Chromosome in Hindi | क्रोमोसोम क्या है, संरचना, प्रकार इत्यादि

क्या आपने कभी सोचा है की एक लंबे व्यक्ति के बच्चे की हाइट लंबी क्यों होती है तथा छोटी हाइट वाले आदमी के बच्चे की हाइट छोटी क्यों होती है यह सब व्यक्ति के गुणसूत्र पर निर्भर करता है तथा बच्चा लड़का होगा या लड़की यह बात भी गुणसूत्र पर ही निर्भर करती है। 

इसलिए आज इस आर्टिकल में हम गुणसूत्र के बारे में विस्तार पूर्वक पढ़ेंगे और जानेंगे कि गुणसूत्र क्या है गुणसूत्र कितने प्रकार का होता है गुणसूत्र का आकार क्या है गुणसूत्र की संरचना क्या है और गुणसूत्र के बारे में हरसंभव जानकारी (Chromosome in Hindi)

गुणसूत्र या क्रोमोजोम

लगभग सभी कोशिकाओं में कोशिका केंद्रक होता है केंद्रक के अंदर धागे नमाज संरचना दिखाई देती हैं जिन्हें क्रोमेटिक तंतु कहते हैं। कोशिका विभाजन के समय जब यह तंतु छोटे, मोटे और स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं तब इन्हें गुणसूत्र कहते हैं।

मनुष्य के शरीर में 40 गुणसूत्र होते हैं तथा यह सभी गुणसूत्र जोड़े में होते हैं इसलिए मनुष्य के शरीर में 30 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं जिनमें से 22 जोड़ी गुणसूत्र सामान्य होते हैं जबकि एक जोड़ी गुणसूत्र लिंग निर्धारण के लिए होता है और यही गुणसूत्र व्यक्ति का लिंग निर्धारित करता है।

गुणसूत्र की खोज स्ट्रॉस बर्गर जाने 1875 में की थी और क्रोमोजोम शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है रंगीन डाई, सन 1888-89 में वार्ल्डयर ने इनके लिए क्रोमोसोम शब्द का प्रयोग किया।

सटन व बोवेरी ने बताया था कि गुणसूत्रों द्वारा आनुवांशिक लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में परिवहन होता है। इसलिए क्रोमोजोम को हेरिडिटी व्हीकल भी कहते हैं। क्योंकि यह जींस को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ले जाने का कार्य करते हैं।

गुणसूत्र की संख्या

मानव जीव जंतु और सभी वनस्पतियों में गुणसूत्र पाए जाते हैं गुणसूत्र कोशिका के केंद्रक में होते हैं किसी एक जाति के सभी जीवो में गुणसूत्रों की संख्या एक समान होती है जैसे मनुष्य में स्त्री हो, चाहे पुरुष हो, चाहे बालक हो चाहे बुजुर्ग हो सभी में 46 क्रोमोजोम होते हैं। यानी प्रत्येक जाति में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित होती है।

परंतु अलग-अलग जातियों के जीवो में यह संख्या अलग-अलग होती है। जैसे
मच्छर में 6 गुणसूत्र पाए जाते हैं, घर की मक्खी में 12 और मधुमक्खी में 32 गुणसूत्र पाए जाते हैं इसी प्रकार अलग-अलग जातियों के जीवो में अलग-अलग गुणसूत्रों की संख्या होती है गुणसूत्र सदैव जोड़े में होते हैं।

कुछ जीवो में गुणसूत्रों की संख्या

  • खरगोश – 44
  • भालू – 74
  • गेहूं – 42
  • गाजर – 18
  • मेंढक – 26
  • प्याज और कंगारू में – 16
  • कबूतर -80
  • घोड़ा – 64
  • चिंपैंजी और आलू – 48
  • मनुष्य – 46
  • मक्का – 20
  • गाय और बकरी – 60
  • मक्खी -12
  • हाथी – 56
  • बिल्ली शेर टाइगर – 38
  • आम और चूहा -40
  • टमाटर – 24
  • फूल गोभी मूली पपीता -18
  • मूंगफली – 40
  • प्याज – 16
  • चावल – 24
  • गन्ना -80

मनुष्य के शरीर में लगभग 1 हजार खरब कोशिकाएं पाई जाती हैं और प्रत्येक कोशिका में लगभग 46 गुणसूत्र पाए जाते हैं तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मानव शरीर में कितने गुणसूत्र होंगे?

