मनोविज्ञान क्या है? परिभाषा, प्रकार इत्यादि | Psychology in Hindi

साइकोलॉजी (Psychology) एक ऐसा शब्द है जो बहुत छोटा है परंतु इसके मायने काफी बड़े हैं और यह काफी हद तक हमारी जिंदगी से जुड़े हुए भी हैं। आमतौर पर कोई व्यक्ति क्या सोच रहा है यह बात जानना काफी मुश्किल होता है परंतु साइकोलॉजी की मदद से यह हम बहुत आसानी से समझ सकते हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो किसी भी प्राणी के मनोविज्ञान का क्रमबद्ध अध्ययन करना ही साइकोलॉजी है।

इसलिए आज इस आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की साइकोलॉजी क्या है, साइकोलॉजी की परिभाषा क्या है, साइकोलॉजी की अलग-अलग शाखाएं क्या है, साइकोलॉजी का इतिहास क्या है, साइकोलॉजी का इस्तेमाल क्या है, साइकोलॉजी का पर्सनैलिटी टेस्ट क्या है और कोविड-19 के समय लोगों की साइकोलॉजी क्या थी।


मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) क्या है – What is psychology in Hindi


मनोविज्ञान क्या है? परिभाषा, प्रकार इत्यादि

मनोविज्ञान एक विद्या है यह विद्या किसी भी प्राणी (जैसे मनुष्य, पशु, पक्षी और अन्य सभी जीव जंतु) के मनोविज्ञान का अध्ययन प्राणी के व्यवहार और अनुभव की सहायता से करती है। इस विद्या द्वारा हम किसी भी व्यक्ति मनुष्य जीव जंतु आदि के मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर सकते हैं। सरल भाषा में बोला जाए तो किसी भी प्राणी के मानसिक प्रक्रियाओं का क्रमबद्ध रूप से अध्ययन करना ही साइकोलॉजी या मनोविज्ञान कहलाता है।

साइकोलॉजी के द्वारा अब यह अनुमान लगा सकते हैं कि कोई व्यक्ति किसी क्रिया के फल स्वरुप क्या क्या प्रतिक्रिया करेगा। साइकोलॉजी में प्रत्यक्षण (Perception),  सीखना (अधिगम), संवेदन (Sensation), स्मृति और चिन्तन आदि शामिल होते हैं

साइकोलॉजी दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है साइकी (Psyche) + लॉगोस (Logos) साइकी का मतलब दिमाग से होता है जबकि लॉगोस का मतलब होता है अध्ययन करना तो इसीलिए इसका शाब्दिक अर्थ हो जाता है दिमाग और दिमाग से जुड़ी बातों का अध्ययन करना।

साइकोलॉजी का अध्ययन अलग-अलग प्रकार से किया जाता है अलग-अलग तरीकों से किया जाता है कुछ लोग साइकोलॉजी का अध्ययन मानसिक प्रक्रियाओं (mental processes) द्वारा करते हैं तो कुछ लोग साइकोलॉजी का अध्ययन (experiences) या अनुभव के आधार पर करते हैं और कुछ लोग साइकोलॉजी का अनुभव व्यवहार (behaviours) के आधार पर करते हैं।

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मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) की परिभाषा – Definition of psychology in Hindi


अलग-अलग वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर साइकोलॉजी को अलग-अलग रूप में परिभाषित किया है साइकोलॉजी की अलग-अलग परिभाषाएं निम्नलिखित हैं।

वाटसन के अनुसार, 

मनोविज्ञान, व्यवहार का निश्चित या शुद्ध विज्ञान है।

मैक्डूगल के अनुसार, 

मनोविज्ञान, आचरण एवं व्यवहार का यथार्थ विज्ञान है।

वुडवर्थ के अनुसार, 

मनोविज्ञान, वातावरण के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का विज्ञान है।

क्रो एण्ड क्रो के अनुसार, 

मनोविज्ञान मानव–व्यवहार और मानव सम्बन्धों का अध्ययन है।

बोरिंग के अनुसार, 

मनोविज्ञान मानव प्रकृति का अध्ययन है।

स्किनर के अनुसार, 

मनोविज्ञान, व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है।

मन के अनुसार, 

आधुनिक मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है।

गैरिसन व अन्य के अनुसार, 

मनोविज्ञान का सम्बन्ध प्रत्यक्ष मानव – व्यवहार से है।

गार्डनर मर्फी के अनुसार, 

मनोविज्ञान वह विज्ञान है, जो जीवित व्यक्तियों का उनके वातावरण के प्रति अनुक्रियाओं का अध्ययन करता है।

