Insulin in Hindi | इंसुलिन क्या है, फायदे, दुष्प्रभाव इत्यादि

आजकल के समय में डायबिटीज होना काफी आम बात हो गई है पहले डायबिटीज ज्यादातर बुजुर्ग लोगों को हुआ करती थी परंतु अब तो कम उम्र के लोगों को भी डायबिटीज की बीमारी होने लगी है। डायबिटीज की बीमारी का प्रमुख रूप से शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी के कारण होती है इंसुलिन एक हार्मोन है जो रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रण में रखता है तथा ग्लूकोस को फैट के रूप में स्टोर करने में मदद करता है।

इंसुलिन हार्मोन का निर्माण हमारे शरीर में ही होता है परंतु अगर किसी व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता तो उस व्यक्ति को डायबिटीज हो जाती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को इंसुलिन की दवाई दी जाती है। 

हम इस आर्टिकल में इंसुलिन हार्मोन के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि इंसुलिन हार्मोन क्या है, इंसुलिन हार्मोन कैसे कार्य करता है इत्यादि (Insulin in Hindi)

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इंसुलिन क्या है – What is insulin in Hindi

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हम जो भोजन खाते हैं वह हमारे शरीर में जाकर छोटे-छोटे भागों में बट जाता है हमारा शरीर भोजन में से पोषक तत्वों को सोख लेता है। हमारा भोजन शरीर में मुख्य रूप से ग्लूकोस के रूप में टूटता है और जब हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है तो हमें अलग-अलग प्रकार की बीमारियां होने लगती हैं जिनमें से मुख्य है डायबिटीज।

हमारे शरीर में एक ऐसा हार्मोन होता है जो शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रण में रखता है यह हमारे शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ने नहीं देता इस हार्मोन का नाम है इंसुलिन।

इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन है इसका निर्माण अग्नाशय में होता है इंसुलिन का मुख्य कार्य रक्त में शकरा की मात्रा को नियंत्रित करना होता है तथा इंसुलिन लिवर, फेट और मसल में ग्लूकोस को स्टोर करने का कार्य करता है। 

अगर हमारे शरीर में इंसुलिन ढंग से कार्य ना करें तो शरीर में ग्लूकोस, मसल और लीवर में स्टोर नहीं होगा और ना ही है फेट बना पाएगा और जब फैट ब्रेकडाउन नहीं होता तब कीटो एसिड नाम का एक एसिड उत्पन्न होता है और जब यह अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाता है। तो शरीर में डायबिटीज बढ़ जाती है।

जब आप खाना खाएंगे तब रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाएगी और जब शरीर में शकरा की मात्रा बढ़ जाती है तब शरीर में पैंक्रियास में से इंसुलिन हार्मोन निकलता है जो शरीर में उपस्थित शकरा को एनर्जी के रूप में स्टोर कर लेता है अन्य कार्यों के लिए।

जब किसी व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है तो व्यक्ति को डायबिटीज हो जाती है मुख्य रूप से इंसुलिन की कमी होने पर दो प्रकार की डायबिटीज होने का खतरा रहता है शरीर में इंसुलिन की कमी दो प्रकार से होती है एक जिसमें शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है ऐसी स्थिति होने पर टाइप वन डायबिटीज होती है और इसके लिए आपको बाहर से इंसुलिन लेना पड़ता है लेकिन जब किसी व्यक्ति के शरीर मैं इंसुलिन का निर्माण पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता तो उस व्यक्ति को टाइप टू डायबिटीज होती है जिसमें बाहर से इंसुलिन लेना जरूरी नहीं है अगर कोई व्यक्ति अच्छी खानपान का ध्यान रखें और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाए नियमित योगा और एक्सरसाइज करें तो टाइप टू डायबिटीज को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।

इंसुलिन के उपयोग – Uses of insulin hormone in Hindi

शरीर में शुगर को नियंत्रण में रखता है

इंसुलिन के कई कार्य होते हैं जिनमें से इंसुलिन का सबसे प्रमुख कार्य होता है रक्त में से शुगर की मात्रा को नियंत्रण में करना होता है। 

ग्लूकोस को फैट के रूप में स्टोर करता है

इंसुलिन हमारे शरीर में अत्यधिक ग्लूकोस को शरीर के अंदर फैट के रूप में स्टोर करता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसे ब्रेक डाउन करके उपयोग में लाया जा सके।

कोशिकाओं तक ऊर्जा पहुंचाता है

इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रण तो करता ही है इसके साथ-साथ ही इंसुलिन शरीर की हर कोशिका तक ऊर्जा पहुंचाने का काम भी करता है इसका मतलब यह एक निश्चित मात्रा में सभी कोशिकाओं तक ग्लूकोस पहुंचाता है।