(Somatic cells) देहिक कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या द्विगुणित(2n) होती है। जबकि युग्मक कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या अगुणित (n) होती है।

गुणसूत्र का माप

औसतन गुणसूत्रों की औसत लंबाई 3 से 5 माइक्रोन तथा व्यास 0.2 से लेकर 3 माइक्रोन तक होता है।

गुणसूत्रों की संरचना

प्रत्येक गुणसूत्र में कई भिन्न-भिन्न संरचनाएं दिखाई देती हैं जैसा कि आप चित्र में देख पा रहे हैं 1 गुणसूत्र में निम्नलिखित संरचनाएं दिखाई दे सकती हैं।

पलिकल (pellicle)

पलिकल एक झिल्ली है जो गुणसूत्र के चारों तरफ पाई जाती है यह नॉन जेनेटिक और achromatic होती है। इस झिल्ली का अनुवांशिकता से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं होता है। यह सिर्फ क्रोमोसोम को बाहरी पर्यावरण से सुरक्षित रखने के लिए होती है।

मैट्रिक्स (matrix)

क्रोमोसोम के अंदर एक जल लाइक सब्सटेंस होता है जिसे मैट्रिक्स कहते हैं। यह नॉन जेनेटिक और achromatic होती है। इसमें जल प्रोटीन खनिज और एंजाइम पाए जाते हैं।

क्रोमोनिमेटा (Chromonemata)

क्रोमोनिमेटा क्रोमोसोम के अंदर धागे नुमा कुंडलीत भाग है जो हिस्टोन प्रोटीन और डीएनए से बना है। क्रोमोनिमेटा अनुवांशिक से संबंधित होता है।
क्रोमोनिमेटा दो प्रकार से कुंडलीत होता है

  • Paranemic coiling : इसकी कुंडली ढीली होती है तथा इसे पृथक किया जा सकता है।
  • Plectonemic coiling : इसकी कुंडली टाइट होती है तथा इसे पृथक नहीं किया जा सकता।

क्रोमोमियर (Chromomere)

क्रोमोमियर कणिकानुमी संरचनाएं होती हैं जो क्रोमोनिमेटा के ऊपर होती है यह दिखने में मोतियों के समान होते हैं जिस प्रकार किसी माला में मोती लगे होते हैं उसी प्रकार क्रोमोनिमेटा के ऊपर यह लगे होते हैं। यह संघनित गुणसूत्रों में उपस्थित होते हैं तथा लेप्टोटीन में क्रोमोमियर स्पष्ट दिखाई देते हैं। क्रोमोमियर मे जीन होते हैं।

गुणसूत्रबिंदु (Centromere) या काइनेटोकोर (Kinetochore)

इसे प्राथमिक संकीर्णन भी कहा जाता है क्योंकि यहां पर गुणसूत्र थोड़ा सा संकुचित हो जाता है। इस स्थान पर दो प्रोटीन डिस्क पाई जाती हैं तर्कु तंतु से जुड़ प्रोटीन डिस्क से जुड़े होते हैं।

द्वितीयक संकीर्णन (Secondary Constriction)

कुछ क्रोमोजोम में प्राथमिक संकीर्णन के साथ-साथ द्वितीयक संकीर्णन भी पाया जाता है इस द्वितीयक संकीर्ण के चारों ओर के हिस्से को NOR कहते हैं।

अनुषंघी सैटेलाइट क्रोमोसोम (Satellite Chromosome)

यह बाहर की तरफ निकला हुआ भाग होता है तथा यह द्वितीयक संकीर्णन के परे उपस्थित होता है। सैटेलाइट युक्त गुणसूत्र को SAT(sine acid thymo nucleo nicco) गुणसूत्र कहते हैं।

टिलोमीयर (Telomere)

टिलोमीयर गुणसूत्र का सिरा होता है तथा इसके कार्य होते हैं गुणसूत्र को आपस में यूनाइट होने से बचाना। और टिलोमीयर उम्र से संबंधित भी होता है।

गुणसूत्र के प्रकार

गुणसूत्र मुख्य रूप से पांच प्रकार के होते हैं।

अलिंग गुणसूत्र (Autosomal Chromosome)

इस प्रकार के गुणसूत्रों में लिंग निर्धारण गुणसूत्र को छोड़कर अन्य सभी गुणसूत्र (somatic symptoms) होते हैं इस प्रकार के गुणसूत्र में मुख्य रूप से 44 गुणसूत्र होते हैं।

लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome)

यह गुणसूत्र लिंग का निर्धारण करते हैं तथा यह संख्या में 2 होते हैं लड़कियों में यह गुणसूत्र एक्स एक्स (XX) होते हैं तथा लड़कों में है गुणसूत्र एक्स वाई (XY) होते हैं।

सहायक गुणसूत्र (Acessory Chromosome)

