कोशिका के परिभाषा, प्रकार, कार्य, सिद्धांत और तथ्य | koshika | cell in Hindi

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा यह शरीर किस चीज से बना है अगर हम अपने शरीर के बारे में सोचें तो हमारा शरीर छोटी-छोटी कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। छोटी-छोटी कोशिकाएं मिलकर ऊतक का निर्माण करती हैं बहुत सारे ऊतक मिलकर अंगों का निर्माण करते हैं। बहुत सारे अंग मिलकर तंत्र का निर्माण करते हैं और यह सभी तंत्र (श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र, पोषण तंत्र इत्यादि) मिलकर हमारे शरीर का निर्माण करते हैं।

इस आर्टिकल में हम कोशिका के बारे में बात करेंगे और कोशिका के बारे में सभी जानकारी प्रदान करेंगे जैसे कि कोशिका के परिभाषा, प्रकार, कार्य, सिद्धांत और तथ्य (koshika In Hindi)

Table of Contents

कोशिका क्या है – What is cell in Hindi

कोशिका के परिभाषा, प्रकार, कार्य, सिद्धांत और तथ्य | koshika | cell in Hindi

1665 में एक वैज्ञानिक ने एक वृक्ष की छाल की पतली सी परत को स्वनिर्मित सूक्ष्मदर्शी से देखा और उस वैज्ञानिक ने पाया कि वृक्ष की छाल में अनेकों छेद हैं। जिसकी संरचना काफी हद तक मधुमक्खी के छत्ते जैसी प्रतीत हो रही थी। उस वैज्ञानिक ने इस संरचना को कोशिका कहा। कोशिका (Cell) लैटिन भाषा के एक शब्द ‘शेलुला’ से लिया गया है जिसका अर्थ होता है ‘छोटा कमरा’।

कोशिका (Cell) सभी सजीवों की मूलभूत सरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। जिस प्रकार किसी बड़े घर की एक मूलभूत इकाई ईट होती है उसी प्रकार हर सजीव प्राणी की मूलभूत इकाई कोशिका होती है और यह स्वयं जनन भी करती हैं। 

कोशिकाएं विभिन्न पदार्थों का वह छोटे से छोटा रूप होती हैं जो वे सभी क्रियाएं कर सकती हैं जिनके सामूहिक रूप को हम जीवन कहते हैं जैसे पोषण (Nutrition), स्वसन (Respiration), वहन (Transportation) और उत्सर्जन (Excretion) इत्यादि।

सभी कोशिकीय जीवधारी स्वतंत्र रूप से अपना जीवन यापन और जीवन के सभी आवश्यक कार्य करने में सक्षम होते हैं। बिना कोशिका के किसी भी सजीव जीव का अस्तित्व नहीं हो सकता।

मुख्य रूप से कोशिका के आधार पर जीवो को वर्गीकृत किया जाता है। जीवाणु एक ही कोशिका के बने होते हैं इसलिए उन्हें एक कोशिकीय जीव कहा जाता है और कुछ जीव जैसे मनुष्य बहुत सारी कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं उन्हें बहुकोशिकीय जीव कहते हैं। कोशिकाओं का विधिवत अध्ययन करना कोशिका जैविकी (Cell biology) या कोशिका विज्ञान (Cytology) कहलाता है।

कोशिका की परिभाषा – Definition of cell in Hindi

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार कोशिका की परिभाषा:- 

“जीवित पदार्थ की सबसे छोटी इकाई जो अपने आप मौजूद हो सकती है। कोशिका कहलाती है सभी पौधे और जानवर कोशिकाओं से बने होते हैं”

कोशिका का कार्य – Function of cell in Hindi

हमारा शरीर अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना है सभी कोशिकाएं अलग-अलग होती हैं तथा कोशिकाओं के कार्य भी अलग-अलग होते हैं। इसके साथ साथ ही कोशिका में उपलब्ध घटकों के कार्य भी अलग-अलग होते हैं। कोशिका किसी भी जीवित व्यक्ति की मूलभूत इकाई होती है। इसलिए जीवन में होने वाले सभी कार्य किसी ना किसी तरीके से कोशिका से जुड़े होते हैं। परंतु अगर मैं बात करूं कोशिका के प्रमुख कार्यों की तो कोशिका के तीन प्रमुख कार्य होते हैं।

वृद्धि तथा चयापचय (Growth and Development)

