Reproductive System in Hindi | जनन तंत्र क्या है, कार्य, इत्यादि

आज मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं कि आप इस दुनिया में कैसे आए? आपने भी कभी ना कभी यह सवाल अपने मां-बाप से जरूर पूछा होगा और मैं जानता हूं कि उन्होंने आपको क्या जवाब दिया होगा हो सकता है उन्होंने शायद बोला हूं कि आप भगवान के घर से आए हो या कोई परी आपको उनके पास छोड़ कर गई है परंतु ऐसा बिल्कुल नहीं है। आपके जन्म में जनन तंत्र की एक बहुत ही अहम भूमिका है।

सभी जीव जनन करते हैं चाहे वह मनुष्य हो या जंतु यहां तक कि छोटे-छोटे जीव जो हमें नग्न आंखों से दिखाई तक नहीं देते वह भी जनन करते हैं मुख्य रूप से जनन  दो प्रकार का होता है एक लैंगिक जनन और दूसरा अलैंगिक जनन। मनुष्य में जनन करने के लिए दो पार्टनर की आवश्यकता होती है एक नर और दूसरी मादा। जनन एक बहुत ही सामान्य सी प्रक्रिया है परंतु बहुत सारे लोग अपने बच्चों को और अन्य लोगों को जनन के बारे में खुलकर नहीं बताते हैं जिससे काफी सारे लोगों को इस विषय के बारे में ज्ञान ही नहीं होता है। 

इसलिए आज इस आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की जनन तंत्र क्या है, जनन तंत्र कितने प्रकार का होता है, नर जनन तंत्र क्या है और मादा जनन तंत्र क्या है इसके साथ साथ ही हम जनन तंत्र से संबंधित कुछ बीमारियों के बारे में भी पढ़ेंगे जिसके बारे में आपको भी पता होना बहुत आवश्यक है (Reproductive System in Hindi)

जनन तंत्र क्या है – What is Reproductive System in Hindi

रिप्रोडक्शन या जनन एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा सभी जीवित प्राणी अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करते हैं। यह प्रक्रिया सभी सजीवों के वंश और जीवन की निरंतरता को बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है। जनन के दौरान सबसे अहम भूमिका डीएनए की होती है क्योंकि डीएनए की वजह से ही नई कोशिका का निर्माण होता है और फिर वह कोशिका धीरे धीरे निरंतर विभाजित होकर असंख्य हो जाती हैं। और इन कोशिकाओं से ऊतकों का निर्माण होता है और बहुत सारे ऊतक मिलकर अंगों का निर्माण करते हैं और इन सभी अंगों से मिलकर एक संपूर्ण शिशु का निर्माण हो जाता है।

डीएनए कोशिका के अंदर होता है और इसमें क्रोमोसोम होते हैं क्रोमोसोम को गुणसूत्र भी कहते हैं यह प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़ों में होते हैं। जनन की प्रक्रिया के दौरान जब किसी नई संतान की उत्पत्ति एक कोशिका के रूप में होती है तब उस कोशिका में पेरेंट्स कोशिका से लगभग सभी गुण आ जाते हैं और यह सभी गुण क्रोमोसोम के रूप में संतान कोशिका में जाते हैं।

जनन तंत्र के प्रकार – Types of Reproductive System in Hindi

जनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है 

  • लैंगिक जनन 
  • अलैंगिक जनन

लैंगिक जनन 

इस प्रकार का जनन करने के लिए नर या मादा पार्टनर की आवश्यकता नहीं होती किसी भी एक पेरेंट्स से डॉटर कोशिकाएं उत्पन्न होने लगती हैं इस प्रकार का जनन ज्यादातर सूक्ष्मजीवों में होता है जैसे अमीबा, हाइड्रा, राइबोसोमस इत्यादि।

अलैंगिक जनन

इस प्रकार का जनन करने के लिए नर या मादा पार्टनर की आवश्यकता होती है नर और मादा पार्टनर जब संभोग करते हैं तब इस प्रकार का जनन होता है इस प्रकार का जनन ज्यादातर स्तनधारी जीवो और सभी बड़े जीवो में होता है जैसे पशु पक्षी जानवर मनुष्य इत्यादि इत्यादि।

