Malnutrition definition, type, cause and treatment in Hindi | कुपोषण क्या है निबंध, कारण, प्रकार, इलाज

हमारा शरीर बहुत सारे पोषक तत्वों और भिन्न-भिन्न अंगों से मिलकर बना है हमारे शरीर में अगर किसी भी अंग या पोषक तत्व की कमी हो जाती है तो हमें उससे संबंधित बीमारियां होने लगती है और आजकल तो फास्ट फूड आदि का चलन है जिसकी वजह से ज्यादातर लोग अच्छा और पौष्टिक खाना खाने की जगह फास्ट फूड और तला भुना भोजन खाना पसंद करते हैं। और इन सब अन हेल्थी आदतों और फूड की वजह से व्यक्ति को कुपोषण की बीमारी हो जाती है कुपोषण की बीमारी एक ऐसी बीमारी है जो तब होती है जब व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

इस आर्टिकल में हम कुपोषण (Malnutrition) के बारे में बात करेंगे और कुपोषण (Malnutrition) के बारे में सभी जानकारी प्रदान करेंगे जैसे कि कुपोषण क्या है निबंध, कारण, प्रकार, इलाज (Malnutrition definition, type, cause and treatment in Hindi) इत्यादि

कुपोषण क्या है – What is Malnutrition in Hindi

Malnutrition definition, type, cause and treatment in Hindi | कुपोषण क्या है निबंध, कारण, प्रकार, इलाज

सरल शब्दों में कहा जाए तो कुपोषण एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को उचित मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता है मतलब व्यक्ति के आहार में सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में नहीं होते। हमारा शरीर बहुत सारे पोषक तत्व और अंगों से मिलकर बना है अगर हमारे शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी हो जाती है तो उसकी वजह से हमें बीमारियां होने लगती हैं।

इसी कारणवश जब कोई व्यक्ति एक ऐसा भोजन खाता है जिसमें पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में ना हो या पोषक तत्वों की कमी हो तो व्यक्ति को कुपोषण की बीमारी हो जाती है। 

कुपोषण की बीमारी का सबसे बड़ा और मुख्य कारण गरीबी है आज भी भारत में कई ऐसे लोग हैं जो रात को बिना खाना खाए सो जाते हैं क्योंकि उनके पास खाना खाने के लिए पैसे नहीं है। 

परंतु सिर्फ ऐसा ही नहीं है कि जो व्यक्ति खाना नहीं खाता उसको कुपोषण होता है या किसी अमीर बच्चे को कुपोषण नहीं होता कुपोषण अमीर और गरीब दोनों बच्चों को हो सकता है क्योंकि कई अमीर बच्चे भी ऐसा भोजन खाते हैं जिनमें पोषक तत्व नहीं होते और जिन का अधिक सेवन करने पर बच्चों को कुपोषण होने की संभावना होती है।

पोषण की बीमारी से बचने के लिए हमें किसी प्रकार की विशेष खानपान की कोई आवश्यकता नहीं है सिर्फ खाने में ऐसा भोजन खाना चाहिए जिसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हों जैसे दाल, चावल, रोटी, सब्जी, हरी सब्जियां, दूध, दही, अंडा, मछली इत्यादि इत्यादि। 

यह सभी चीजें पोषक तत्वों से भरी हुई है और अगर कोई व्यक्ति इन सभी चीजों का सेवन करता है तो उसे कभी भी कुपोषण की बीमारी नहीं होगी सरल भाषा में बोला जाए तो अगर कोई व्यक्ति संतुलित आहार का सेवन करता है तो उसे कभी भी कुपोषण की बीमारी नहीं होगी।

कुपोषण के लक्षण क्या हैं – Symptoms of Malnutrition in Hindi

जब किसी व्यक्ति को कुपोषण होता है तो उसे निम्नलिखित लक्षण महसूस होते हैं

  • शरीर कमजोर हो जाना
  • खाने पीने का मन ना करना
  • थकान महसूस होना 
  • चिड़चिड़ापन रहना
  • ध्यान केंद्रित ना कर पाना
  • हमेशा ठंड लगना
  • तनाव होना
  • शरीर का बेहद पतला हो जाना
  • हाथ और पैरों का बहुत कमजोर हो जाना
  • बार-बार बीमार पड़ना
  • घाव भरने में अत्याधिक समय लगना
  • सांस लेने में कठिनाई होना
  • हार्ट फेल हो जाना