इस गुणसूत्र में छोटे-छोटे गुणसूत्र होते हैं जिन में गुणसूत्र बिंदु नहीं होते हैं यह अर्धसूत्री विभाजन में भाग नहीं लेते हैं अनुवांशिक रूप से निष्क्रिय होते हैं तथा उनकी खोज विल्सन द्वारा की गई थी।

विशालकाय गुणसूत्र (Giant  chromoses)

पॉलीटीन गुणसूत्र (Polytene Chromosome)

इसकी खोज ईजी बालबियानी ने की थी इसमें कई क्रोमोनेमा होते हैं इसलिए इसे पॉलिटिन गुणसूत्र भी कहते हैं यह क्रोमोजोम एंडोमेट्रियोसिस बनाते हैं

लैंपब्रश गुणसूत्र (Lampbrush Chromosomes)

इस प्रकार के गुणसूत्र ब्रश नुमा संरचना के दिखाई देते हैं इनकी खोज रुकर्ट ने की थी इस प्रकार के क्रोमोजोम शार्क उभयचर, सांप जैसे जंतुओं में होते हैं।

गुणसूत्र के कार्य

गुणसूत्र का कार्य सिर्फ अनुवांशिकी को पीढ़ी दर पीढ़ी परिवहन करना ही नहीं होता बल्कि और सूत्र के कई अन्य कार्य भी होते हैं जो निम्नलिखित हैं

  • यह अनुवांशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचालित करते हैं।
  • यह सजीवों में उत्परिवर्तन विकास वृद्धि और विभिन्नताएं उत्पन्न करते हैं।
  • यह विभिन्न विभिन्न प्रकार के जीवो में उनकी जैविक क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं।
  • क्रोमोजोम सभी जीवो में जीवो के लिंग का निर्धारण भी करते हैं जीवो में लिंग का निर्धारण करने वाले क्रोमोजोम लिंग निर्धारण क्रोमोजोम होते हैं।
  • कभी-कभी जब गुणसूत्रों में परिवर्तन होता है या गुणसूत्रों की संख्या में घटाव या बढ़ोतरी हो जाती है तब विभिन्न विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं।
  • विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं के विभेदन के लिए भी क्रोमोजोम उत्तरदाई होते हैं।
  • द्विगुणन द्वारा गुणसूत्र जीवन की निरंतरता (continuity of life) को बनाए रखते हैं।
  • कोशिका वृद्धि तथा कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक प्रोटीन का संश्लेषण तथा उसका नियंत्रण करना भी क्रोमोसोम का कार्य है।

गुणसूत्र संबंधी रोग

कभी-कभी जब गुणसूत्र में कुछ गड़बड़ी हो जाती है मतलब गुणसूत्र घट या बढ़ जाते हैं या किसी अन्य कारणवश गुणसूत्र में कोई समस्या आ जाती है। जब गुणसूत्र में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी हो जाती है तो इसका सीधा असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है और व्यक्ति को बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं।परिभाषा – गुणसूत्र की संख्या या संरचना में होने वाले परिवर्तन से जो रोग उत्पन्न होते हैं उन्हें गुणसूत्रीय अनियमितताएं कहते हैं।

मुख्य रूप से गुण सूत्रीय रोग दो प्रकार के होते हैं

दैहिक गुणसूत्रों में समस्या होने पर निम्नलिखित रोग हो जाते हैं

Downs syndrome

21th chromosome (trisomy)(44+xx/xy)Downs syndrome की खोज langdom down 1866 की।

  • यह रोग होने पर निम्नलिखित लक्षण होते हैं
  • बौनापन
  • सिर छोटा गोल होना, माथा चौड़ा होना
  • मुंह खुला रहना लार बहना
  • हथेली भी चौड़ी होती है
  • शारीरिक, मानसिक मानसिक विकास में अवरोध

Edwards syndrome

18th chromosome (trisomy)(45+xx/xy)यह महिला तथा पुरुष दोनों में हो सकता है इसमें बच्चे मंद बुद्धि के होते हैं और लगभग 1 वर्ष की आयु में ही मृत्यु हो जाती है।

Patau syndrome

13th chromosome (trisomy)(45+xx/xy)Patau syndrome की खोज Patau नामक वैज्ञानिक ने की थी इसलिए सिंड्रोम का नाम Patau syndrome रखा गया है इस सिंड्रोम में 13वें नंबर के और सूत्र पर एक की जगह 2 गुणसूत्र पाए जाते हैं जिस वजह से यह सिंड्रोम होता है इस सिंड्रोम में बच्चे मंदबुद्धि होते हैं ज्यादातर बच्चों को हृदय रोग होते हैं, बच्चों कि 4 माह में मृत्यु हो जाती है