मानव में जनन तंत्र – Human Reproductive System in Hindi 

सभी मानवों में लैंगिक जनन होता है मानव को जनन करने के लिए शारीरिक रूप से परिपक्व होना चाहिए लैंगिक परिपक्वता हमारे जीवन काल का वह समय है जब पुरुषों में शुक्राणु और मादा में अंड कोशिका का निर्माण होना शुरू हो जाता है आमतौर पर लैंगिक परिपक्वता 11 से 13 वर्ष की आयु में होती है लड़कियों में यह पहले भी हो सकती है और बाद में भी। किशोरावस्था की इस अवस्था को यौवनारंभ कहते हैं क्योंकि यही से यौवन का आरंभ होता है।

इंसानों में जनन करने के लिए विशेष अंग होते हैं जैसे पुरुषों में लिंग और महिलाओं में योनि और जब महिला और पुरुष आपस में संभोग करते हैं तब जनन होता है और इस पूरे तंत्र को मानव जनन तंत्र कहते हैं।

पुरुष जनन तंत्र – Male Reproductive System in Hindi

पुरूषों में जनन करने के लिए एक विशेष अंग होता है जिसे लिंग कहते हैं इसमें से शुक्राणु नामक कोशिका निकलती है शुक्राणु का निर्माण वर्षण में होता है संभोग के दौरान जब यह शुक्राणु पुरुष से महिला में स्थानांतरित होता है तब महिला जनन तंत्र का कार्य शुरू होता है।

नर जनन तंत्र के अंग और उनके कार्य – Organs and functions of the male reproductive system in Hindi

पुरुष जनन तंत्र में कई अंग होते हैं और इन सभी अंगो का कार्य भी अलग-अलग होता है परंतु पुरुष जनन तंत्र के कुछ अंश अधिक महत्वपूर्ण होते हैं जैसे वृषण, शुक्रवाहिनी, मूत्र मार्ग और इनसे संबंधित ग्रंथियां

वृषण

नर जनन तंत्र का यह हिस्सा काफी महत्वपूर्ण होता है शुक्राणुओं का निर्माण वृषण में ही होता है मनुष्य के शरीर में वृषण की संख्या दो होती है। यह लिंग के नीचे वृषण कोष में उपस्थित होता है वृषण कोष का तापमान शरीर के तापमान से कम होता है क्योंकि शुक्राणु शरीर के तापमान पर जीवित नहीं रह पाते इसलिए वृषण कोश(एक थैली नमक संरचना जिसके अंदर वृषण रखे होते हैं) शरीर के अंदर ना होकर बाहर की तरफ लटका हुआ होता है। 

वृषण का मुख्य कार्य नर युग्मक(शुक्राणु ) का निर्माण करना होता है।

वृषण ग्रंथि शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को भी उत्पन्न करती है टेस्टोस्टेरोन हार्मोन हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है इसका मुख्य कार्य शरीर में शुक्राणुओं के उत्पादन को नियंत्रण करना तथा लड़कों में यौवनारंभ के दौरान ज्यादातर परिवर्तन टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के कारण ही होते हैं।

शुक्रवाहिनी

  • यह एक नली नुमा संरचना होती है 
  • यह वृषण से शुक्राणु तक जुड़ी हुई होती है 
  • यह शुक्राणुओं को वृषण से शिशन या लिंग तक पहुंचाने का कार्य करती है।

मूत्र मार्ग

मूत्र मार्ग, मूत्र और वीर्य दोनों के बाहर जाने का मार्ग है यह एक बाहरी आवरण से ढका हुआ होता है और इस पूरी संरचना को लिंग बोलते हैं संभोग के दौरान वीर्य लिंग से होता हुआ योनि में जाता है। शरीर का यह हिस्सा काफी संवेदनशील होता है जब किसी व्यक्ति को लिंग पर हल्की सी भी चोट लग जाती है तब उसे असहनीय दर्द होता है। 

नर जनन तंत्र संबंधी ग्रंथियां

नर जनन तंत्र में विभिन्न विभिन्न प्रकार की ग्रंथियों का उपयोग भी होता है इन ग्रंथियों के विभिन्न विभिन्न कार्य होते हैं इनमें से ज्यादातर ग्रंथियां अलग-अलग प्रकार के रसों का स्राव करती हैं जो जनन की प्रक्रिया के लिए आवश्यक होते हैं।

शुक्रशय और प्रोस्टेट ग्रंथि, शुक्रवाहिनी भिन्न-भिन्न प्रकार के रसों का स्राव करती हैं जिनसे वीर्य पतला हो जाता है अर्थात वीर्य तरल अवस्था में आ जाता है।

  • शुक्राणु तरल माध्यम में आ जाते हैं
  • यह माध्यम शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करता है
  • जब वीर्य पतला रहता है तब वह आसानी से स्थानांतरित हो सकता है

