Bacteria in Hindi | बैक्टीरिया क्या है, प्रकार, लाभ इत्यादि

क्या आप जानते हैं कि बैक्टीरिया क्या है? अक्सर आपने सुना होगा कि हम बैक्टीरिया की वजह से बीमार पड़ते हैं परंतु शायद आप इस बात को नहीं जानते कि ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे सहायक होते हैं उदाहरण के रूप में दूध को दही में तब्दील लैक्टोबैसिलस नाम का बैक्टीरिया करता है तथा जब किसी को कोई गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण हो जाता है तब उसे एंटी बायोटिक दवाइयां दी जाती हैं इसी प्रकार भिन्न-भिन्न रूपों में बैक्टीरिया हमारी सहायता भी करते हैं।

इसलिए आज इस आर्टिकल में हम बैक्टीरिया के बारे में पढ़ेंगे की बैक्टीरिया क्या है, बैक्टीरिया के प्रकार क्या है, बैक्टीरिया की संरचना क्या है, बैक्टीरिया के लाभ क्या है बैक्टीरिया के दुष्प्रभाव क्या है इत्यादि इत्यादि सभी विषयों को विस्तार पूर्वक अध्ययन करेंगे (Bacteria in Hindi)

बैक्टीरिया क्या है – What is bacteria in Hindi

मुख्य रूप से सभी जीवाणु जगत मोनेरा के अंतर्गत आते हैं और सर्वप्रथम होलेंड के निवासी एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक ने जीवाणुओं की खोज उनके ही द्वारा बनाए गए सूक्ष्मदर्शी द्वारा की थी इन्होंने जीवाणुओं को, सूक्ष्मदर्शी द्वारा जल, लार और दांतों की खुरचन में देखा था। 
पहले बैक्टीरिया को पौधों समझा जाता था परंतु बाद में रिसर्च में पता चला कि यह पौधे नहीं है बैक्टीरिया हरित लवक रहित होते हैं तथा यह प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते। बैक्टीरिया प्रोकैरियोटिक जीव होते हैं। इनमें जन्म मुख्य रूप से विखंडन प्रक्रिया द्वारा होता है।
जीवाणु अत्यधिक सूक्ष्मजीव होते हैं तथा इन्हें सामान्य नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता यह जीव एक कोशिकीय जीव होते हैं और यह सर्वत्र पाए जाते हैं। यह किसी भी आकृति और आकार के हो सकते हैं और आज से हजारों साल पहले जीवन की शुरुआत बैक्टीरिया द्वारा ही हुई थी। 

बैक्टीरिया के प्रकार – Types of bacteria in Hindi

बैक्टीरिया का वर्गीकरण कई प्रकार से किया जा सकता है परंतु मुख्य रूप से बैक्टीरिया को उसकी आकृति के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।

  1. दण्डाणु (बैसिलाइ) – दंड जैसे,
  2. गोलाणु (कोक्काई) – बिन्दु जैसे,
  3. सर्पिलाणु (स्पिरिलाइ) – लहरदार आदि।

बैक्टीरिया का आकार – Size of bacteria in hindi

बैक्टीरिया का आकार बहुत छोटा होता है तथा इसे सामान्य आंखो द्वारा नहीं देखा जा सकता है इसे देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है बैक्टीरिया का आकार 2 से 10 माइक्रोमीटर तक होता है।

बैक्टीरिया की संरचना – Structure of bacteria in Hindi

बैक्टीरिया की संरचना बहुत सरल तथा primitive होती हैं इनकी संरचना सामान्य कोशिकाओं से कुछ भिन्न तथा अविकसित होती है जो अन्य जीवो से इन्हें अलग बनाते हैं।जीवाणुओं की कोशिकीय संरचना को भिन्न भिन्न प्रकार के यंत्रों द्वारा देखा जा सकता है तथा भिन्न भिन्न प्रकार की अभिरंजन विधियों द्वारा जीवाणु की कोशिका का अध्ययन करने पर जीवाणु कोशिका संरचना निम्नलिखित दिखाई देती है।