हमारा शरीर शिशु अवस्था से लेकर वृद्धावस्था तक निरंतर बढ़ता रहता है हमारे शरीर की वृद्धि का कार्य कोशिकाओं द्वारा ही संपन्न होता है।

प्रोटीन संश्लेषण (Synthesis of Protein)

हमारे शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसके लिए प्रोटीन संश्लेषण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रोटीन संश्लेषण का कार्य भी कोशिकाओं द्वारा ही संपन्न होता है।

सृजन (Production)

जीवित व्यक्तियों के शरीर में रोज कई तरह के परिवर्तन होते हैं कई छोटे-मोटे अंग टूटते हैं और खराब होते हैं इन सभी अंगों की मरम्मत करना तथा नए अंगों का निर्माण करना कोशिका का ही कार्य होता है।

कोशिका का इतिहास – History of cell in Hindi

  • सन 1665 में पहली बार रॉबर्ट हुक ने बोतल की कार्क की एक पतली परत का अध्ययन किया और पाया कि उस पर मधुमक्खी के छत्ते नुमा एक संरचना है। तथा उन्होंने इस संरचना को कोशिका नाम दिया यह तथ्य रॉबर्ट हुक की पुस्तक में छपा हुआ है।
  • सन 1674 में एंटोनी वॉन ल्यूवेन्हॉक ने जीव कोशिकाओं पर प्रथम बार अध्ययन किया तथा उन्होंने कोशिकाओं को दातों की खुरचनी में देखा था।
  • सन 1831 में रॉबर्ट ब्राउन द्वारा कोशिका के केंद्रक का पता लगाया गया।
  • तदरोचित नामक वैज्ञानिक ने 1824 में कोशिका सिद्धांत यानी सेल थ्योरी का विचार प्रस्तुत किया परंतु इसका सारा श्रेय वनस्पति विज्ञान शास्त्री और जंतु विज्ञान शास्त्री को दिया गया जिन्होंने संपूर्ण रूप से कोशिका सिद्धांत को 1839 में प्रस्तुत किया और बताया कि कोशिकाएं पौधे तथा जंतुओं की संरचनात्मक इकाई होती हैं।

कोशिका के प्रकार – Types of cell in Hindi

अगर कोशिकाओं की बात की जाए तो कोशिकाओं के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं।

  • प्रोकैरियोटिक कोशिका 
  • यूकैरियोटिक कोशिका

यह भी पढ़ें:- तंत्रिका कोशिका (neurons) | न्यूरॉन्स के संरचना और कार्य, प्रकार, संरचना इत्यादि

प्रोकैरियोटिक कोशिका और यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर – Differences between Prokaryotic cell and Eukaryotic cell in Hindi

प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic cell)

प्रोकैरियोटिक कोशिका स्वतंत्र कोशिका होती है तथा आम तौर पर यह एक कोशिकीय जीव में होती हैं जैसे जीवाणु और नील हरित शैवाल इत्यादि और प्रोकैरियोटिक कोशिका में कोई स्पष्ट केंद्रक नहीं होता है इन कोशिकाओं में अल्प विकसित केंद्रक पाए जाते हैं जो कोशिका द्रव्य में बिखरे हुए होते हैं इन्हें केंद्रकाभ कहते हैं।

  • यह कोशिकाएं आकार में बहुत छोटी होती हैं
  • कोशिकाओं में केंद्रकीय (Nucleoid) भाग होता है
  • कोशिका में न्यूक्लियस झिल्ली से ढका नहीं होता है तथा केंद्रक अनुपस्थित होता है
  • इस प्रकार की कोशिकाओं में झिल्ली द्वारा घिरे अंगक अनुपस्थित होते हैं
  • इस प्रकार की कोशिकाओं में कोशिका विभाजन विखंडन या कोशिका विभाजन द्वारा होता है
  • यह कोशिकाएं हमेशा एक कोशिकीय जीव में होती हैं जैसे जीवाणु और नील हरित शैवाल इत्यादि

यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic cell)

यूकैरियोटिक कोशिकाएं आमतौर पर बहू कोशी प्राणियों में पाई जाती है। जैसे इंसान और जानवर इत्यादि और सभी उच्च श्रेणियों के जंतुओं जैसे पेड़ पौधे पक्षी इत्यादि में यूकैरियोटिक कोशिका पाई जाती है। यूकैरियोटिक कोशिका में एक संगठित और पूर्ण विकसित केंद्रक पाया जाता है जो एक बाहरी आवरण से ढका हुआ होता है। यूकैरियोटिक कोशिका में डीएनए तथा हिस्टोन प्रोटीन के कंबीनेशन से बनी क्रोमेटिन और केंद्रकिका होती है।