कुपोषण होने पर बच्चों में निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं

  • शारीरिक और मानसिक विकास की कमी होना
  • शरीर का वजन ना बढ़ना, शरीर का वजन घटना
  • थकान और ऊर्जा की कमी महसूस होना
  • चिड़चिड़ापन और तनाव ग्रस्त रहना
  • खानपान और खेलकूद में मन ना लगना
  • व्यवहार में गड़बड़ी, बौद्धिक अक्षमता
  • सीखने में तकलीफ होना

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कुपोषण हमारे शरीर को किस तरह प्रभावित करता है – How Does Malnutrition effects our body in Hindi

कुपोषण एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से कई सारी बीमारियां होती हैं कुपोषण की वजह से व्यक्ति का शरीर पूर्ण रूप से कमजोर हो जाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी कम हो जाती है इसके अलावा पोषण की वजह से व्यक्ति को छोटी-छोटी बीमारियां भी बार-बार होती हैं और ये बीमारियां ठीक होने में भी काफी समय लेती हैं। यदि किसी व्यक्ति को कुपोषण हो जाता है तो कुपोषण उस व्यक्ति के शरीर को निम्नलिखित रूप से प्रभावित करता है।

  • व्यक्ति को मानसिक अक्षमताएं होती हैं
  • व्यक्ति को कन्फ्यूजन होने लगती है
  • व्यक्ति तनावग्रस्त रहने लगता है
  • व्यक्ति का वजन काफी कम हो जाता है
  • व्यक्ति के शरीर में ताकत भी कम हो जाती है
  • रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई आती है
  • व्यक्ति के मसल कमजोर हो जाती हैं
  • शारीरिक अंग जैसे हाथ और पैर की हड्डियों के टूटने की संभावना बढ़ जाती है
  • इंफेक्शन जैसे बैक्टीरियल और फंगल इन्फेक्शन आदि होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है
  • मनोबल और आत्मविश्वास दोनों बहुत कम हो जाते हैं
  • व्यक्ति अन्य लोगों पर निर्भर रहने लगता है

व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन के कार्य करने में बाधाएं आती हैं और व्यक्ति को किसी सामान्य व्यक्ति की तुलना में अत्याधिक कष्ट और दुख तकलीफ उठानी पड़ती है।

कुपोषण के प्रकार – Type of Malnutrition in Hindi

मुख्य रूप से कुपोषण दो प्रकार का होता है

कम पोषण (Undernutrition)

यह एक रोग है और यह तब उत्पन्न होता है जब शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसकी वजह से हमें अलग-अलग प्रकार की बीमारियां होने लगती हैं। आमतौर पर इसमें मरीज पतला, दुबला और कमजोर हो जाता है।

अधिक पोषण (Overnutrition)

यह एक रोग है और यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कोई व्यक्ति आवश्यकता से अधिक पोषक तत्व प्राप्त करता है जिसकी वजह से शरीर में आवश्यकता से अधिक पोषक तत्व हो जाते हैं और व्यक्ति को बीमारियां होने लगती हैं। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मरीज मोटा और लंबा चौड़ा दिखता है परंतु वह अंदरुनी रूप से कमजोर होता है।

कुपोषण का इलाज क्या है – Treatment of Malnutrition in Hindi

यदि कोई डॉक्टर कुपोषण का इलाज करता है तो डॉक्टर सबसे पहले उस मरीज की जांच करेंगे और उसकी स्थिति और लक्षणों के आधार पर उसके उपचार के लिए एक योजना तैयार करेंगे। डॉक्टरी इलाज के साथ-साथ ही मरीज को कुछ अन्य डॉक्टरों जैसे पोषण विशेषज्ञ आदि से भी मिलना पड़ सकता है।

कुपोषण का इलाज व्यक्ति की गंभीरता और लक्षणों की स्थिति के आधार पर शुरू किया जाता है मरीज के इलाज के दौरान निम्नलिखित चीजें की जा सकती हैं।