स्टीफन के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षणिक विकास का क्रमिक अध्ययन है।

ब्राउन के अनुसार, 

शिक्षा के द्वारा मानव व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है तथा मानव व्यवहार का अध्ययन ही मनोविज्ञान कहलाता है।

क्रो एण्ड क्रो के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान, व्यक्ति के जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक के अनुभवों का वर्णन तथा व्याख्या करता है।

स्किनर के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान के अन्तर्गत शिक्षा से सम्बन्धित सम्पूर्ण व्यवहार और व्यक्तित्व आ जाता है।

कॉलसनिक के अनुसार, 

मनोविज्ञान के सिद्धान्तों व परिणामों का शिक्षा के क्षेत्र में अनुप्रयोग ही शिक्षा मनोविज्ञान कहलाता है।

सारे व टेलफोर्ड के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान का मुख्य सम्बन्ध सीखने से है। यह मनोविज्ञान का वह अंग है जो शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं की वैज्ञानिक खोज से विशेष रूप से सम्बन्धित है।

किल्फोर्ड के अनुसार, 

बालक के विकास का अध्ययन हमें यह जानने योग्य बनाता है कि क्या पढ़ायें और कैसे पढाये।

स्किनर के अनुसार, 

मानव व्यवहार एवं अनुभव से सम्बंधित निष्कर्षो का शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग शिक्षा मनोविज्ञान कहलाता है।

जे।एम। स्टीफन के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक विकास का क्रमिक अध्ययन है।

ट्रो के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिस्थितियों के मनोविज्ञान पक्षों का अध्ययन है।

बी एन झा के अनुसार, 

शिक्षा की प्रकिया पूर्णतया मनोविज्ञान की कृपा पर निर्भर है।

एस एस चौहान के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिवेश में व्यक्ति के विकास का व्यवस्थित अध्ययन है।

पेस्टोलोजी के अनुसार, 

शिक्षा मनुष्य की क्षमताओं का स्वाभाविक, प्रगतिशील तथा विरोधहीन विकास है।

जॉन डीवी के अनुसार, 

शिक्षा मनुष्य की क्षमताओं का विकास है , जिनकी सहायता से वह अपने वातावरण पर नियंत्रण करता हुआ अपनी संभावित उन्नति को प्राप्त करता है।

जॉन एफ।ट्रेवर्स के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान वह विज्ञान है ,जिसमे छात्र , शिक्षण तथा अध्यापन का क्रमबद्ध अध्ययन किया जाता है।

स्किनर के अनुसार, 

शिक्षा मनोविज्ञान का उद्देश्य शैक्षिक परिस्थति के मूल्य एवं कुशलता में योगदान देना है।

अभिषेक के अनुसार , 

किसी मानव मस्तिष्क में किसी जीव या प्राणी के संदर्भ में आए विचारों का मानव मस्तिष्क द्वारा निकले गए निष्कर्षों को परिभाषित करना मनोविज्ञान कहलाता हैं।

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मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) की शाखाएं – Type of psychology in Hindi


साइकोलॉजी हमारे जीवन में अलग-अलग रूप में काम आती है साइकोलॉजी द्वारा हम काफी सारे कार्यों को कर सकते हैं साइकोलॉजी लगभग लगभग हमारे जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ी हुई होती है साइकोलॉजी की अलग-अलग शाखाएं होती हैं जिनके बारे में नीचे विस्तार पूर्वक दिया गया है।

असामान्य मनोविज्ञान (Abnormal psychology)

यह मनोविज्ञान की एक ऐसी शाखा है जिसमें व्यक्ति के असाधारण व्यवहार, ज्ञान, भावनाओं और विचारों के बारे में अध्ययन किया जाता है असामान्य व्यवहार मतलब ऐसा व्यवहार जो व्यक्ति सामान्य तौर पर ना करता हो और जो व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार काफी आश्चर्यजनक हो।

जीववैज्ञानिक मनोविज्ञान (Biological psychology)

सभी जीवो के बारे में अध्ययन करना कि जीव कैसे जन्म लेता है, कैसे उसका विकास होता है, कैसे क्या-क्या चीजें होती है और इन सभी जीवो के बारे में अध्ययन करना पूरी पृथ्वी पर कितने जीव है ऐसे सभी सवालों  का अध्ययन करना ही जीव वैज्ञानिक मनोविज्ञान है।