  • यह कोशिकाएं आकार में बड़ी होती हैं
  • इस प्रकार की कोशिका में केंद्रकीय भाग न्यूक्लियर झिल्ली द्वारा घिरे हुए होते हैं
  • इस प्रकार की कोशिका में केंद्रक उपस्थित होता है तथा कोशिका द्रव्य में तैरता रहता है
  • इस प्रकार की कोशिका के अंगक झिल्ली द्वारा घिरे होते हैं
  • इस प्रकार की कोशिका में कोशिका विभाजन माइटोसिस या मियोसिस द्वारा होता है
  • इस प्रकार की कोशिका वाले जीव बहुकोशिकीय जीव होते हैं जैसे पेड़ पौधे, जंतु और मनुष्य इत्यादि

कोशिका का सिद्धांत – cell theory in Hindi

सन 1838 में जर्मनी के एक वैज्ञानिक जिनका नाम मैथीयस स्लाईडेन था उन्होंने बहुत सारे पौधों का अवलोकन किया उन पर शोध और रिसर्च करें तथा यह पाया कि पौधे विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं तथा यह कोशिकाएं पौधों में ऊतकों का निर्माण करती हैं।

सन 1839 में एक ब्रिटिश वैज्ञानिक थियोडोर श्वान ने विभिन्न जंतुओं की कोशिकाओं पर शोध की तथा यह पाया कि सभी कोशिकाओं की बाहरी सतह पर एक पतली परत मिलती है जिसे आजकल जीवद्रव्य झिल्ली कहते हैं तथा इस वैज्ञानिक ने पादप ऊतकों का अध्ययन कर यह भी बताया कि पादपों की कोशिका में कोशिका भित्ति होती है जो इसकी विशेषता है क्योंकि कोशिका भित्ति जंतु कोशिकाओं में नहीं होतीं।

कोशिका सिद्धांत के तीन सिद्धांत निम्नलिखित हैं

  1. प्रत्येक जीव में कोशिका मौलिक संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
  2. प्रत्येक जीव एक या एक से अधिक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।
  3. कोशिकाओं की उपस्थिति पूर्व उपस्थित कोशिकाओं द्वारा होती है।
  4. “बैक्टीरिया” कोशिका सिद्धांत का अपवाद है

कोशिका की संरचना – Structure of cell in Hindi

कोशिकाएं सजीव होती हैं तथा वे सभी कार्य कर सकती हैं जो एक जीवित प्राणी के जीने के लिए आवश्यक है जैसे पोषण स्वसन ट्रांसपोर्टेशन और उत्सर्जन। कोशिका आकार में अति सूक्ष्म होती है तथा यह किसी भी आकार की हो सकती हैं जैसे गोलाकार अंडाकार स्तंभ आकार इत्यादि।

कोशिका एक जेली जैसी संरचना से घिरी होती है इसे कोशिकावरण या कोशिका झिल्ली कहते हैं यह झिल्ली आमतौर पर परागण में होती है मतलब इसमें से जरूरी पदार्थ जैसे अणु या आयन मुक्त रूप से सीमित मात्रा में आ जा सकते हैं। 

कोशिका के अंदर निम्नलिखित संरचनाएं पाई जाती है

  • केंद्रक एव केंद्रका
  • जीव द्रव्य
  • कोशिका झिल्ली

कोशिका झिल्ली – Cell membrane

  • Cell membrane को plasma membrane भी कहते हैं 
  • यह एक अर्ध पारगम्य झिल्ली ( semipermeable membrane) का बना होता है 
  • यह लिपिड और प्रोटीन के बाय लेयर से बना होता है तथा इसका मुख्य कार्य शरीर में आने वाले पदार्थों का निर्धारण करना होता है। 
  • यह कोशिकाओं को दूसरी कोशिका की कोशिका द्रव्य से अलग करती है।
  • कोशिका झिल्ली पादप तथा जंतु दोनों प्रकार की कोशिकाओं में पाई जाती है।

