Protozoa in Hindi | प्रोटोजोआ की परिभाषा, क्या है, प्रकार इत्यादि

इस धरती पर सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के जीव जंतु इत्यादि रहते हैं कुछ बड़े विशालकाय होते हैं तथा कुछ तो इतने सूक्ष्म होते हैं कि जिन्हें देखने के लिए हमें उपकरणों का उपयोग करना पड़ता है आमतौर पर ऐसे जीवो को सूक्ष्मजीव कहा जाता है।

हमारी पृथ्वी पर बहुत सारे सूक्ष्मजीव होते हैं तथा इनकी कई प्रजातियां होती हैं आज इस आर्टिकल में हम प्रोटोजोआ के बारे में पढ़ेंगे प्रोटोजोआ सूक्ष्म जीवों की एक प्रजाति है यह जीव प्रोकैरियोटिक प्रकार के होते हैं तथा एक कोशिकीय जीव होते हैं यह आमतौर पर संघ में रहना पसंद करते हैं तथा कई प्रोटोजोआ हमारे सहायक होते हैं तो कई प्रकार के प्रोटोजोआ के कारण हम बीमार भी पड़ सकते हैं।

हम इस आर्टिकल में प्रोटोजोआ के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि प्रोटोजोआ क्या है, प्रोटोजोआ के प्रकार क्या-क्या हैं, प्रोटोजोआ की संरचना क्या है इत्यादि (Protozoa in Hindi)

प्रोटोजोआ क्या है – What is protozoa in Hindi

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प्रोटोजोआ को हिंदी में प्रोटोजोआ तथा अंग्रेजी में Protozoa कहते हैं Proto का अर्थ होता है प्रथम तथा zoan का अर्थ होता है जीव। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रोटोजोआ ही प्रथम जीव थे जिनका उद्गम धरती पर हुआ था।

प्रोटोजोआ एक कोशिकीय जीव होते हैं इनकी कोशिकाएं यूकेरियोटिक प्रकार की होती हैं तथा प्रोटोजोआ आकार में इतने छोटे होते हैं कि हम इन्हें नग्न आंखों से नहीं देख सकते इन्हें देखने के लिए हमें सूक्ष्मदर्शी यंत्र की आवश्यकता पड़ती है।

कुछ प्रोटोजोआ अच्छे होते हैं तथा कुछ प्रोटोजोआ मनुष्य और जंतुओं में रोग उत्पन्न करते हैं इस प्रकार के प्रोटोजोआ को रोगजनक (रोगों को जन्म देने वाला) प्रोटोजोआ कहते हैं।

आमतौर पर प्रोटोजोआ का निवास स्थान रुका हुआ और ठहरा हुआ पानी होता है यह समुद्र नदियों नालों इत्यादि जैसी जगहों पर आसानी से मिल जाते हैं तथा ज्यादातर प्रोटोजोआ झुंड में रहना पसंद करते हैं। प्रोटोजोआ किसी एक जीव का नाम नहीं है बल्कि यह एक प्रकार के जीवों के संघ का नाम है।

प्रोटोजोआ के तथ्य – Facts about Protozoa in Hindi

  • यह अत्यंत सूक्ष्म स्वतंत्र जीवी होते हैं तथा यह परजीवी भी होते हैं
  • संकुचनशील रसधानी मृदुजलीय प्रोटोजुआ में ही पाया जाता है।
  • इस समुदाय के जीव कलिकायन द्विविखण्डन बहुविखण्डन कभी कभी सयुग्मन के द्वारा प्रजनन करते है।
  • एक कोशिकीय शरीर का जीव द्रव्य, बाह्य द्रव्य तथा अन्तः द्रव्य में विभेदित होता है।
  • प्रचलन कूटपाद पक्षमो या कशाभिका द्वारा होता है।
  • यह एक केन्द्रकीय या बहुकेन्द्रकीय होते हैं।

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प्रोटोजोआ के प्रकार – Types of protozoa in Hindi

प्रोटोजोआ अपने आप में एक संग होता है तथा प्रोटोजोआ संघ को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा गया है

  1. अमीबीय प्रोटोजोआ
  2. कशाभी प्रोटोजोआ
  3. पक्ष्माभी प्रोटोजोआ
  4. स्पोरोजोआ प्रोटोजोआ