नैदानिक मनोविज्ञान (Clinical psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में किसी भी बीमारी या किसी भी समस्या के निदान के बारे में अध्ययन किया जाता है।

संज्ञानात्मक मनोविज्ञान (Cognitive psychology)

इस तरह के मनोविज्ञान में व्यक्ति की भाषा, ज्ञान, स्मृति और समस्या हल करने की मानसिक प्रक्रियाओं आदि का अध्ययन किया जाता है।

सामुदायिक मनोविज्ञान (Community Psychology)

समुदायिक मनोविज्ञान में व्यक्ति के समाज में किस प्रकार के समुदाय हैं, संबंध हैं या व्यक्ति का अपने समुदाय में किस प्रकार का दर्जा है आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है,

तुलनात्मक मनोविज्ञान (Comparative psychology)

इस तरह के मनोविज्ञान में मानव के अतिरिक्त अन्य पशुओं और जीव-जंतुओं के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है और मानव के व्यवहार से तुलना की जाती है।

परामर्श मनोविज्ञान (Counseling psychology)

परामर्श मनोविज्ञान में व्यक्ति के परामर्श देने की प्रक्रिया जीवन के समझने के स्थान पर्यवेक्षण प्रशिक्षण आदि और जीवन में हुए अनुभव आदि का अध्ययन किया जाता है

आलोचनात्मक मनोविज्ञान (Critical psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में व्यक्ति की कमियों आदि की विवेचना करना व्यक्ति की आलोचना करना व्यक्ति की बुराइयां करना, जैसी चीजों और आलोचनाओं का अध्ययन किया जाता है।

विकासात्मक मनोविज्ञान (Developmental psychology)

मनोविज्ञान में मानव और सभी जीव जंतुओं का विकास कैसे हुआ या कोई शिशु किस तरीके से वयस्क होता है आदि और सभी चीजों के विकास के बारे में अध्ययन किया जाता है।

शैक्षिक मनोविज्ञान (Educational psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में व्यक्ति कैसे सीखता है किस तरीके से किसी कार्य को करता है धीरे-धीरे कैसे उस कार्य में कुशलता पाता है किसी भी चीज की शिक्षा कैसे लेता है आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है।

विकासात्मक मनोविज्ञान (Evolutionary psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में मनुष्य के जीवन में हो रहे परिवर्तनों, किसी भी चीज के विकास और निर्माण स्थापना और जन्म से लेकर मृत्यु तक की अवस्था के बारे में अध्ययन किया जाता है।

आपराधिक मनोविज्ञान (Forensic psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में व्यक्ति की अपराधिक भावना व्यक्ति क्या चाहता है क्यों अपराध की तरफ मुड़ जाता है उसके मन में पहली बार अपराध की भावना किस प्रकार आई थी इस तरीके से अपराध से जुड़े तत्वों का अध्ययन किया जाता है।

वैश्विक मनोविज्ञान (Global psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में पूरे विश्व में क्या हो रहा है, विश्व कैसे काम करता है, विश्व की परिस्थिति क्या है आदि सभी विषयों पर अध्ययन किया जाता है

स्वास्थ्य मनोविज्ञान (Health psychology)

स्वास्थ्य मनोविज्ञान में व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़ी सभी विशेषताओं और समस्याओं आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है नई-नई बीमारियों के इलाज खोजे जाते हैं और नई-नई तकनीकों से नए-नए इलाज और इलाज को आसान करने के तरीके बनाए जाते हैं और इन्हीं सभी चीजों का अध्ययन किया जाता है

औद्योगिक एवं संगठनात्मक मनोविज्ञान (Industrial and organizational psychology (I/O)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में उद्योग से जुड़े मुद्दों के बारे में अध्ययन किया जाता है जैसे किसी कारखाने को लगाने में कितना समय लगेगा, कितने टाइम में कितना मुनाफा होगा आदि सभी चीजों का अध्ययन करना ही औद्योगिक एवं संगठनात्मक मनोविज्ञान है।

विधिक मनोविज्ञान (Legal psychology)

सरकार द्वारा कुछ कानून बनाए गए हैं जिनका पालन सभी लोगों को करना होता है जो लोग नियमों का पालन नहीं करते भ्रष्टाचारी कहलाते हैं भ्रष्टाचार और कानूनी नियम तोड़ने वालों के बारे में अध्ययन करना ही विविध मनोविज्ञान कहलाता है।