मादा जनन तंत्र के अंग और उनके कार्य – Organs and functions of Female Reproductive System in Hindi

  • हर मादा में 2 जोड़ी अंडाशय होते हैं यह शरीर के निचले भाग में होते हैं यह योनि के दोनों तरफ दाएं और बाएं तरफ होते हैं 
  • प्रत्येक अंडाशय लगभग 4 सेंटीमीटर लंबा और 2.5 सेंटीमीटर चौड़ा और 1 पॉइंट 5 सेंटीमीटर मोटा होता है
  • अंडाशय के अंदर बहुत सारी अंड कोशिकाएं होती हैं
  • अंडाशय का आंतरिक भाग जंतुओं और संयोजी ऊतक से बना होता है जिसे स्टोमा कहते हैं अंडाशय का मुख्य कार्य अंडाणु पैदा करना होता है 
  • अंडाशय से हर महीने एक अंडाणु की उत्पत्ति होती है जो फेलोपियन ट्यूब में आता है 

अण्डवाहिनियाँ (Fallopian Tube)

  • यह एक ट्यूब के आकार की होती है यह अंडाशय और गर्भाशय को जोड़ती है
  • इसका तारीख अंडाशय द्वारा उत्पन्न अंड कोशिका को गर्भाशय में स्थानांतरित करना होता है
  • जब शुक्राणु संभोग द्वारा फेलोपियन ट्यूब तक पहुंचता है तब अंडा पहले से ही फेलोपियन ट्यूब में होता है और यह दोनों आपस में जब मिलते हैं तब निषेचन होता है और उसके बाद वह निषेचित अंडा गर्भाशय में जाकर स्थापित हो जाता है।
  • अंडकोशिका और शुक्राणु का निषेचन यहीं पर होता है।

गर्भाशय (Uterus)

  • गर्भाशय की आकृति देखने में एक नाशपाती के समान होती है
  • इसका आकार सामान्यता 7.5 सेंटीमीटर लंबा 5 सेंटीमीटर चौड़ा और 3.5 सेंटीमीटर मोटा होता है
  • इसकी दोनों तरफ अर्थात दाएं और बाएं ओर अंड वाहिनी होती हैं
  • इसका निचला भाग काफी पतला होता है जिसे ग्रीवा कहते हैं
  • गर्भाशय का निचला छेद इसी में खुलता है गर्भाशय की भित्ति मस्कुलर होती है अर्थात उसमें मांसपेशियां होती हैं और यह जगह अंदर की तरफ से खाली होती है तथा इसकी भित्ति काफी मोटी होती है

योनि (Vagina)

  • योनि महिलाओं में गर्भाशय के निचले भाग को योनि कहते हैं इसका आकार सामान्यता 7.5 सेंटीमीटर लंबा होता है 
  • इसकी त्वचा काफी संवेदनशील होती है
  • इसके ठीक नीचे मलाशय होता है योनि के शरीर से बाहर खुलने वाले द्वार को योनि द्वार कहते हैं 
  • योनि द्वार में कई ग्रंथियां पाई जाती हैं जिसके द्वारा एक चिपचिपा द्रव्य निकलता है यह द्रव्य संभोग के समय योनि को चिकना बना देता है
  • इस योनि के ऊपरी भाग में एक छोटा मटर जैसा दाना होता है जो काफी संवेदनशील और उत्तेजक अंग होता है जब संभोग के दौरान लिंग इस उभार को स्पर्श करता है तो महिला को बड़ा आनंद आता है
  • संभोग के दौरान वीर्य निकल कर योनि में गिरता है और योनि इसे गर्भाशय तक पहुंचा देती है

मादा जनन तंत्र के कार्य – Function of Reproductive System in Hindi

माता जनन तंत्र में भिन्न-भिन्न प्रकार के अंग होते हैं जो उपयोग में आते हैं इन सभी अंगो का भिन्न-भिन्न कार्य होता है मुख्य रूप से मादा जनन तंत्र में योनि, गर्भाशय, फेलोपियन ट्यूब, और अंडाशय का कार्य होता है अंडाशय में अंड कोशिकाएं होती हैं और यह फेलोपियन ट्यूब द्वारा गर्भाशय में जाती हैं संभोग के दौरान जब शुक्राणु योनि तक पहुंचता है तब योनि इसे गर्भाशय तक पहुंचा देती है और गर्भाशय से होता हुआ शुक्राणु फेलोपियन ट्यूब में पहुंच जाता है जहां पर अंडाणु से आया हुआ अन्य कोशिका होती है और जब यह दोनों आपस में मिलते हैं तो इसे निषेचन कहते हैं और इस निषेचित हुए अंडे को युगमनज कहते हैं जो गर्भाशय में रोहित होने के पश्चात यह विभाजन और विभेदन के द्वारा अपनी कोशिकाओं को बहुत जल्दी बनाता है और एक भ्रूण का निर्माण करता है