प्लाज्मा झिल्ली के कार्य

  • प्लाज्मा झिल्ली कोशिका के अंदर व बाहर अणुओं को आने जाने देती है।
  • प्लाज्मा झिल्ली कोशिका को एक निश्चित आकार प्रदान करती हैं।
  • प्लाज्मा झिल्ली के अंदर तथा बाहर अणुओं का आदान-प्रदान विसरण और परासरण द्वारा होता है।

कोशिका भित्ति – Cell wall 

  • कोशिका भित्ति पादप कोशिकाओं में पाई जाती है पादप कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के ऊपर एक संरचना पाई जाती है जिसे कोशिका भित्ति कहते हैं 
  • यह जंतु कोशिका में अनुपस्थित होती है।
  • यह सख्त मजबूत मोटी और आजीवित संरचना होती है
  • कोशिका भित्ति सैलूलोज की बनी हुई होती है।
  • पादप कोशिकाएं एक दूसरे से plasmodesmat द्वारा संपर्क में रहती हैं।

कोशिका भित्ति के कार्य

  • कोशिका भित्ति कोशिका की संरचना प्रदान करती है
  • कोशिका भित्ति की वजह से संरचना मजबूत और कठोर हो जाती है
  • तथा कोशिका झिल्ली की तरह ही कोशिका भित्ति से भी आवश्यक पदार्थों का आदान प्रदान होता रहता है।
  • इसमें मरम्मत करने और पूर्व जनन करने की क्षमता भी होती है।

केंद्रक – Nucleus

  • केंद्रक कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है जो कोशिका की हर क्रिया पर नियंत्रण रखता है जिस प्रकार हमारा दिमाग हमारे शरीर को नियंत्रित करता है उसी प्रकार केंद्रक कोशिका को नियंत्रित करता है।
  • इसलिए इसे कोशिका का मस्तिष्क या कोशिका का केंद्रक headquarter of cell कहा जाता है
  • इसकी खोज सन् 1831 में रॉबर्ट ब्राउन ने की थी
  • यूकैरियोटिक कोशिकाओं में स्पष्ट रूप से केंद्रक होता है जबकि प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में प्राथमिक केंद्रक होता है तथा केंद्रक अल्प विकसित होता है।
  • केंद्रक के ऊपर द्विस्तरीय झिल्ली को केंद्रक झिल्ली कहते हैं।
  • केंद्रक द्रव्य में केंद्रकाय और क्रोमोटिन धागे होते हैं
  • यह डीएनए तथा अनुवांशिकी सूचनाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाने का कार्य करते हैं।

केंद्रक के कार्य – Function of Nucleus

  • केंद्रक कोशिकाओं में होने वाली सभी गतिविधियों को नियंत्रण में रखता है तथा 
  • इसका मुख्य कार्य अनुवांशिक सूचनाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाना होता है।

कोशिका द्रव्य – Cytoplasm

  • Cytoplasm कोशिका में केंद्रक तथा कोशिका झिल्ली के बीच में होता है यह एक जेली की तरह होता है इसमें कोशिकांग तैरते रहते हैं।
  • कोशिका द्रव्य में जैविक तथा कैटाबॉलिक क्रियाएं संपन्न होती हैं।
  • कोशिका द्रव्य के 2 मुख्य भाग होते हैं
  • सिस्टोल जलीय द्रव्य जिसमें लगभग 90% जल 7% प्रोटीन 2% कार्बोहाइड्रेट और 1% अन्य तत्व होते हैं।
  • कोशिका अंगक – विभिन्न प्रकार के कोशिका अंगक जो कोशिका द्रव्य में तैर रहे होते हैं जैसे माइट्रोकांड्रिया गॉल्जी उपकरण इत्यादि

गॉल्जी उपकरण 

  • गॉल्जी उपकरण एक पतली झिल्ली युक्त चपटी झिल्लियों का एक समूह है और यह एक दूसरे के ऊपर समांतर सजी रहती हैं।
  • इनकी खोज कमीलो गोलगी ने की थी तथा यह प्रोकैरियोटिक स्तनधारी आरबीसी में अनुपस्थित होती हैं।

गॉल्जी उपकरण के कार्य

  • गॉल्जी उपकरण का मुख्य कार्य लिपिड के निर्माण में सहायता करना होता है
  • गॉल्जी उपकरण के अंदर मेलेनिन का संश्लेषण होता है
  • इसके साथ साथ ही अन्तर्दव्यी जालिका में संश्लेषित प्रोटीन का संग्रह भी गॉल्जी उपकरण में ही किया जाता है
  • यह कोशिका भित्ति और कोशिका झिल्ली बनाने में मदद करता है।