व्यावसायिक स्वास्थ्य मनोविज्ञान (Occupational health psychology (OHP)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में व्यवसाय और स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ कर उठ रहे मुद्दों और समस्याओं आदि के निवारण के बारे में अध्ययन किया जाता है।

व्यक्तित्व मनोविज्ञान (Personality psychology)

यह मनोविज्ञान की एक शाखा है जिसमें व्यक्ति के व्यक्तित्व आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है, व्यक्ति कैसा है, व्यक्ति की सोच कैसी है और व्यक्ति कैसे काम करता है।

संख्यात्मक मनोविज्ञान (Quantitative psychology)

किसी भी चीज की संज्ञानात्मक पक्ष को देखकर उसके बारे में अध्ययन करना ही संज्ञानात्मक मनोविज्ञान होता है।

मनोमिति (Psychometrics)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में चीजों को किस प्रकार नापना है किस प्रकार तुलना है आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है।

गणितीय मनोविज्ञान (Mathematical psychology)

गणित के बारे में संपूर्ण जानकारी गणित के कौन-कौन से नियम होते हैं, कौन-कौन से सूत्र इस्तेमाल किए जाते हैं आदि सभी के बारे में अध्ययन करना ही गणितीय मनोविज्ञान कहलाता है।

सामाजिक मनोविज्ञान (Social psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में समाज में क्या हो रहा है समाज किस तरीके से काम करता है या समाज किसी धनी व्यक्ति और गरीब व्यक्ति के बीच में किस प्रकार से भेदभाव करता है आदि सभी प्रकार के विषयों पर अध्ययन किया जाता है।

विद्यालयीन मनोविज्ञान (School psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में स्कूल कैसा होना चाहिए स्कूल में क्या-क्या पढ़ाया जाना चाहिए स्कूल का वातावरण कैसा होना चाहिए और अलग-अलग प्रकार के स्कूल से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अध्ययन किया जाता है।

पर्यावरणीय मनोविज्ञान (Environmental psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में हमारे वातावरण से जुड़ी समस्याओं और उनके निवारण आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है जैसे समस्याएं जैसे प्रदूषण भुखमरी और बढ़ती हुई जनसंख्या आदि।

योग मनोविज्ञान (Yoga Psychology)

इस प्रकार के मनोविज्ञान में योगा योगा से जुड़ी अच्छी और बुरी बातें योगा के लाभ योगा के दुष्प्रभाव आदि सभी विषयों के बारे में अध्ययन किया जाता है।

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मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) का इतिहास – History of psychology in Hindi


साइकोलॉजी को एक अलग विषय के रूप में पहचान मिलने से पहले से दर्शनशास्त्र यानी फिलॉसफी के साथ पढ़ाया जाता था पहले साइकोलॉजी को फिलॉसफी का हिस्सा समझकर ही पढ़ाया जाता था भारत में सबसे पहले भारत की कोलकाता यूनिवर्सिटी में फिलॉसफी में साइकोलॉजी को एक विषय के रूप में शामिल किया गया था। इससे पहले तक साइकोलॉजी को फिलॉसफी की ही एक शाखा मानी जाती थी।

1905 में श्री विजेंद्र नाथ झील ने साइकोलॉजि का एक सिलेबस तैयार किया और उसके साथ साथ ही उन्होंने सायकोलॉजी लैब की स्थापना की परंतु किन्ही कारणों से यह कम जानी गई और काफी कम प्रसिद्ध हुई इसके 11 साल बाद 1916 में साइकोलॉजी को फिलॉसफी डिपार्टमेंट से अलग करके एक नए साइकोलॉजी डिपार्टमेंट की शुरुआत की गई यह भारत का पहला साइकोलॉजी डिपार्टमेंट था इस साइकोलॉजी डिपार्टमेंट के अध्यक्ष प्रोफेसर एन।एन। सेनगुप्ता थे जिन्होंने अपनी पढ़ाई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से की थी। प्रोफेसर एन एन  सेनगुप्ता ने Hugo Munsterbery के साथ अपनी पीएचडी कंप्लीट की थी।

Wilhelm Wundt एक जर्मन फिलॉस्फर थे और इन्हें ही साइकोलॉजी का जनक (Father of Psychology) कहा जाता है Girindrasekhar Bose सन उन्नीस सौ 22 में साइकोलॉजी डिपार्टमेंट के अध्यक्ष बने इनका ज्यादातर संपर्क sigmund freud के साथ था। प्रोफ़ेसर बॉस ही पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने साइकोलॉजी में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी उन्होंने Indian psychiatric society की स्थापना की बाद में डॉक्टर बोस ने इंडियन जर्नल ऑफ़ साइकोलॉजी नाम से एक जर्नल भी बनाया था। 1938 में कोलकाता में अप्लाइड साइकोलॉजीकी एक ब्रांच की स्थापना की गई।