कोशिका भित्ति – Cell wall 

  • प्रत्येक बैक्टीरिया की कोशिका एक झिल्ली से गिरी होती है इसे जीवाणु कोशिका कहते हैं।
  • यह भित्ति पॉलिसैचेराइड, लिपिड और प्रोटीन की बनी होती है तथा कुछ जीवाणुओं की कोशिका भित्ति सेल्यूलोज की भी बनी होती है।

सम्पुट – Capsule

  • कोशिका भित्ति के चारों ओर एक जेली जैसी संरचना होती है यह स्लाइम की बनी होती है।
  • कोशिका वृद्धि के समय स्लाइम की बनी यह परत सख्त होकर एक कैप्सूल या सम्पुट बनाती है।
  • यह कैप्सूल या सम्पुट जीवाणुओं की प्रतिकूल वातावरण से रक्षा करता है।
  • यह समुचित खाद्य पदार्थों के संग्रहालय के रूप में भी कार्य करता है।
  • कैप्सूल बहुत कठोर होता है जिस कारण वश शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (श्वेत रक्त कोशिकाएं) इसका विनाश नहीं कर पाती है और इस कारण वश ही मनुष्य बीमार पड़ता है ।

जीव द्रव्य कला – Plasma membrane

  • जीवद्रव्य बाहर की ओर प्रोटोप्लास्मिक मेंब्रेन (जीव द्रव्य कला) से घिरा रहता है।
  • जीव द्रव्य कला फास्फोलिपिड और प्रोटीन की बनी होती है

जीवद्रव्य – Cytoplasm

  • जीव द्रव्य कणिकामय या पारदर्शक तरल पदार्थ के रूप में होता है
  • जीव द्रव्य में ग्लाइकोजन और वसा इत्यादि कण पाए जाते हैं।
  • कुछ जीवाणुओं में गंधक के कारण भी पाए जाते हैं।

जीव द्रव्य में निम्नलिखित चीजें पाई जाती हैं

लेकिन अन्य कोशिकांग नहीं पाए जाते हैं अन्य कोशिकांग जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, अंतद्रव्य जालिका, गॉल्जी काय इत्यादि इत्यादि कोशिकांग नहीं पाए जाते हैं।

राइबोसोम – Ribosomes 

  • जीवाणुओं में 70s प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं

केंद्रकाभ – Nucleoid

  • कोशिका द्रव्य के केंद्र में एक स्वच्छ भाग होता है जिसे केंद्रकाभा – Nucleoid कहते हैं
  • केंद्रकाभ के अंदर वलित 2 सूत्रीय संग रचना को डीएनए (DNA- डी ऑक्सी राइबो न्यूक्लिक एसिड) तंतु कहते हैं}
  • डीएनए तंतु मुड़े हुए होते हैं तथा जब जीवाणु द्विगुणन करता है डीएनए कुंडलित गुणसूत्र खुल जाते हैं 2 डीएनए तंतु का निर्माण होता है।
  • जीवाणुओं में उपस्थित केंद्रकाभ को ही आरंभिक केंद्र कहते हैं।

मध्यकाय – Mesosome

  • जीवद्रव्य में उपस्थित कलाओं को मध्यकाय – Mesosome कहते हैं
  • यह जीव द्रव्य में जीवद्रव्य काय या प्लाजमा लेमा के अंतर्वालन से बनी टेढ़ी-मेढ़ी संग रचनाएं होती हैं।
  • यह जीवाणुओं में कोशिका भित्ति के निर्माण में भाग लेते हैं।