DNA

डीएनए आमतौर पर केंद्रक के अंदर होता है यह सेल जेनेटिक मटेरियल का बना होता है केंद्रक को कोशिका का मस्तिष्क कहा जाता है। जिस प्रकार हमारा दिमाग हमारे शरीर को नियंत्रण में रखता है उसी प्रकार केंद्रक कोशिका में होने वाले सभी कार्यों को नियंत्रण में रखता है। 

DNA का कार्य

  • सेल जेनेटिक मैटेरियल का बना होता है
  • यह गुणसूत्र और अनुवांशिकी को पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाता रहता है
  • कोशिका में होने वाले सभी कार्यों को नियंत्रित करता है।

माइटोकॉन्ड्रिया

  • माइटोकॉन्ड्रिया प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में अनुपस्थित होते हैं।
  • इसे कोशिका का पावर हाउस भी कहते हैं क्योंकि इसमें ऊर्जा एटीपी के रूप में स्टोर की जाती है
  • यह दोहरी झिल्ली वाले होते हैं तथा यह सभी यूकेरियोटिक कोशिकाओं में उपस्थित होते हैं केवल आरबीसी को छोड़ कर।
  • माइटोकॉन्ड्रिया की बाहरी परत चिकनी होती है
  • माइट्रोकांड्रिया को सर्वप्रथम 1880 में कोलिकेर ने देखा था
  • माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर खुद का डीएनए तथा राइबोसोम होता है।

माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य

  • माइटोकॉन्ड्रिया का मुख्य कार्य ऊर्जा का निर्माण करना तथा एटीपी के रूप में ऊर्जा को संचित करना होता है
  • यह क्रेब्स चक्र या कोशिकीय श्वसन का मुख्य स्थान है

राइबोसोम 

  • यह अनंत छोटे गोल कण होते हैं जो जीव द्रव्य में स्वतंत्र रूप से तैरते रहते हैं या अन्तर्दव्यी जालिका की बाहरी सतह पर चिपके पाए जाते हैं तथा 
  • यह आर एन ए और प्रोटीन के बने होते हैं।

राइबोसोम के कार्य

  • अमीनो एसिड द्वारा प्रोटीन संश्लेषण का मुख्य स्थान राइबोसोम होता है
  • सभी संरचनात्मक एवं क्रियात्मक प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम द्वारा ही किया जाता है
  • राइबोसोम में संश्लेषित प्रोटीन को कोशिका के विभिन्न भागों में अन्तर्दव्यी जालिका द्वारा भेजना भी राइबोसोम का ही कार्य है

अन्तर्दव्यी जालिका

  • यह झिल्ली युक्त नलिकाओं का एक तंत्र होता है तथा यह विशाल होता है
  • इसकी खोज porter, Claude और fullam ने की थी
  • अन्तर्दव्यी जालिका को ER भी कहते हैं
  • अन्तर्दव्यी जालिका द्वारा निर्मित प्रोटीन और वसा, कोशिका झिल्ली बनाने में सहायक होते हैं इस प्रक्रिया को झिल्ली जीवात् जनन कहते हैं
  • यह प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं तथा स्तनधारी इरेथोसाइट के अलावा सभी जीवो में पाए जाते हैं
  • अन्तर्दव्यी जालिका दो प्रकार की होती है

खुरदरी अन्तर्दव्यी जालिका

  • यह झिल्ली और नलिकाओं द्वारा बने होते हैं
  • यह वसा तथा लिपिड बनाने में मदद करते हैं
  • इनमें राइबोसोम अनुपस्थित होते हैं
  • केंद्रक के और कोशिका द्रव्य के मध्य प्रोटीन के परिवहन के लिए सुविधा प्रदान करते हैं
  • यकृत की कोशिकाओं में विष तथा दवा का निराविषीकरण करते है

चिकनी अन्तर्दव्यी जालिका

  • यह सिस्टर्नी व नलिकाओं के बने होते हैं
  • प्रोटीन संश्लेषण में सहायक होते हैं
  • इनमें राइबोसोम उपस्थित होते हैं