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मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) का इस्तेमाल – Uses and importance of psychology in Hindi


साइकोलॉजी का उपयोग हम कई प्रकार से कर सकते हैं और हमारे दैनिक जीवन में भी साइकोलॉजी का उपयोग अलग-अलग प्रकार से होता है साइकोलॉजी का मुख्य उपयोग हम किसी भी व्यक्ति को समझने उसके हाव-भाव को जानने और वह क्या सोच रहा है इस बात को जानने के लिए कर सकते हैं।

कम्युनिकेशन को बेहतर बनाता है (Improves communication)

साइकोलॉजी द्वारा हम कोई व्यक्ति क्या सोच रहा है वह क्या चाहता है इस बात को समझ सकते हैं जिसके कारण हमारा कम्युनिकेशन अच्छा हो सकता है और यह हमें उस व्यक्ति को समझने में भी मदद करता है।

आत्मविश्वास बढ़ाता है (Build self confident)

अगर हम किसी व्यक्ति के बारे में अच्छे से समझ पाएंगे उससे अच्छे से बात कर पाएंगे या फिर साइकोलॉजी द्वारा हम अपने बारे में अपनी पर्सनेलिटी के बारे में समझ पाएंगे और सीख पाएंगे तो इससे हमारा मनोबल बढ़ेगा।

भविष्य बनाने में मदद करता है (Helps to achieve success)

साइकोलॉजी की मदद से आप अपने वर्कर्स अपने सहपाठी और अपने फ्रेंड्स के बारे में अच्छे से समझ सकते हैं अच्छे दोस्त बना सकते हैं जिससे यह आपके भविष्य को बनाने और भविष्य में आप क्या बनना चाहते हैं उस सपने को साकार करने में मदद करता है।

संबंध बनाने में मदद करता है (Improve relationship)

साइकोलॉजी की मदद से हम किसी व्यक्ति के बारे में किसी चीज के बारे में या अपने आसपास किस समाज के बारे में भी बहुत अच्छे से समझ पाएंगे और यह भी बेहतर तरीके से समझ पाएंगे की चीजें किस हिसाब से काम करती है जब हम इन सभी बातों का ध्यान रख पाएंगे इनको समझ पाएंगे तब हम हर किसी व्यक्ति से या हर किसी चीज से एक अच्छा संबंध स्थापित कर पाएंगे।

  • इसके अलावा साइकोलॉजी अलग-अलग प्रकार से हमारे दैनिक जीवन में भी काम में आती है जैसे साइकोलॉजी के द्वारा हम अलग-अलग लोगों से और उनके व्यक्तित्व के बारे में अलग-अलग बातें सीख सकते हैं।
  • साइकोलॉजी के मदद से हम रिसर्च करना भी सीख सकते हैं।
  • इसके अलावा साइकोलॉजी की मदद से अलग-अलग प्रकार की बीमारियां और उनके इलाज के बारे में भी सीखा जा सकता है।

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पर्सनालिटी टेस्ट इन मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) – Personality test in psychology in Hindi


पर्सनैलिटी टेस्ट एक ऐसा टेस्ट है जिसमें हम कुछ क्रियाकलाप करते हैं जिसके द्वारा हम एक अनुमान लगाते हैं कि व्यक्ति की पर्सनालिटी कैसी है व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा है इस प्रक्रिया को ही व्यक्तित्व मापन कहा जाता है।

आमतौर पर व्यक्तित्व मापन की मुख्य रूप से तीन विधियां होती हैं

  • व्यक्तिनिष्ठ (subjective)
  • वस्तुनिष्ठ (objective)
  • प्रक्षेपी (projective)
  • व्यक्तिनिष्ठ (subjective) 

इस विधि के रिजल्ट की का हंड्रेड परसेंट सही होना जरूरी नहीं है क्योंकि इसमें जिस व्यक्ति के बारे में हमें जानना है उसी के बारे में उसी से पूछना पड़ता है और वह अपने बारे में झूठ भी बोल सकता है इसलिए वह विधि हंड्रेड परसेंट सही नहीं होती इसमें रिजल्ट के गलत होने की भी संभावना रहती है। इसमें व्यक्ति के बारे में ज्यादातर इंफॉर्मेशन ऑटो बायोग्राफी केसरी या इंटरव्यू या फिर प्रश्न उत्तर द्वारा ली जाती है।