  • मरीज की स्क्रीनिंग और निगरानी करना
  • मरीज की आहार योजना बनाना जिसमें सभी पोषक तत्व संपूर्ण और उचित मात्रा में शामिल हो जिससे व्यक्ति के शरीर की पोषक तत्वों की कमी पूरी हो। 
  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए मेडिकल उपकरणों और दवाइयों तथा सप्लीमेंट का प्रयोग भी किया जाता है।
  • शरीर में कुपोषण होने से व्यक्ति को अलग-अलग प्रकार के लक्षण हो सकते हैं इसलिए कुपोषण के इलाज का एक मुख्य चरण है कि लक्षणों का इलाज करना जैसे उल्टी, आना, सर दर्द होना चक्कर आना आदि।
  • कुपोषण से ग्रस्त व्यक्ति को किसी प्रकार का कोई संक्रमण या वायरल इनफेक्शन भी हो सकता है इसीलिए डॉक्टर मरीज की जांच करके इंफेक्शन आदि का पता लगाते हैं और उनका इलाज करते हैं।
  • कई बार कुपोषण से ग्रस्त व्यक्ति को मुंह और गले संबंधी समस्या होने लगती है जैसे गले या मुंह से निकलने में तकलीफ होना 

कुपोषण के गंभीर मामले होने पर

  • मरीज को अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है।
  • धीरे धीरे मरीज के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जाता है।
  • और शरीर में उपलब्ध कुछ पोषक तत्व जैसे पोटेशियम और कैल्शियम आदि की भी पूर्ति की जाती है।

कुपोषण से बचाव क्या है – Prevention of Malnutrition in Hindi

आज के समय में कुपोषण एक ऐसी बीमारी बन के सामने आया है जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे बच्चे होते हैं इसलिए हमें कुपोषण की बीमारी को जड़ से खत्म करना पड़ेगा जिसके लिए जागरूकता जरूरी है और अब तो सरकार ने भी कुपोषण को हटाने के लिए काफी सारे कदम उठाए हैं जैसे आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड, स्कूलों में आठवीं कक्षा तक फ्री भोजन।

जागरूकता

कुपोषण से बचाव के लिए सबसे मुख्य चीज है जागरूकता अगर किसी व्यक्ति को पता है कि किस चीज को खाने से वह स्वस्थ रहेगा और किस चीज को खाने से वह बीमार पड़ेगा तो वह उस चीज को कभी नहीं खाएगा इसलिए हमें सबसे पहले लोगों को यह समझाना होगा कि कौन सी चीज उनके स्वास्थ्य के लिए सही है और कौन सी चीज उनके स्वास्थ्य के लिए गलत।

फल तथा सब्जियां

हमें अपने घर में ताज़े फल और सब्जियां लानी चाहिए तथा उनका उपयोग करना चाहिए क्योंकि ताजे फल और सब्जियों में सबसे अधिक पोषक तत्व होते हैं और जो लोग ताजे फल और सब्जियां खाते हैं उन्हें कभी भी कुपोषण नहीं होता।

स्वस्थ खानपान 

अपने खाने में ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्व वाले खाद्य सामग्रियों को शामिल करें जैसे रोटी चावल आलू अनाज अंडा दूध दही मछली इत्यादि क्योंकि इन में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं और हमें कुपोषण से बचने के लिए पोषण युक्त भोजन करना चाहिए।

जीवन शैली में बदलाव

 आमतौर पर लोग अपनी जीवनशैली के कारण और बुरी आदतों के कारण कुपोषण का शिकार हो जाते हैं जैसे कई लोग समय पर भोजन नहीं करते और बाहर का तला भुना और फास्ट फूड खा लेते हैं ऐसा करना हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हो सकता है और हमें कुपोषण के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

योगा और एक्सरसाइज

स्वस्थ रहने के लिए हमें अच्छा भोजन और नियमित रूप से योगा तथा एक्सरसाइज करते रहना चाहिए इससे हमारा शरीर चुस्त तंदुरुस्त और फुर्तीला रहता है और हमें आलस तनाव जैसी समस्याएं नहीं होती और हमें बहुत अच्छे तरीके से भूख भी लगती है।