अन्तर्दव्यी जालिका के कार्य

  • यह केवल एक अंगक है जो कोशिका के अंदर के पदार्थों और केंद्रक के बीच में परिवहन नलिका की सुविधा प्रदान करता है
  • यह बायोकेमिकल क्रियाओं के लिए स्थान उपलब्ध कराता है
  • यह वसा वा प्रोटीन संश्लेषण में मदद करता है
  • कोशिकाओं को डिटॉक्सिफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लवक

  • केवल पादप कोशिकाओं में ही पाए जाते हैं यह जंतु कोशिका में नहीं पाए जाते हैं
  • यह कोशिका अंगक है जिनके आंतरिक संगठन में झिल्ली की दो परतें होती हैं।
  • इस पदार्थ को स्ट्रोमा कहते हैं
  • यह आकार में कुंडलित होती हैं
  • लवक में खुद के डीएनए तथा राइबोसोम होते हैं
  • लवक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं
  • ल्यूकोप्लास्ट – सफेद होते हैं तथा तने और जड़ों में पाए जाते हैं।
  • क्रोमोप्लास्ट – लाल भूरे तथा अन्य रंग के होते हैं और यह जड़, तना और पत्तियों में पाए जाते हैं
  • क्लोरोप्लास्ट – हरे रंग के होते हैं तथा पत्तियों में पाए जाते हैं

लवक का कार्य

क्लोरोप्लास्ट – क्लोरोप्लास्ट केवल पादप में ही पाए जाते हैं तथा यह सूर्य की मदद से प्रकाश संश्लेषण कर अपना भोजन बनाते हैं इसलिए इन्हें कोशिका का रसोईघर भी कहते हैं।

रिक्तिका

  • कोशिका द्रव्य में होती हैं तथा यह एक निश्चित थैली के आकार की संरचना होती हैं जिन्हें टोनों प्लास्ट कहते हैं
  • जंतु कोशिका में यह रिक्तिका छोटी होती है तथा पादप कोशिकाओं में यह रिक्तिका बड़ी होती है
  • बड़ी रिक्तिका लगभग कोशिका का 90% भाग घेरे रखती है

रिक्तिका के कार्य

  • यह कोशिका के अंदर परासरण दाब का नियंत्रण रखती है जिसकी मदद से कोशिका में अपशिष्ट पदार्थ को इकठ्ठा किया जाता है

लाइसोसोम

  • गॉल्जी उपकरण की कुछ पुटिकाऔं में एंजाइम इकट्ठे हो जाते हैं यह झिल्ली युक्त पुटिका लाइसोसोम कहलाती है 
  • इनका कोई निश्चित आकार या आकृति नहीं होती है 
  • यह आमतौर पर जंतु कोशिका और कुछ पादप कोशिका में पाए जाते हैं

लाइसोसोम का कार्य

  • लाइसोसोम का मुख्य कार्य कोशिका की साफ सफाई करना होता है जब कोई पदार्थ कोशिका में क्षतिग्रस्त हो जाता है तब लाइसोसोम उसे अपने अंदर सोख लेता है और फट जाता है जिससे उस चीज के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैं और यह कोशिका द्वारा डाइजेस्ट हो जाता है इसलिए लाइसोसोम को सुसाइड बैग भी कहते हैं।

कोशिका का आकार – Size of cell in Hindi

  • माइक्रोप्लाज्मा – माइक्रोप्लाज्मा हमारे शरीर की सबसे छोटी कोशिका होती है इसकी लंबाई लगभग 0.3 माइक्रोमीटर होती है
  • बैक्टीरिया – बैक्टीरिया की लंबाई लगभग 3 से लेकर 5 माइक्रोमीटर तक होती है।
  • मानव आरबीसी – मानव आरबीसी की लंबाई 7 माइक्रोमीटर तक होती है।
  • Boemeria nivea – यह सबसे लंबी पादप कोशिका होती है।
  • एसेटाबुलेरिया: – यह सबसे लंबा एक कोशिकीय पादप है
  • शुतुरमुर्ग का अंडा- सबसे बड़ी एकल कोशिका होता है

पादप कोशिका और जंतु कोशिका में अंतर – Differences between plant and animal cell in Hindi

पादप कोशिका – Plant cell

पादप कोशिका जंतु कोशिका से ज्यादा भिन्न नहीं होती मुख्य रूप से देखा जाए तो पादप कोशिका जंतु कोशिका के समान ही होती है परंतु इसमें कुछ अलग चीजें होती हैं जैसे