बैक्टीरिया के प्राप्ति स्थान – Place where bacteria found in Hindi

बैक्टीरिया के प्राप्ति स्थान से तात्पर्य है कि बैक्टीरिया कहां कहां पर पाए जा सकते हैं? बैक्टीरिया पृथ्वी की मिट्टी में, अम्लीय गर्म जल धाराओं में, भूपर्पटी में तथा नाभिकीय पदार्थों में जल में यह सभी कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधे एवं जंतुओं में भी पाए जाते हैं।
बैक्टीरिया पृथ्वी में सभी जगह पाए जाते हैं पूरी पृथ्वी में कोई भी ऐसा स्थान नहीं है जहां पर बैक्टीरिया ना पाए जाते। साधारण तौर पर 

  • 1 ग्राम मिट्टी में चार करोड़ जीवाणु पाए जाते हैं।
  • 1 मिलीलीटर जल में 1000000 जीवाणु पाए जाते हैं।

बैक्टीरिया के खोजकर्ता – Founders of bacteria in Hindi

  • एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक:- सन 1683 के हॉलैंड के एक मशहूर वैज्ञानिक एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक ने की थी यह बड़ा ही रोचक किस्सा है जब एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक ने अपने ही बनाए सूक्ष्मदर्शी की जांच करने के लिए भिन्न-भिन्न चीजों को सूक्ष्मदर्शी में देखा तब उन भिन्न-भिन्न चीजों में उन्होंने दांत की खुरचन तथा अन्य पदार्थों को भी देखा उन्होंने पहली बार सूक्ष्मजीवों को दांत की खुरचन में देखा तथा इन्हें सूक्ष्मजीव नाम दिया। 
  • एरेनबर्ग:- 1829 में एरेनबर्ग नामक वैज्ञानिक ने सूक्ष्मजीव को बैक्टीरिया नाम दिया।
  • लुई पाश्चर:- लुई पाश्चर ने खोज की और यह बताया कि फर्मेंटेशन के प्रोसेस में जीवाणुओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
  • रोबोट कोच:- रोबोट कोच ने 1881 में सर्वप्रथम जीवाणुओं का कृत्रिम में संवर्धन किया था।

बैक्टीरिया के जनक और अन्य – Father of bacteria and other people in Hindi

  • जीवाणु विज्ञान के जनक(father of bacteriology) – एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक
  • सूक्ष्मजीव विज्ञान के जनक(father of microbiology) – लुई पाश्चर
  • आधुनिक जीव विज्ञान के जनक(father of modern bacteriology) – रोबोट कोच

बैक्टीरिया के लाभ – Benefits of bacteria in Hindi

जीवाणु हमारी क्रियाओं के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं कई प्रकार के जीवाणु या बैक्टीरिया मनुष्य के लिए अत्यंत उपयोगी भी होते हैं तथा वहीं दूसरी तरफ कई प्रकार के जीवाणु हमारे स्वास्थ्य को हानि पहुंचा सकते हैं

भूमि की उर्वरता बढ़ाने में

दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम नामक एक जीवाणु पाया जाता है यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन को ग्रहण करके मृदा की उर्वरता में वृद्धि करता है यह मृत पदार्थों को सड़ा गला कर सरल योगिक में बदल देते हैं जैसे

  • मृत पदार्थ – अमोनिया
  • नाइट्रोजन – नाइट्रेट

दूध का दही में परिवर्तन

दूध में लैक्टोबैसिलस नामक एक जीवाणु पाया जाता है जो दूध में पाए जाने वाले लेक्टो शकरा को किंडर करके लैक्टिक अम्ल में तब्दील कर देता है दूध से दही जमाने में कैसीन प्रोटीन का उपयोग होता है

चाय कॉफी का उपचार करने में

कुछ जीवाणु जैसे बेसिलस मेगाधिरियम नामक एक जीवाणु होता है जो चाय व तमाकू की पत्तियों पर किंड वन करके उसमें विशेष प्रकार की सुगंध वासवाद उत्पन्न करता है कोको में चॉकलेट का स्वाद बैक्टीरिया के किन वन क्रिया के कारण होता है

