के दानों में मवाद वापस भर जाता है यह बीच में से फटने से लगते हैं और इनमें सूखी पपड़ी भी निकलने लगती है।


चिकन पॉक्स में क्या खाना चाहिए – Food to eat in chicken pox in Hindi


चिकन पॉक्स से ग्रस्त व्यक्ति को अच्छा और स्वस्थ भोजन खाना चाहिए और समय पर भोजन खाना चाहिए चाहे मन करें या ना करें क्योंकि चिकन पॉक्स की बीमारी होने पर व्यक्ति का खाने का मन नहीं करता है

चिकन पॉक्स की बीमारी होने पर हमें पौष्टिक आहार खाना चाहिए जिससे हम जल्दी से जल्दी स्वस्थ हो जाए

  • हल्दी हल्दी में कुछ ऐसी केमिकल प्रॉपर्टीज होती हैं जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं।
  • लहसुन लहसुन में भी ऐसी केमिकल प्रॉपर्टीज होती है जो हमारे शरीर को ताकत देती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
  • केला केला हमारे शरीर को ऊर्जा देता है और इसमें काफी अच्छी मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है जो हमारे शरीर और पाचन तंत्र के लिए भी काफी अच्छा है।
  • तरबूज, ककड़ी और खीरा अगर आप उन्हें अपनी डाइट में शामिल करते हो तो इससे आपके शरीर को ठंडक मिलेगी।
  • तुलसी के बीज चिकन पॉक्स की बीमारी में जो लाल दाने होते हैं उनमें बहुत अधिक खुजली होती है तुलसी के बीज हमारे शरीर को ठंडक देते हैं और खुजली को कम करते हैं इसके साथ हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करते हैं।
  • छाछ या दही छाछ दही हमारे शरीर को ठंडक देते हैं और हमारे पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं चिकन पॉक्स की बीमारी में हमेशा ऐसा भोजन खाना चाहिए जो आसानी से पच जाए।
  • पानी अपने शरीर में पानी की कमी ना होने दें ढेर सारा पानी पिए इसके साथ-साथ आप चाय कॉफी आदि का सेवन भी कर सकते हैं और जूस का सेवन भी कर सकते हैं।

चिकन पॉक्स में क्या नहीं खाना चाहिए – Food to avoid in chicken pox in Hindi


  • अधिक नमक वाला भोजन व्यक्ति को परेशान कर सकता है इसलिए अधिक नमक वाला भोजन नहीं खाना चाहिए।
  • खट्टे फल खाने से बचें खट्टे फल खाने से व्यक्ति को झनझनाहट महसूस होती है और व्यक्ति इतनी जल्दी ठीक नहीं होगा।
  • तीखे भोजन या तले हुए भोजन खाने से बचें यह सभी भोजन शरीर में पानी की मात्रा को कम करते हैं।

चिकन पॉक्स की बीमारी का पता कैसे लगता है – How is chicken pox disease diagnosed


आमतौर पर इसलिए बीमारी में हो रहे लक्षणों और दानों को देखकर बताया जाता है कि यह बीमारी क्या है इसके बाद डॉक्टर इस बात को कंफर्म करने के लिए कुछ टैस्ट करता है जैसे कि ब्लड टैस्ट आदि।

चिकन पॉक्स बीमारी में आमतौर पर हो रहे लक्षणों के आधार पर ही यह पता चल जाता है यह बीमारी क्या है लक्षण जैसे दाने होना, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, दानों में दर्द होना आदि इसके साथ-साथ कई अन्य सारे लक्षण भी होते हैं डॉक्टर इन्हीं लक्षणों के आधार पर इस बात को कंफर्म करता है कि व्यक्ति को चिकन पॉक्स हुआ है।

उसके बाद इस बात को हंड्रेड परसेंट सुनिश्चित करने के लिए कुछ ब्लड टेस्ट करता है जैसे सीबीसी (कंपलीट ब्लड टैस्टट) आदि जिनके द्वारा वह डॉक्टर यह सुनिश्चित कर लेता है कि क्या व्यक्ति को सच में चिकन पॉक्स है या कोई और बीमारी है।


चिकन पॉक्स का इलाज – Treatment for chicken pox in Hindi


चिकन पॉक्स के इलाज में मुख्य रूप से 2 बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है

पहला रोगी को लोगों के संपर्क में आने से बचाना है इसलिए उसे स्कूल कॉलेज या बाहर खेलने नहीं जाने देना है।

और दूसरा चिकन पॉक्स की वैक्सीन आती है जिसे लगाने से चिकन पॉक्स ठीक हो जाता है मुख्य रूप से

मुख्य रूप से इसका इलाज दो तरीकों से किया जाता है पहला जिसमें व्यक्ति के लक्षणों को कम किया जाता है जिसमें दर्द को कम करना, बुखार को कम करना और खुजली आदि को कम करना शामिल है। इसमें आम दवाइयों का प्रयोग किया जाता है जैसे पेरासिटामोल और दूसरा तरीका यह है जिसमें एंटीवायरल एजेंट दवाइयों का प्रयोग किया जाता है।