शरीर को एक्टिव रखता है

हमारे शरीर को एक्टिव और तंदुरुस्त रखने के लिए इंसुलिन का उत्पादन तथा अब्जॉर्प्शन दोनों ही बहुत आवश्यक है यदि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत आती है तो व्यक्ति को कई प्रकार के लक्षण महसूस हो सकते हैं जैसे थकान महसूस होना, किसी कार्य को करने में मन ना लगना, असहजता होना, और सर दर्द या बदन दर्द करना।

मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया के लिए जरूरी है

इंसुलिन हमारे शरीर में मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया को सुचारू रूप से सही रखने में मदद करता है तथा इंसुलिन का उत्पादन अग्नाशय में होता है।

हमारे शरीर में इंसुलिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है अगर हमारे शरीर में किसी भी प्रकार से इंसुलिन का उत्पादन बंद हो जाए या फिर इंसुलिन की मात्रा कम हो जाए तो हमें अलग-अलग प्रकार के दुष्प्रभाव होने लगेंगे और हम गंभीर रूप से बीमार भी पड़ सकते हैं तथा हमें कई लाइलाज बीमारियां भी हो सकती हैं। 

इंसुलिन कैसे कार्य करता है – how does insulin works in Hindi

इंसुलिन हमारे शरीर में उत्पन्न एक हार्मोन होता है जब हम भोजन करते हैं तब उस भोजन से ग्लूकोस बनता है जो डायरेक्टली रक्त में मिल जाता है और रक्त का शुगर लेवल बढ़ जाता है। अगर किसी कारणवश हमारे रक्त का शुगर लेवल बढ़ जाए तो हमारा शरीर अपने आप ही इंसुलिन हार्मोन का स्राव करता है जो रक्त में उपलब्ध शुगर के लेवल को नियंत्रण में रखता है अगर हमारे शरीर में शुगर का लेवल अधिक होता है तो इंसुलिन उस शुगर को तुरंत वसा में परिवर्तित कर देता है जिससे ब्लड में शुगर का लेवल नियंत्रित हो जाता है। 

अगर किसी कारणवश किसी व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी हो जाए तो उस व्यक्ति के शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाएगी और जब शुगर की मात्रा बढ़ जाएगी तो उस व्यक्ति को डायबिटीज की बीमारी हो जाएगी डायबिटीज की बीमारी काफी खतरनाक बीमारी होती है और इसका इलाज लगभग जिंदगी भर चलता रहता है डायबिटीज को संपूर्ण रूप से ठीक नहीं किया जा सकता इसकी दवाइयां और इंजेक्शन चलते रहते हैं हां इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है परंतु डायबिटीज को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता।

इंसुलिन कैसे बनता है – How does insulin hormone secret in Hindi

इंसुलिन एक हार्मोन है तथा इसका निर्माण हमारे शरीर के पैंक्रियास अंग में होता है पैंक्रियास को अग्नाशय भी कहते हैं जब हम भोजन करते हैं तो उस दौरान हमारे शरीर में बहुत सारे पोषक तत्व रक्त में मिल जाते हैं और इन पोषक तत्वों में ग्लूकोस भी होता है जब ग्लूकोस हमारे रक्त में मिलता है तब हमारे रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। 

उस समय बड़ी हुई शुगर को नियंत्रण करने के लिए इंसुलिन हार्मोन का स्राव होता है यह हमारे शरीर में ग्लूकोस या शकरा की मात्रा को नियंत्रित करता है। अगर हमारे शरीर में किसी भी प्रकार से अत्यधिक मात्रा में शुगर आती है तो यह उस शुगर को फैट में तब्दील कर देता है जिससे हमारे शरीर में शुगर की मात्रा नहीं बढ़ती और वह फैट के रूप में हमारे शरीर में स्टोर हो जाती है और जब हम कई दिनों तक कुछ भोजन नहीं खाते हैं तब यही उर्जा हमें जीवित रखती है।

डायबिटीज के उपचार में इंसुलिन की क्या भूमिका होती है – What is the role of insulin in treatment of diabetes in Hindi