सिरके का निर्माण

सिरके का निर्माण साईं कोडरमा नामक जीवाणु द्वारा होता है

प्रतिजैविक का उत्पादन करना

कुछ जीवाणु अत्यंत महत्वपूर्ण औषधियों व विटामिन का निर्माण करने में उपयोग में लाए जाते हैं तथा एक किंणवन के द्वारा प्रतिजैविक का निर्माण करते हैं तथा कई प्रकार की बीमारियों में इन प्रतिजैविक का इस्तेमाल किया जाता है कुछ बैक्टीरियल तथा वायरल इंफेक्शन में भी कई प्रकार के प्रतिजैविक दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है

मनुष्य के पाचन तंत्र में

मनुष्य के पाचन तंत्र को भी कई प्रकार के बैक्टीरिया प्रभावित करते हैं जिससे भोजन अच्छे तरीके से पच पाता है और पूर्ण रूप से इसका पाचन तथा अवशोषण हो पाता है

मां के दूध के लिए फायदेमंद

यदि गर्भवती महिलाओं को प्रोबायोटिक्स से भरपूर भोजन दिया जाए तो उनका बच्चा बहुत स्वस्थ होता है तथा मां के दूध की गुणवत्ता काफी हद तक बढ़ जाती है।

बैक्टीरिया के दुष्प्रभाव – Side effects of bacteria in Hindi

बैक्टीरिया के कई दुष्प्रभाव होते हैं यह कई प्रकार की बीमारियों को जन्म दे सकते हैं अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया अलग-अलग प्रकार की बीमारियों को जन्म देते हैं।बैक्टीरिया द्वारा कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं जब हमारे शरीर में बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ जाती है तो हम बुरी तरीके से बीमार पड़ जाते हैं तथा हमें कई ऐसी ऐसी बीमारियां हो सकती है जो हमें गंभीर रूप से बीमार कर सकती हैइसके साथ-साथ ही बैक्टीरिया की वजह से चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं।

बैक्टीरिया का वर्गीकरण – Classification of bacteria in Hindi

बैक्टीरिया का वर्गीकरण कई आधार पर किया जाता है मुख्य रूप से बैक्टीरिया का वर्गीकरण उनकी विशेषताओं के आधार पर किया जाता है। बैक्टीरिया का वर्गीकरण मुख्य रूप से निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है

  • आकार
  • कोशिका भित्ति की संरचना
  • स्वसन की विधि
  • पोषण का तरीका

आकार के आधार पर जीवाणुओं का वर्गीकरण

  • बेसिलस (छड़ी के आकार का) : यह छड़ी के आकार के जीवाणु होते हैं। उदाहरण – एस्चेरिचिया कोलाई (ई. कोलाई)
  • स्पिरिला या स्पिरोचेट (सर्पिल) : यह स्पाइरल के आकार के जीवाणु होते हैं। उदाहरण – स्पिरिलम वोल्टन्स
  • कोकस (क्षेत्र) : इनका क्षेत्र बड़ा होता है। उदाहरण – स्ट्रैपटोकोकस निमोनिया
  • विब्रियो (अल्पविराम के आकार का) : यह आकार में अल्पविराम जैसे होते हैं उदाहरण – विब्रियो कोलरा

कोशिका भित्ति की संरचना के आधार पर जीवाणुओं का वर्गीकरण

  • पेप्टिडोग्लाइकन कोशिका भित्ति : उदाहरण – ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया
  • लिपोपॉलेसेकेराइड कोशिका भित्ति : उदाहरण – ग्राम नकारात्मक बैक्टीरिया

पोषण की विधि के आधार पर जीवाणुओं का वर्गीकरण

  • स्वपोषी जीवाणु : जीव जो अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं उदाहरण – साइनोबैक्टीरीया
  • विषमपोषी जीवाणु : जीव जो अपना भोजन स्वयं संश्लेषित नहीं करते और दूसरों पर निर्भर रहते हैं उदाहरण – सभी रोग पैदा करने वाले जीवाणु

श्वसन की विधि के आधार पर जीवाणुओं का वर्गीकरण

  • अवायवीय जीवाणु : इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है उदाहरण – एक्टिनोमाइसेस
  • एरोबिक बैक्टीरिया : इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है उदाहरण – माइकोबैक्टीरियम