  • वस्तुनिष्ठ (objective) 
पर्सनैलिटी टेस्ट की यह विधि पक्षपात रहित होती है इसमें व्यक्ति को काफी लंबे समय तक observe किया जाता है उसमें निगरानी रखी जाती है व्यक्ति को नंबर रेटिंग स्केल के आधार पर दिए जाते हैं व्यक्ति ने किस समय में किस प्रकार का बीएफ किया है उसका एनीकडॉटल रिकॉर्ड रखकर उसका इस्तेमाल किया जाता है और अन्य तथ्यों के आधार पर इसकी जांच की जाती है।
  • प्रक्षेपी (projective)
प्रोजेक्ट इव विधि इस यह विधि अन्य दोनों विधियों से काफी अलग होती है इसमें अलग-अलग प्रकार की तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है उदाहरण के लिए आपको एक फोटो दिखाया जाएगा उस फोटो में विशेष रूप से ऐसा कुछ भी नहीं होगा परंतु आपसे पूछा जाएगा आपको इस फोटो को देखकर क्या समझ में आता है और उस आधार पर जो भी आप जवाब देंगे वह आपके अंतर्मन में होगा आपके मन में जैसी भी भावनाएं आ रही हैं वही आप अपने जवाब में प्रकट करेंगे।

कोरोनावायरस के समय लोगों की मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) क्या थी – psychology of people during COVID in Hindi


कोरोनावायरस के समय ज्यादातर लोगों को काफी समस्याएं हुई सभी लोगों को लॉकडाउन कर दिया गया पूरे देश में लोग डाउन कर दिया गया लोग आर्थिक तंगी से गुजरने लगे जो कुछ पढ़े-लिखे लोग थे वह समझ रहे थे कि यह सही है जबकि कुछ जो गरीब तबके के लोग थे।
जिन्हें खाने के लिए भी नहीं मिल रहा था उनका मानना था कि ऐसा कुछ भी नहीं है कोई वायरस है ही नहीं फिर भी सरकार द्वारा उन पर यह रोक लगाई गई है कुछ लोग बहुत ज्यादा टेंशन में थे जबकि कुछ लोग आराम से घर पर रहने का लुफ्त उठा रहे थे जिन लोगों को अपने काम का टेंशन था और घर परिवार का टेंशन था।
उन लोगों को काफी समस्याएं हुई बच्चों को स्कूल बंद होने की वजह से काफी समस्याएं हुई स्वास्थ्य संबंधी विभागों में जितने भी लोग हैं उनको भी काफी समस्याएं हुई काम का काफी स्ट्रेस हुआ जिस वजह से बीमारियां और ज्यादा बड़े लोगों को तनाव की बीमारी बहुत ज्यादा हो गई।

रोल ऑफ़ मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) इन हेल्थ – Role of psychology in health in Hindi


साइकोलॉजी और स्वास्थ्य दोनों आपस में काफी हद तक जुड़े हुए हैं साइकोलॉजी की मदद से हम काफी सारी बीमारियों का पता लगा सकते हैं और काफी सारी दिमाग से संबंधित बीमारियों को ठीक कर सकते हैं।
साइकोलॉजी द्वारा हम यह पता कर सकते हैं कि क्या व्यक्ति सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए किसी को परेशान कर रहा है या सच में उसे कोई बीमारी है साइकोलॉजी की मदद से हम अपने दैनिक जीवन में जुड़े कई कार्यों को आराम से कर सकते हैं।
लोगों के मनोभाव को बहुत आसानी से समझ सकते हैं और स्वास्थ्य में भी इसका काफी लाभ है काफी सारी दिमाग से जुड़ी बीमारियां जिनमें व्यक्ति आत्महत्या करने की कोशिश करता है का इलाज करने में साइकोलॉजी मदद करती है।

निष्कर्ष (Conclusion)


हमने इस आर्टिकल में बताया है कि साइकोलॉजी क्या है, साइकोलॉजी का इस्तेमाल किया है साइकोलॉजी की परिभाषा क्या है, साइकोलॉजी के प्रकार क्या है, साइकोलॉजी हमारे दैनिक जीवन में किस प्रकार जुड़ी हुई है इसके अलावा साइकोलॉजी के इतिहास के बारे में भी हमने जानकारी दी है। 
मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा अगर आपके कोई सवाल जवाब है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपके सवालों का जवाब देने का प्रयास जरूर करेंगे।

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