अमीबीय प्रोटोजोआ

  • आमतौर पर इस प्रकार के प्रोटोजोआ जीवधारी स्वच्छ जल, समुद्री जल, तथा नम मृदा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं आमतौर पर यह नदी नालों पोखर तलाब इत्यादि जैसी जगहों पर मिलते हैं।
  • इस प्रकार के जीवधारी में कुछ ऐसे विशेष अंग पाए जाते हैं जो इन्हें भोजन को पकड़ने तथा गति करने में मदद करते हैं जैसे कूटपाद(pseudopodia) इत्यादि।
  • प्रोटोजोआ के जो जीव समुद्र में रहते हैं उनकी सतह पर सिलका के कवच पाए जाते हैं 
  • इस प्रकार के कुछ प्रोटोजोआ परजीवी भी होते हैं जैसे एंटअमीबा परजीवी
  • उदाहरण – अमीबा

कशाभी प्रोटोजोआ

  •  इस समूह के परजीवी स्वच्छंद तथा परजीवी होते हैं यह मुक्त रूप से गति करते हैं 
  • इनके शरीर पर flagella पाए जाते हैं
  • जिन प्रोटोजोआ में flagella होते हैं वह रोग उत्पन्न करते हैं
  • नींद संबंधी रोग (स्लीपिंग सिकनेस) इसी प्रकार के प्रोटोजोआ से होती है जो trypanosoma नामक परजीवी की वजह से होती है

पक्ष्माभी प्रोटोजोआ

  • इस प्रकार के प्रोटोजोआ सदस्य जलीय होते हैं तथा अत्यंत सक्रिय और गति करने वाले होते हैं
  • इस प्रकार के प्रोटोजोआ में हजारों की संख्या में cilia होते हैं इनमें गुहा होती है जो कोशिका की सतह की बाहर की तरफ खुलती है
  • इस प्रकार के प्रोटोजोआ में cilia होता है जो भोजन को इनके मुख की तरफ भेजने का काम करता है
  • उदाहरण – पैरामीशियम

स्पोरोजोआ प्रोटोजोआ

  • इस प्रकार के प्रोटोजोआ के जीवन चक्र में संक्रमण करने योग्य बीजाणु जैसी अवस्था में पाई जाती हैं 
  • इनमें चलकअंग नहीं होते
  • उदाहरण – प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)

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प्रोटोजोआ की संरचना – Structure of protozoa in Hindi

  • प्रोटोजोआ यूकैरियोटिक कोशिका होती है।
  • प्रोटोजोआ एक कोशिकीय जीव होते हैं।
  • आमतौर पर प्रोटोजोआ का आकार 1 माइक्रोमीटर से लेकर 200000 माइक्रोमीटर तक हो सकता है तथा इनका व्यास भी 200000 माइक्रोमीटर तक हो सकता है
  • छोटे प्रोटोजोआ का आकार एक से 10 माइक्रोमीटर तक होता है
  • प्रोटोजोआ के अंदर न्यूक्लियस होता है तथा यह चारों तरफ से कोशिका द्रव्य से घिरा होता है
  • प्रोटोजोआ के कोशिकांग प्रोटोजोआ की प्रजाति के अनुसार कम या ज्यादा हो सकते हैं
  • प्रोटोजोआ के केंद्र के अंदर डीएनए होता है
  • प्रोटोजोआ के अंदर pseudopodia, flagella and cilia होते हैं जो उन्हें खाना पकड़ने, भोजन को खाने, तथा गमन करने में मदद करते हैं
  • कुछ प्रोटोजोआ की संरचना काफी स्थिर होती है

प्रोटोजोआ का वर्गीकरण – Classification of protozoa in Hindi

प्रोटोजोआ को भिन्न भिन्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है आमतौर पर इन्हें गमन करने के आधार पर तथा प्रजनन करने के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है इसके साथ साथ ही इन्हें पोषण के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है।

  1. मैस्टिगोफोरा (Mastigophora) या कशाभिक (Flagellates) 
  2. सार्कोडिना (Sarcodina) या राइज़ोपोडा (Rhizopoda) 
  3. स्पोरोज़ोआ (Sporozoa)
  4. सिलिएटा (Ciliata) 
  5. ऑपेलाइनेटा- (Suctoria) 

प्रोटोजोआ के कारण होने वाले रोग – Disease caused by protozoa in Hindi

प्रोटोजोआ संघ के कई जीवधारी संक्रमण रोग उत्पन्न करने वाले जीवधारी होते हैं ऐसे जीवधारियों से विभिन्न प्रकार के गंभीर रोग होते हैं