आमतौर पर ज्यादातर लोगों को दो प्रकार की डायबिटीज होती है टाइप वन डायबिटीज (यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन करना बिल्कुल बंद कर देता है) और टाइप टू डायबिटीज (यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन करता तो है परंतु वह पर्याप्त नहीं होता) टाइप वन डायबिटीज होने पर व्यक्ति को इंसुलिन हार्मोन की दवाइयां खानी ही पड़ती है ताकि व्यक्ति के रक्त में शुगर की मात्रा कम हो पाए। जब किसी व्यक्ति को टाइप टू डायबिटीज हो जाता है तब इंसुलिन की दवाइयां देना कंपलसरी नहीं होता ऐसी स्थिति में ज्यादातर लाइफस्टाइल को सुधारने के लिए कहा जाता है अच्छा खानपान और डाइट पर विशेष नियंत्रण रखने के लिए कहा जाता है। तथा सामान्य दवाइयों द्वारा ही टाइप टू डायबिटीज का इलाज संभव है।

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इंसुलिन के दुष्प्रभाव – Side effects of insulin in Hindi

अक्सर कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या इंसुलिन का उपयोग करने पर दुष्प्रभाव हो सकते हैं? हां, इंसुलिन का उपयोग करने पर कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं परंतु अगर आप सावधानियां रखें और डॉक्टर की सलाह को संपूर्ण रूप से माने थोड़ा बहुत परेश करें और अपनी जीवनशैली को सुधारने का प्रयास करें तो आपको दुष्प्रभाव होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

  • इंसुलिन का इंजेक्शन लेने पर इंजेक्शन लगने वाले हिस्से में रेडनेस होना, सूजन होना, खुजली होना, या थोड़ा थोड़ा दर्द महसूस होना इत्यादि लक्षण हो सकते हैं लेकिन कुछ दिनों बाद यह लक्षण भी खत्म हो जाते हैं।
  • इंसुलिन का इंजेक्शन लेने पर आपको हल्की-फुल्की एलर्जी हो सकती है।
  • इंसुलिन की अधिक मात्रा लेने पर और कम मात्रा लेने पर भी कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे इंसुलिन की कम मात्रा लेने पर लो ब्लड शुगर लेवल की स्थिति उत्पन्न हो सकती है तथा अधिक मात्रा लेने पर हाई ब्लड शुगर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • इंसुलिन थेरेपी लेते समय आपका वजन बढ़ सकता है इसीलिए अपनी जीवन शैली में स्वस्थ आदतों को अपनाना बेहद आवश्यक है।
  • इसके अलावा अगर आप काफी लंबे समय तक डायबिटीज से प्रभावित रहेंगे तो आपकी आंखों पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।

इंसुलिन लेते समय क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए –  Precautions for taking insulin in Hindi

जब भी आप इंसुलिन थेरेपी का ले तो एक अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें तथा किसी अच्छे डॉक्टर की निगरानी में ही इस थेरेपी को ले। किसी भी झोलाछाप या अनक्वालिफाइड डॉक्टर से इंसुलिन थेरेपी ना लें। 
इंजेक्शन लेते समय इंजेक्शन की सही तकनीक का इस्तेमाल करें तथा इंसुलिन की उचित खुराक का प्रबंधन करे।हमेशा डिस्पोजल इंजेक्शन और नीडल का इस्तेमाल करें कभी भी इंजेक्शन को या नीडल को दोबारा उपयोग ना करें।
इंजेक्शन को हमेशा त्वचा की अलग-अलग हिस्सों पर लगाएं, एक ही जगह बार-बार इंजेक्शन ना लगाएं।हमेशा ब्लड शुगर को मॉनिटर करें और एक कॉपी में नोट डाउन करें।इंसुलिन थेरेपी के दौरान अच्छी आदतों और जीवनशैली को अपनाने की कोशिश करें।शराब का सेवन जितना हो सके कम करें अगर शराब छोड़ पाए तो अधिक बेहतर होगा।फेफड़ों संबंधी रोग जैसे अस्थमा होने पर इंसुलिन इनहेलर का उपयोग ना करें।अगर आप सिगरेट इत्यादि का उपयोग करते हैं तो आपको इंसुलिन इनहेलर का उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने पर दवा घुऐ के साथ बाहर आ जाएगी और आपका दवा लेने का कोई फायदा नहीं होगा।

इंसुलिन का मूल्य – Price of insulin hormone in Hindi

इंसुलिन एक हार्मोन है यह मार्केट में कई रूपों में उपलब्ध है जैसे इंसुलिन के इंजेक्शन के रूप में तथा इन सभी चीजों के मूल्य अलग-अलग होते हैं किसी भी चीज का मूल्य फिक्स नहीं होता है। 

इंसुलिन को किस तरीके से स्टोर करके रखना चाहिए – How to store insulin in Hindi

एक्सपायरी डेट तक इंसुलिन की बोतल को रेफ्रिजरेटर में रखना चाहिए सामान्य ताप पर इंसुलिन खराब हो जाता है।