चिकन पॉक्स का घरेलू इलाज – Home remedies for chickenpox in Hindi


अगर आप लोगों को चिकन पॉक्स की समस्या है तो आप इन उपायों को जरूर अपना कर देखिए नीचे दिए गए सभी तरीके पूर्ण रूप से आयुर्वेदिक और घरेलू हैं। जिनके अनेक लाभ हैं और दुष्प्रभाव बिल्कुल भी नहीं है।

गाजर और धनिया

गाजर और धनिया दोनों की ही तासीर ठंडी होती है यह एक अच्छे एंटी ऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं अगर आप इन दोनों को उबालकर इनका रस निकालकर पिऐ तो काफी लाभदायक होगा।

नीम के पत्ते

नीम के पत्ते को पानी के साथ पीसकर प्रभावित भाग पर लगाएं नीम के पत्ते को पानी में उबालें और अब इस पानी से नहाए। इससे आपके दानों के फैलने की संभावना कम होगी और आपको दर्द और अन्य समस्याओं में राहत मिलेगी।

काली मिर्च का सेवन

कालीमिर्च सिर्फ चिकन पॉक्स की बीमारी में ही नहीं बल्कि अन्य कई बीमारियों में लाभदायक है यहां तक कि यह हमारे पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है।

जई का आटा

जई का आटा भी चिकन पॉक्स की बीमारी को ठीक करने में मदद करता है यह खुजली से राहत दिलाता है इसके साथ साथ हम इसको पानी में डालकर नहाए तो हमें ज्यादा राहत मिलेगी।

सिरका

सिरके में भी कुछ ऐसी तासीर होती है जिसकी वजह से यह चिकन पॉक्स की बीमारी को ठीक करने में लाभदायक होता है।इसके साथ-साथ यह अन्य कई प्रकार की बीमारियां ठीक करने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है।

हरी मटर

हरी मटर को पानी में पकाएं और पानी में पकाने के बाद इसको अपने पूरे शरीर पर लगाएं विशेषकर जहां जहां पर दाने हैं वहां के लाल चकत्ते समाप्त हो जाएंगे।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने चिकन पॉक्स के बारे में संपूर्ण जानकारी बताई है जैसे कि चिकन पॉक्स बीमारी क्या है, चिकन पॉक्स के लक्षण, इलाज इत्यादि (Chicken pox in Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारे आर्टिकल पसंद आता है या आपके कोई सवाल या जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद।

चिकन पॉक्स कितनी बार होता है?

चिकन पॉक्स कितनी भी बार हो सकता है परंतु आमतौर पर व्यक्ति के पूरे जीवन काल में यह ज्यादा से ज्यादा एक या दो बार होता है।

चिकन पॉक्स का टीका कब लगता है?

चिकन पॉक्स का टीका बचपन में ही लगा दिया जाता है इसके साथ-साथ जब व्यक्ति को चिकन पॉक्स की समस्या होती है तब भी इस टीके का प्रयोग किया जाता है।

छोटी माता (Small pox) में क्या खाना चाहिए?

छोटी माता में व्यक्ति को स्वस्थ भोजन खाना चाहिए। ज्यादा खट्टा यह ज्यादा तेल मसाले वाला भोजन नहीं खाना चाहिए इससे शरीर में पानी की कमी होती है और पानी की कमी के कारण व्यक्ति को जल्दी ठीक होने में भी समस्याएं आती हैं।

चिकन पॉक्स को माता क्यों कहते है?

चिकन पॉक्स को माता इसलिए कहते हैं क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है कहीं से चिकन पॉक्स तो कहीं से माता के नाम से पुकारा जाता है यह दोनों बीमारियां एक ही है।

छोटी माता और बड़ी माता में क्या अंतर होता है?

जब माता शुरुआती रूप में होती है तब उसे छोटी माता कहते हैं इसमें दाने भी छोटे होते हैं और दर्द भी कम होता है और दाने सूखे रहते हैं जब यह दाने पक जाते हैं और दर्द बढ़ जाता है तब इसे बड़ी माता कहते हैं।

चिकन पॉक्स बीमारी में किस तरीके से नहाया जाए?

चिकन पॉक्स की बीमारी में व्यक्ति को सावधानी के साथ नहाना चाहिए जिससे व्यक्ति के दाने ना दुखे अन्यथा व्यक्ति को बहुत दर्द होगा। चिकन पॉक्स से ग्रस्त व्यक्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति नहाने के लिए हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। पानी में नीम के पत्ते डालकर उस पानी को उबाले और फिर उस पानी को ठंडा करके उसे नहाए।

संदर्भ (Reference)

A study of the safety and effectiveness of a chickenpox vaccine in HIV-infected children. (n.d.). ClinicalTrials.gov. https://clinicaltrials.gov/ct2/show/NCT00000837  

Chickenpox. (2019). Better Health Channel https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/conditionsandtreatments/chickenpox  

Chickenpox | About | Varicella | CDC. (2019, October 29). Centers for Disease Control and Prevention. https://www.cdc.gov/chickenpox/about/index.html

Chickenpox. (n.d.). PubMed Central (PMC). https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3275319/

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