Cry-do-cat syndrome

5th chromosome translocation 15thइस सिंड्रोम में पांचवें नंबर के क्रोमोसोम का कुछ भाग डिलीट होकर 15वें नंबर के क्रोमोजोम पर जुड़ जाता है इसलिए इस प्रकार का सिंड्रोम उत्पन्न होता है इसमें बच्चे मंदबुद्धि होते हैं तथा बिल्ली जैसी आवाज निकालता रहता है इसलिए इसे Cry-do-cat syndrome के नाम से जाना जाता है।

Philadelphia syndrome

22th chromosome translocation 9thइस प्रकार के सिंड्रोम में 22वें नंबर के क्रोमोसोम का कुछ भाग 9 नंबर के क्रोमोजोम पर जुड़ जाता है और 9 नंबर के क्रोमोजोम का कुछ भाग 22 वें नंबर के क्रोमोजोम पर जुड़ जाता है इस वजह से यह सिंड्रोम उत्पन्न होता है। इस वजह से myelogenous leukaemia (blood cancer) रोग उत्पन्न होता है।
लिंग गुणसूत्रों में समस्या होने पर निम्नलिखित रोग हो जाते हैं

Klinefelter syndrome 

(trisomy)(44+xxy)

  • यह रोग पुरुषों में होता है
  • टेस्टिस विकसित होते हैं
  • पुरुष बांझ होता है
  • द्वितीयक लैंगिक लक्षण और विकसित होते हैं
  • मादा लक्षणों का विकास होने लगता है
  • बुद्धि सामान्य रहती है
  • बाल कम होते हैं हाथ लंबे होते हैं

Turner’s syndrome

(monosomy)(44+xo)लक्षण

  • ज्यादातर महिलाओं में होता है
  • महिलाएं बांझ होते हैं
  • द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का अभाव होता है
  • मासिक चक्र नहीं होता
  • स्तन पूर्ण विकसित नहीं होते
  • बुद्धि सामान्य होती है

Criminal syndrome 

(trisomy)(44+xyy)

  • ज्यादातर पुरुषों को प्रभावित होते हैं
  • अत्याधिक लंबे होते हैं
  • मानसिक विकास कम होता है
  • आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं

Super female 

(trisomy)(44+xxx)

  • ज्यादातर महिलाओं में होता है
  • लैंगिक लक्षण असामान्य होते हैं
  • मानसिक रूप से महिलाएं विकलांग होती हैं

निष्कर्ष

आज इस आर्टिकल में हमने गुणसूत्र के बारे में बताया है कि गुणसूत्र क्या है, गुणसूत्र के कार्य क्या है, गुणसूत्र कितने प्रकार का होता है और गुणसूत्र संबंधी कई अन्य विषय भी हमने इस आर्टिकल में विस्तार पूर्वक उपलब्ध कराएं हैं (Chromosome in Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा अगर आपके कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपको आपके सवालों का जवाब देने का प्रयास जरूर करेंगे धन्यवाद।

मनुष्य के शरीर में कितने गुणसूत्र होते हैं?

मनुष्य के शरीर में लगभग एक लाख खराब कोशिकाएं होती हैं और मनुष्य की कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र होते हैं यह जोड़े में होते हैं अर्थात 23 जोड़े होते हैं। इनमें 44 गुणसूत्र सामान्य होते हैं जबकि 2 गुणसूत्र लिंग निर्धारण गुणसूत्र होते हैं। 

क्रोमोसोम के कार्य क्या हैं?

क्रोमोसोम या गुणसूत्र के कई कार्य होते हैं यह सभी सजीव और वनस्पतियों में पाए जाते हैं इनका मुख्य कार्य अनुवांशिक गुणों को निर्धारित करना तथा पीढ़ी दर पीढ़ी संचारित करना होता है।

क्रोमोजोम कहां पाया जाता है?

सभी जीवो तथा वनस्पतियों की कोशिकाओं के केंद्रक में एक धागे नुमा संरचना होती है जिन्हें क्रोमेटिंग तंतु कहते हैं कोशिका विभाजन के समय यह तंतु छोटे, मोटे और स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं तब इन्हें गुणसूत्र या क्रोमोजोम कहते हैं। यह सभी जीवो और वनस्पतियों में अलग-अलग होती है परंतु एक जाति के जीवो में क्रोमोसोम की संख्या सामान रहती है जैसे मनुष्य में 46 क्रोमोसोम होते हैं।

गुणसूत्र या क्रोमोसोम की खोज किसने की थी?

गुणसूत्र की खोज स्ट्रॉस बर्गर जाने 1875 में की थी और सन 1888-89 में वार्ल्डयर ने इनके लिए क्रोमोसोम शब्द का प्रयोग किया।