  • प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोप्लास्ट होता है
  • इनका आकार निश्चित करने के लिए इनके अंदर कोशिका भित्ति होती है जो इनका आकार निश्चित करती है तथा इसको कठोर बनाती है
  • रिक्तिका उपस्थित एवं बड़ी होती है
  • इनमें लाइसोसोम नहीं पाए जाते हैं
  • आमतौर पर इन कोशिकाओं का आकार चतुर्भुज होता है
  • गॉल्जी उपकरण पूर्ण विकसित नहीं होता है

जंतु कोशिका – Animal cell

आमतौर पर जंतु कोशिका पादप कोशिका से अधिक भिन्न नहीं होती परंतु पादप तथा जंतु कोशिका में निम्नलिखित अंतर होते हैं

  • जंतु कोशिका में क्लोरोप्लास्ट नहीं होता क्योंकि जंतु कोशिका प्रकाश संश्लेषण नहीं करती
  • जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति नहीं होती
  • जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति ना होने के कारण से इनका आकार अनिश्चित होता है यह लंबी मोटी पतली किसी भी आकार की हो सकती हैं।
  • जंतु कोशिका में रिक्तिका अनुपस्थित या बहुत छोटी होती है
  • जंतु कोशिका में लाइसोसोम पाए जाते हैं
  • जंतु कोशिकाओं में गॉल्जी उपकरण उपस्थित व पूर्ण विकसित होता है

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में कोशिका के बारे में बताया है और कोशिका के बारे में सभी जानकारी प्रदान किया है जैसे कि कोशिका के परिभाषा, प्रकार, कार्य, सिद्धांत और तथ्य (koshika In Hindi)

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा अगर आपके कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपके सवालों का जवाब देने का प्रयास जरूर करेंगे

प्रश्न उत्तर

कोशिका के अंदर क्या क्या होता है?

वैसे तो कोशिकाओं के अंदर बहुत सारी चीजें होती हैं परंतु अगर मुख्य रूप से देखा जाए तो कोशिका के अंदर तीन मुख्य चीजें होती हैं DNA, कोशिका द्रव्य और कोशिका झिल्ली। 

कोशिका के कौन से भाग में विशेष प्रोटीन पाया जाता है?

कोशिका में मुख्य रूप से 3 भाग होते हैं केंद्रक, कोशिका झिल्ली और कोशिका द्रव्य कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण कोशिका द्रव्य में होता है।

मानव शरीर में कुल कितनी कोशिकाएं होती हैं?

मानव शरीर बहुत जटिल संरचना है इसमें हर कार्य के लिए अलग-अलग कोशिकाएं होती हैं एक मनुष्य के शरीर में कई लाख करोड़ कोशिकाएं होती हैं वैज्ञानिकों के अनुसार इंसानों के शरीर में लगभग 30 ट्रिलियन कोशिकाएं होती हैं।

कोशिका के समूह को क्या कहते हैं?

कोशिका हमारे शरीर की संरचनात्मक इकाई होती है कोशिका में मुख्य रूप से तीन चीजें होती हैं केंद्रक कोशिका द्रव्य और कोशिका झिल्ली। जब बहुत सारी कोशिका मिलकर एक समूह तैयार करती हैं तब उस कोशिकाओं के समूह को ऊतक (tissue) कहते हैं। और जब बहुत सारे ऊतकों का समूह बनता है तो वह समूह अंग बन जाता है और जब यह सभी अंग आपस में तालमेल बिठाकर काम करते हैं तब इस समूह को मानव तंत्र कहा जाता है।

जीवाणु की कोशिकाओं का मुख्य घटक क्या है?

जीवाणु कोशिका के प्रकार को प्रोकैरियोटिक कोशिका कहा जाता है प्रोकैरियोटिक कोशिका में अल्प विकसित केंद्रक होते हैं जो कोशिका द्रव्य में बिखरे हुए होते हैं। इसलिए जीवाणु की कोशिकाओं का सबसे मुख्य घटक कोशिका द्रव्य होता है।

उस कोशिका का नाम बताओ जो शरीर में आने वाले जीवाणुओं को मार भगाते हैं?

हमारे शरीर की एक रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जिसे इम्यूनिटी कहते हैं हमारे शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं जो हमारी इम्यूनिटी को मजबूत करती हैं और मुख्य रूप से श्वेत रक्त कोशिकाएं ही हमारे शरीर में आने वाले जीवाणुओं से लड़ती हैं और हमें बीमार होने से बचाती हैं।

कोशिका का मुख्य कार्य क्या होता है?