बैक्टीरिया के कारण होने वाले रोग – Disease caused by bacteria in Hindi

बैक्टीरिया के कारण कई प्रकार के रोग हो सकते हैं उनकी सूची निम्नलिखित है

  • हैजा
  • काली खांसी
  • निमोनिया
  • टेटनेस
  • प्लेग
  • गिनोरिया
  • कुष्ठ रोग
  • डायरिया
  • जठर रस

निष्कर्ष

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा अगर आपके कोई सवाल और सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हमने इस आर्टिकल में बताया है कि बैक्टीरिया क्या है बैक्टीरिया के क्या-क्या लाभ हैं बैक्टीरिया क्या क्या नुकसान है बैक्टीरिया कितने प्रकार का होता है तथा बैक्टीरिया संबंधी कई प्रकार के प्रश्न के जवाब हमने इस आर्टिकल में दिए हैं (Bacteria in Hindi)

क्या बैक्टीरिया आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?बैक्टीरिया एक प्रकार का सूक्ष्म जीवाणु होता है तथा इसके भिन्न-भिन्न कार्य होते हैं कुछ बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छे होते हैं तथा कुछ बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य को खराब कर देते हैं जैसे कई ऐसे बैक्टीरिया हैं जो अच्छे होते हैं जैसे लैक्टोबैसिलस जो दूध को दही बनाने में मदद करता है तथा कई अन्य औद्योगिक वस्तुओं का निर्माण करने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसकी अपेक्षा दूसरी तरफ कई ऐसे बैक्टीरिया हैं जिनकी वजह से विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं जैसे हैजा, डायरिया इत्यादि इत्यादि।

बैक्टीरिया का दूसरा नाम क्या है?बैक्टीरिया एक अंग्रेजी शब्द है बैक्टीरिया को हिंदी में जीवाणु कहते हैं।

अच्छे बैक्टीरिया तथा बुरा बैक्टीरिया?आमतौर पर बैक्टीरिया को हमारे लिए दो रूप से कार्य करता है या तो वह बैक्टीरिया हमारे लिए अच्छा होगा या फिर खराब। बैक्टीरिया हमारे लिए कई प्रकार से फायदेमंद होता है जैसे बैक्टीरिया कई कामों में इस्तेमाल होता है जैसे दूध से दही बनाना इत्यादि।

जीवाणु तथा कवक को अपघटक क्यों कहते हैं?
जीवाणु तथा कवक को अपघटक इसलिए कहते हैं क्योंकि यह चीजों को खाकर उन्हें नष्ट कर देते हैं जैसे आपने कई बार देखा होगा कि कभी कोई जीव मर जाता है तब उसका शरीर अपने आप ही सड़ने और गले ने लगता है जिसके साथ साथ वह अपने आप ही घटकर मिट्टी में मिल जाता है यह बैक्टीरिया करते हैं।
जीवाणु की खोज किसने की थी?जीवाणु की खोज 1683 में एंटोनी वॉन ल्यूवेन्हॉक नाम के व्यक्ति ने की थी। जीव विज्ञान का पिता किसे कहते हैं?जीव विज्ञान का पिता ल्यूवेन्हॉक को कहते हैं।
जीवाणु के बारे में अध्ययन करने को क्या कहते हैं?जीवाणुओं के बारे में अध्ययन करने को जीवाणु विज्ञान कहते हैं।
जीवाणु की कोशिका भित्ति किस चीज से बनी होती है?जीवाणु की कोशिका भित्ति सेल्यूलोज, पेक्टोज तथा अन्य पदार्थों की बनी होती है यह काफी कठोर होती है।
जीवाणुओं में अलैंगिक जनन किसके द्वारा होता है?जीवाणुओं में अलैंगिक जनन द्वीविभाजन द्वारा, कोनिडिया द्वारा एवं अन्तः बीजाणु द्वारा होता है