  • इंसुलिन इंजेक्शन का उपयोग करने से पहले इंसुलिन के इंजेक्शन का तापमान सामान्य होने दें।
  • अपनी इंसुलिन इंजेक्शन को अत्यधिक तापमान पर रखने से बचें सूरज की तेज रोशनी या सूरज की डायरेक्ट रोशनी से बचाएं।
  • इंसुलिन के रंग उसकी गंध और क्वालिटी का ध्यान रखें अगर आपको इंसुलिन के रंग या गंध में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव महसूस होता है तो उसका उपयोग ना करें।
  • एक्सपायरी डेट होने के बाद इंसुलिन का उपयोग बिल्कुल ना करें।

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इंसुलिन के प्रकार – Types of insulin in Hindi

मुख्य रूप से इंसुलिन के चार प्रकार होते हैं

रैपिड एक्टिंग इन्सुलिन :- 

इस प्रकार के इंसुलिन में मानव शरीर में इंजेक्शन लगाने के लगभग 15 से 20 मिनट बाद यह इंजेक्शन अपना कार्य करना शुरू करता है मुख्य रूप से इस प्रकार के इंजेक्शन का प्रभाव 3 से 4 घंटे तक रहता है इसका उपयोग अक्सर भोजन करने से पहले किया जाता है।

शॉर्ट एक्टिंग इन्सुलिन :- 

इस प्रकार के इंसुलिन को भोजन से पहले शरीर में इंजेक्ट करवाना आवश्यक होता है इंजेक्शन लगने के 30 से 60 मिनट में यह अपना असर दिखाना शुरू करता है और इसका असर लगभग 5 से 8 घंटों तक प्रभावी रहता है।

इंटरमीडिएट एक्टिंग इन्सुलिन :- 

इस प्रकार का इंसुलिन इंजेक्शन शरीर में प्रवेश करने के बाद 1 से 2 घंटे में काम करना शुरू कर देता है और इसका प्रभाव लगभग 14 से 16 घंटे तक रहता है।

लोंग एक्टिंग इन्सुलिन :- 

यह इंसुलिन लगने के लगभग 2 से अधिक घंटों के बाद यह अपना असर दिखाना शुरू करता है तथा इसका असर 24 घंटो तक रहता है या उससे अधिक भी रह सकता है।

इंसुलिन की खोज – Discovery of insulin in Hindi

इंसुलिन की खोज 19वीं सदी के आखिर में हुई थी इस के आविष्कार के दौरान इसका उपयोग कुत्तों पर टेस्ट करके किया गया था कुत्तों पर टेस्ट करने के बाद यह डायबिटीज के इलाज के लिए काफी कारगर साबित हुई। 1920 के दशक में कनाडा के दो डॉक्टर fadric बैटिंग और चार्ल्स बेस्ट ने इंसुलिन की खोज में योगदान दिया और इस पर गहन रिसर्च कि।

इंसुलिन का इस्तेमाल कैसे किया जाता है – How to use insulin in Hindi

इंसुलिन लेने का सबसे आसान और अच्छा तरीका है इंसुलिन की सीरीजों का इस्तेमाल करना आप अपनी त्वचा की फैट लेयर पर इंसुलिन के इंजेक्शन का उपयोग कर सकते हैं। आप अपनी जरूरत और सहूलियत के अनुसार इसका उपयोग कहीं पर भी कर सकते हैं।

वहीं दूसरी तरफ इंसुलिन के पंप भी उपलब्ध है जिनका उपयोग ऑफ इंसुलिन लेने के लिए कर सकते हैं।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने इंसुलिन हार्मोन के बारे में जानकारी दिया है जैसे कि इंसुलिन हार्मोन क्या है, इंसुलिन हार्मोन कैसे कार्य करता है इत्यादि (Insulin in Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारे आर्टिकल पसंद आता है या आप क्या कोई सवाल या जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं धन्यवाद।

क्या इंसुलिन का इंजेक्शन लेने पर दर्द होता है?

नहीं आमतौर पर इंसुलिन का इंजेक्शन लेने पर दर्द नहीं होता परंतु अगर किसी कारणवश इंजेक्शन लगाने वाला हिस्सा सूज जाए तो आपको दर्द हो सकता है परंतु यह भी एक से 2 दिन में अपने आप ही ठीक हो जाता है।

क्या इंसुलिन को बिना इंजेक्शन के लिया जा सकता है?

हां इंसुलिन को बिना इंजेक्शन के इंसुलिन इनहेलर की मदद से लिया जा सकता है यह इंसुलिन पाउडर को तुरंत आपके मुंह के जरिए फेफड़ों तक पहुंचा देता है जिससे वे डायरेक्टली ब्लड में मिल जाते हैं।