कुपोषण के कारण – Causes of Malnutrition in Hindi

कुपोषण के कई कारण हो सकते हैं कुपोषण का सबसे प्रमुख कारण है

  • गरीबी:- गरीबी कुपोषण का सबसे प्रमुख कारण है क्योंकि गरीबी की वजह से ज्यादातर लोग भरपेट भोजन तक नहीं खा पाते हैं जिसकी वजह से उन्हें कुपोषण और ना जाने कैसी-कैसी बीमारियां हो जाती हैं।
  • जानकारी का अभाव
  • बढ़ती महंगाई
  • खानपान की गलत आदतें
  • सामाजिक रीति रिवाज
  • नशा और धूम्रपान
  • लगातार उल्टी होना 
  • लगातार दस्त होना
  • कोई एक्सीडेंट होना
  • किसी बीमारी की वजह से पोषक तत्व की कमी होना
  • भूख ना लगना 
  • पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं होना 
  • मोटापा होना 
  • कमजोरी महसूस होना

कुपोषण से ठीक होने में कितना समय लगता है – How much time does it take to recover from Malnutrition in Hindi

कुपोषण से ग्रस्त व्यक्ति कितने समय में ठीक होता है यह बात उस व्यक्ति के इलाज की प्रक्रिया व्यक्ति की स्थिति और लक्षणों की स्थिति के आधार पर बताई जा सकती है अगर कोई व्यक्ति संपूर्ण और स्वस्थ भोजन खाए अपने डॉक्टर से सलाह लें नियमित रूप से जांच कराए और मेडिकल दवाइयों और सप्लीमेंट का उपयोग करें तो उसे 15 से 20 दिन में ही फर्क दिखने लगेगा और लगभग 1 से 2 महीने में वह व्यक्ति ठीक हो जाएगा।

कुपोषण से जुड़े तथ्य – Facts about Malnutrition in Hindi

  • कुपोषण से जुड़े कुछ तथ्य जिनके बारे में शायद ही आपको पता होगा।
  • कुपोषण दो तरीके का होता है एक जिसमें व्यक्ति के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और दूसरा जिसमें व्यक्ति के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा अत्याधिक हो जाती है।
  • पूरी दुनिया में बहुत सारे लोग कुपोषण और कुपोषण संबंधी रोगों से प्रभावित हैं
  • कुपोषण खाने की कमी से ही नहीं बल्कि अत्यधिक मात्रा में खाना खाने से भी हो जाता है।
  • कुपोषण अपने आप में एक बीमारी है और यह कई अन्य बीमारियों को जन्म देती है।
  • किसी व्यक्ति को कुपोषण हो जाता है तो वह व्यक्ति काफी दुबला पतला और कमजोर सा दिखने लगता है।

कुपोषण का इतिहास – History of malnutrition in Hindi

कुपोषण नई बीमारी नहीं है कुपोषण काफी लंबे समय से भारत में है भारत के कई राज्यों में कई बार भुखमरी की समस्या हुई है इसके अलावा पूरे विश्व में कई बार कई राज्यों में कई जगहों पर भुखमरी की समस्या हुई है जहां पर लोगों के पास खाने के लिए खाना नहीं था और लोग भूखे मर गए ऐसी जगहों पर कुपोषण की वजह से कई लोगों की जान गई है ।

सन 1912 में पहली बार कुपोषण का पहला मामला सामने आया था जब एक गांव में भुखमरी फैल गई थी और लोगों में कुपोषण की बीमारी होने लगी थी।


1920 से लेकर 1930 के दशक में वैज्ञानिकों ने कुपोषण पर अध्ययन किया और दूसरे विश्व युद्ध में भी कई लोगों को कुपोषण हुआ। क्योंकि कई देश गरीब हो गए थे और देशों में भुखमरी फैल गई थी।


कई देशों में कुपोषण से लड़ने के लिए पहल की गई और लोगों द्वारा कुपोषण से लड़ने के लिए अलग-अलग कदम भी उठाए गए जैसे 1960 के दशक में कुपोषण को रोकने के लिए हरित क्रांति लाई गई थी।


इस समस्या का निवारण के लिए 1996 में रोम ने भी कुपोषण के खिलाफ पहल की और लोगों में कुपोषण के खिलाफ जानकारी बढ़ाई।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में कुपोषण (Malnutrition) के बारे में बताया है और कुपोषण (Malnutrition) के बारे में सभी जानकारी प्रदान किया है जैसे कि कुपोषण क्या है निबंध, कारण, प्रकार, इलाज (Malnutrition definition, type, cause and treatment in Hindi) इत्यादि

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा अगर आपके कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपके सवालों का जवाब देने का प्रयास जरूर करेंगे

संदर्भ