कोशिका सभी सजीव चीजों के शरीर की एक भौतिक और मौलिक इकाई है यह वह सभी कार्य करती है जो हर जीव अपने जीवित रहने के लिए करता है जैसे कोशिका हमारे शरीर को एक आधारभूत संरचना प्रदान करती है यह खाने से पोषक तत्व लेती है तथा उन पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलती है और उस उर्जा से निर्धारित कार्यों को किया जाता है। तथा कोशिकाएं अपनी जैसी ही कोशिका उत्पन्न कर सकती हैं इसे सभी कोशिकाएं अलग अलग तरीके से करती हैं।

प्रोकैरियोटिक कोशिका वाले जीवो का नाम बताइए?

मुख्य रूप से कोशिकाओं को दो वर्गों में विभाजित किया गया है यूकैरियोटिक कोशिका और प्रोकैरियोटिक कोशिका। यूकेरियोटिक कोशिका वाले जीव आमतौर पर बहुकोशिकीय जीव होते हैं जैसे इंसान जानवर इत्यादि जबकि प्रकृतिक कोशिका वाले जीव एक कोशिकीय जीव होते हैं जैसे बैक्टीरिया, जीवाणु, नील हरित शैवाल और माइक्रो प्लाज़्मा इत्यादि।

कोशिका क्या है तथा इसका कार्य और संरचना क्या है?

कोशिका हमारे शरीर की एक आधारभूत और मौलिक संरचना है हमारे शरीर के सभी अंग कोशिकाओं से ही मिलकर बने होते हैं तथा जिस प्रकार अलग-अलग अंग अलग-अलग कार्य करती हैं उसी प्रकार अलग-अलग अंगों की कोशिकाएं अलग-अलग कार्य करते हैं तथा सभी कोशिकाएं एक जैसा कार्य नहीं करती हैं। कोशिका में मुख्य रूप से तीन चीजें होती हैं कोशिका झिल्ली जो कोशिका को बाहरी पर्यावरण से सुरक्षित रखती हैं कोशिका द्रव्य कोशिका के अंदर एक जेली जैसी संरचना होती है जिसमें और भी छोटे-छोटे कोशिकांग होते हैं जैसे माइट्रोकांड्रिया और कोशिका का केंद्रक कोशिका के केंद्र का मुख्य कार्य अनुवांशिकी और कोशिकाओं की वृद्धि करना होता है।

कोशिका को कौन नियंत्रण में रखता है?

कोशिका में केंद्रक होता है जिसके चारों तरफ कोशिका द्रव्य होता है यह कोशिका का दिमाग होता है और यही कोशिका के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है।

कोशिका का पावर हाउस (power house) क्या है?

कोशिका के अंदर भी बहुत सारे छोटे छोटे अंग होते हैं जिन्हें कोशिकांग कहते हैं तथा इनके भी अलग-अलग कार्य होते हैं कोशिका के अंदर कोशिका द्रव्य में माइट्रोकांड्रिया नाम का कोशिकांग होता है तथा इसे कोशिका का पावर हाउस (power house) भी कहते हैं क्योंकि स्वसन के दौरान बनने वाली ऊर्जा एटीपी के रूप में माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर ही स्टोर होती है।

कोशिका का रसोईघर (kitchen) किसे कहते हैं?

कोशिका में कई सारे कोशिकांग होते हैं इनमें से ही प्लैस्टिड एक कोशिकांग है इसे कोशिका का रसोईघर (kitchen) भी कहते हैं प्लैस्टिड केवल पादप कोशिकाओं में ही होते हैं जैसे पेड़ पौधे तथा एलगी। प्लैस्टिड का काम कोशिका में फूड का निर्माण तथा भंडारण करना होता है।

कोशिका का दिमाग किसे कहते हैं?

कोशिका का दिमाग कोशिका के केंद्र को कहते हैं क्योंकि यह कोशिका में होने वाली सभी गतिविधियों के लिए उत्तरदाई होता है।

DNA का फुल फॉर्म क्या है?

DNA – डी ऑक्सी राइबो न्यूक्लिक एसिड

केंद्रक को कोशिका का दिमाग क्यों कहते हैं?

केंद्र को कोशिका का दिमाग इसलिए कहा जाता है क्योंकि कोशिका में होने वाली हर गतिविधि तथा कार्य को केंद्रक ही नियंत्रित करता है