प्लेसेंटा एक विशिष्ट प्रकार की संरचना होती है यह उत्तक की बनी होती है इसका आकार तश्तरी नुमा होता है यह संरचना गर्भाशय में धंसी हुई होती है इसके मुख्य रूप से दो कार्य होते हैं मां के रक्त से ग्लूकोस ऑक्सीजन आदि पोषण को भ्रूण तक पहुंचाना। और भ्रूण द्वारा उत्पादित अपशिष्ट पदार्थों का निपटान करना यह भ्रूण एक बच्चे का रूप लेने में लगभग 9 महीने लगाता है अर्थात अंडे के निषेचन से लेकर शिशु के जन्म तक के समय को गर्व काल कहते हैं तथा यह अवधि लगभग 9 महीने के आसपास होती है और आपने सुना भी होगा कि गर्भवती महिलाओं को 9 महीने में बच्चे होते हैं।[

जनन तंत्र से संबंधित बीमारियां – Diseases related to Reproductive system in Hindi

जनन तंत्र से संबंधित कई प्रकार के भिन्न-भिन्न बीमारियां हो सकती हैं और इन बीमारियों से व्यक्ति को कई प्रकार के कष्ट और समस्याएं हो सकती हैं जिनमें से सबसे प्रमुख कष्ट यह है कि ज्यादातर लोगों को संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो पाती है। किसी भी व्यक्ति को जनन तंत्र से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याएं प्राकृतिक कारणों और मानव जनित कारणों से भी हो सकते हैं जैसे अगर किसी को कोई बीमारी है प्राकृतिक बीमारी है तो उस कारण से भी यह समस्या हो सकती है और अगर किसी व्यक्ति को किसी एक्सीडेंट इत्यादि की वजह से ऐसी कोई समस्या आ रही है तो यह भी एक कारण हो सकता है।

नर जनन तंत्र से संबंधित बीमारियां – Diseases of Male Reproductive system in Hindi

पुरुषों में जनन तंत्र संबंधी भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं जैसे

  • वृषण नासूर (Testicular Cancer)
  • लिंग का कैंसर (Cancer of the Penis)
  • फिमोसिस (चमड़ी की समस्याएं) (Phimosis (Foreskin Problems))
  • वृषण मरोड़ (Testicular Torsion)
  • पुरुष बांझपन (Male Infertility)
  • पुरुष नसबंदी (Vasectomy)
  • नपुंसकता (Erectile Dysfunction)
  • पेरोनी रोग (Peyronie’s Disease)
  • वैरिकोसेलेस (Varicoceles)
  • वीर्य में रक्त (Blood in Semen)
  • जलवृषण (Hydrocele)

मादा जनन तंत्र से संबंधित बीमारियां – Diseases of Female Reproductive system in Hindi

महिलाओं में जनन तंत्र संबंधित भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं जैसे

  • एंडोमेट्रिओसिस  (Endometriosis) 
  • गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids)
  • स्त्री रोग कैंसर (Gynecologic Cancer)
  • एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS)
  • अंतराकाशी मूत्राशय शोथ (Interstitial Cystitis)
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) (Polycystic Ovary Syndrome )
  • यौन संचारित रोग (एसटीडी) (Sexually Transmitted Diseases )
  • यौन हिंसा (Sexual Violence)

निष्कर्ष

आज इस आर्टिकल में हमने जनन तंत्र के बारे में बताया है जिसमें हमने जनन तंत्र को विस्तारपूर्वक समझाया है जैसे जनन तंत्र क्या है, जनन तंत्र कितने प्रकार का होता है, नर जनन तंत्र क्या है और मादा जनन तंत्र क्या है इसके साथ साथ ही हम जनन तंत्र से संबंधित कुछ बीमारियों के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया है (Reproductive System in Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा अगर आपके इस आर्टिकल से संबंधित कोई सवाल यह सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपके सवालों का जवाब देने का प्रयास जरूर करेंगे धन्यवाद।

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द्विखंडन