मलेरिया

मलेरिया बीमारी मादा एनाफिलीज मच्छर के शरीर पर काटने से होती है यह बीमारी तब होती है जब कोई मच्छर मनुष्य को काटता है और जब यह मच्छर मनुष्य को काटता है तो मनुष्य के शरीर में प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ प्रवेश कर जाता है और जिस कारण वश व्यक्ति को बुखार होता है और लाल रक्त कणिकाएं नष्ट हो जाती हैं

पेचिश

पेचिश यह एंड अमीबा हिस्टोलीका नामक प्रोटोजोआ की वजह से होता है पेचिश रोग तब होता है जब बड़ी आत के अगले भाग में इस प्रोटोजोआ का संक्रमण हो जाता है तथा इस प्रोटोजोआ की मात्रा बढ़ जाती है ऐसी स्थिति होने पर व्यक्ति को पेट में मरोड़, व खून के साथ बार बार दस्त होने लगते हैं

पायरिया

यह रोग amoeba gingivalis नामक प्रोटोजोआ की वजह से होता है इस रोग में व्यक्ति के मसूड़ों में पस तथा रक्त निकलने की समस्या होने लगती है और मुंह से बदबू आने लगती है ऐसी समस्या होने पर विटामिन सी की दवाइयां लेनी चाहिए तथा दांतों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए।

सोने की बीमारी

यह एक प्रोटोजोआ संबंधी रोग है यह रोग ट्रिपनोसोना नामक प्रोटोजोआ की वजह से होता है तथा इस रोग में व्यक्ति को बहुत नींद आती है तथा व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है और व्यक्ति को बुखार भी आने लगता है यह रोग आमतौर पर एक विशेष प्रकार की मक्खी द्वारा फैलता है जब यह मक्खी रोगी व्यक्ति को काटती है तब यह रोग फैलने लगता है

कालाजार

कालाजार एक प्रकार का रोग है तथा यह लीरामेनिया फोटोस ऑफ सन नामक प्रोटोजोआ की वजह से फैलता है यह प्रोटोजोआ ब्लू मक्खी द्वारा फैलता है इसमें मरीज को बहुत तेज बुखार आना, सर दर्द होना इत्यादि लक्षण होते हैं

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने प्रोटोजोआ के बारे में जानकारी दिया है जैसे कि प्रोटोजोआ क्या है, प्रोटोजोआ के प्रकार क्या-क्या हैं, प्रोटोजोआ की संरचना क्या है इत्यादि (Protozoa in Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारे आर्टिकल पसंद आता है या आप क्या कोई सवाल या जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद।

प्रोटोजोआ के जनक कौन है?

प्रोटोजोआ के जनक पेलियोटोलॉजिस्ट और जीवविज्ञानी जॉर्ज अगस्त गोल्डफस हैं तथा इन्होंने सन 1818 में पहली बार प्रोटोजोआ की खोज की थी।

प्रोटोजोआ क्या है in Hindi?

प्रोटोजोआ एक प्रकार के सूक्ष्मजीवों का संग होता है प्रोटोजोआ किसी एक विशिष्ट सूक्ष्मजीव को नहीं दर्शाता बल्कि प्रोटोजोआ एक संग है तथा यह उन सभी सूक्ष्मजीवों के संग को दर्शाता है जो एक कोशिकीय होते हैं तथा प्रोकरयोटिक प्रकार के होते हैं।

प्रोटोजोआ के अंदर कौन कौन से जीव आते हैं?

प्रोटोजोआ संघ के अंदर वह सभी जीव आते हैं जो एक कोशिकीय होते हैं अर्थात वह सभी जीव जिनमें एक कोशिका होती है वे प्रोटोजोआ कहलाते हैं।

प्रोटोजोआ के वर्गीकरण का आधार क्या है?

प्रोटोजोआ का वर्गीकरण प्रोटोजोआ में उपलब्ध गमन करने वाले अंगों तथा प्रजनन के तरीके के आधार पर किया जाता है।

प्रोटोजोआ के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं तथा इन्हें निम्नलिखित 4 समूहों में वर्गीकृत किया गया है

  • अमीबीय प्रोटोजोआ
  • कशाभी प्रोटोजोआ
  • पक्ष्माभी प्रोटोजोआ
  • स्पोरोजोआ प्रोटोजोआ

प्रोटोजोआ का वैज्ञानिक नाम क्या है?

प्रोटोजोआ को हिंदी में प्रोटोजोआ तथा अंग्रेजी में Protozoa कहते हैं Proto का अर्थ होता है प्रथम तथा zoan का अर्थ होता है जीव। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रोटोजोआ ही प्रथम जीव थे जिनका उद्गम धरती पर हुआ था।