Thyroid in Hindi | थायराइड के लक्षण, कारण, उपचार, घरेलू उपचार और परहेज इत्यादि

थायराइड की बीमारी महिलाओं में बहुत सामान्य है इसके कारण महिलाओं को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। थायराइड से ग्रस्त व्यक्ति परेशान रहता है और उसे समझ नहीं आता कि थायराइड से बचने के लिए वह क्या करें क्या ना करें।

आज इस आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की थायराइड क्या है, थायराइड की बीमारी क्या है, थायराइड के लक्षण, थायराइड के कारण, थायराइड के घरेलू उपचार, थायराइड कितने प्रकार के होते हैं, थायराइड की बीमारी के लिए योगा, बच्चों में थायराइड की बीमारी इत्यादि 

Table of Contents

थायराइड क्या  है – What is thyroid in hindi

थायराइड हमारे शरीर की एक छोटी ग्रंथि है जो आकार में तितली के समान होती है मतलब बीच में से छोटी और दोनों तरफ से चौड़ी। यह गले के सामने की तरफ होती है और लिपटी हुई होती है। 

हमारे पूरे शरीर में बहुत सारी ग्रंथियां होती हैं जिनमें से कुछ तरल पदार्थ निकलता है, जो शरीर में भिन्न-भिन्न कार्यों को करने में मदद करते हैं। थायराइड एक ग्रंथि है जिसमें से थाइरोइड हार्मोन निकलता है जो शरीर में कुछ महत्वपूर्ण कार्यों को करने में मदद करता है। जैसे इम्यूनिटी को बढ़ाना।

थायराइड की बीमारी क्या है – What is thyroid disease in hindi

थायराइड की बीमारी तब उत्पन्न होती है। जब थायराइड ग्रंथि थायराइड हार्मोन का उत्पादन उचित मात्रा में नहीं करती है।जिसके कारण व्यक्ति के शरीर में थायराइड हार्मोन का असंतुलन हो जाता है और इसका बुरा प्रभाव इम्यूनिटी पर पड़ता है जिसके कारण व्यक्ति को भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

थायराइड की बीमारी के प्रकार – Types of thyroid disease in hindi

मुख्य रूप से थायराइड से होने वाली बीमारियों को 5 भागों में बांटा गया है।

  • हाइपोथाइरॉएडिज्म
  • हाइपरथायरायडिज्म
  • गोइटर
  • थायराइड नोड्यूल
  • थायरॉइड कैंसर

यह भी पढ़ें:- हाई कोलेस्ट्रॉल (High cholesterol): लक्षण, इलाज, प्रकार और अन्य जानकारी

हाइपोथाइरॉएडिज्म क्या है 

जब थायराइड ग्रंथि, थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम मात्रा में करती है जिससे शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी हो जाती है। जिसके कारण व्यक्ति को भिन्न भिन्न प्रकार की समस्याओं  का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को हाइपोथाइरॉएडिज्म कहते हैं। 

थायराइड हार्मोन की कमी से व्यक्ति थका थका महसूस करता है, व्यक्ति को ठंड सेहन करने में समस्या हो सकती है और व्यक्ति का वजन अधिक बढ़ सकता है।

हाइपोथाइरॉएडिज्म के लक्षण

  • थकान महसूस होना
  • ध्यान केंद्रित ना कर पाना
  • रूखी त्वचा
  • कब्ज की समस्या
  • ठंड लगना
  • हाथ पैर और जोड़ों में दर्द होना
  • तनाव
  • पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होना

हाइपोथायरायडिज्म के कारण

  • हाशिमोतो की वजह से सूजन। यह एक प्रकार की ऑटोइम्यून स्थिति है जो थायराइड ग्रंथि में सूजन के कारण उत्पन्न होती है।
  • थायराइड हार्मोन प्रतिरोध 
  • अन्य प्रकार की सूजन जैसे तीव्र थायराइडिटिस और पोस्टपार्टम थायराइड आदि।

हाइपरथायरायडिज्म क्या है

जब हमारे शरीर में थायराइड ग्रंथि, थायराइड हार्मोन का उत्पादन अधिक मात्रा में करने लगती है तब इस स्थिति को हाइपोथाइरॉएडिज्म कहते हैं। 

शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ने के कारण व्यक्ति का शरीर अधिक मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन करता है जिसके कारण व्यक्ति के हृदय के धड़कने की आवृत्ति अधिक हो जाती है जिसकी वजह से व्यक्ति को बहुत अधिक पसीना आ सकता है, व्यक्ति का वजन घट सकता है।

हाइपरथायराडिज्म के लक्षण

  • तेज हृदय गति
  • घबराहट महसूस होना
  • थकान महसूस होना
  • मल त्याग में वृद्धि
  • अधिक पसीना आना
  • ध्यान केंद्रित ना कर पाना
  • वजन कम होना

हाइपरथायराडिज्म बीमारी के कारण

  • ग्रेव्स डिजीज
  • खाद्य सामग्री में आयोडीन की अधिक मात्रा लेना (आयोडीन की अत्यधिक खपत)
  • जहरीले multinodular goiter

गोइटर

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्लैंड अपने निर्धारित आकार से बड़ी हो जाती है। यह बीमारी हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म के साथ होती है।

गोइटर के लक्षण 

  • ऐडम्स ऐप्पल (कंठमणि) के नीचे सूजन
  • थका-थका महसूस करना 
  • भारी आवाज हो जाना
  • गले में खराश होना
  • गर्दन में सूजन
  • कुछ दुर्लभ लक्षण जैसे
  • सांस लेने में दिक्कत
  • खांसी

गोइटर के कारण

  • गोइटर वंशानुगत होता है मतलब कि परिवार में किसी को यह बीमारी है तो संन्तान को भी यह बीमारी हो सकती है।
  • मुख्य रूप से यह बीमारी तब होती है जब थायराइड ग्रन्थि, थायराइड हार्मोन का उत्पादन संतुलित मात्रा में नहीं करती है।
  • गोइटर बीमारी आयोडीन की कमी से भी होती है मतलब की लोग खाने में आयोडीन युक्त खाने का उपयोग कम करते हैं जिससे यह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।

थायराइड नोड्यूल

थायराइड ग्रंथि के अंदर कोशिकाओं द्वारा असामान्य रूप से गांठ का विकास होना, इसे थायराइड नोड्यूल कहा जाता है। 

थायराइड नोड्यूल होने के बाद कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है परंतु ऐसा सिर्फ 5% मामलों में ही होता है।

थायराइड नोड्यूल्स उन लोगों में अधिक विकसित होता है जिनके परिवार में पहले से लोगों को थायराइड नोड्यूल्स की समस्या हो अर्थात वंशानुगत

थायराइड नोड्यूल्स होने के लक्षण

  • चिड़चिड़ापन या घबराहट होना
  • मांसपेशियों में कमजोरी 
  • झटके महसूस होना
  • मासिक धर्म का मिस होना या हल्की होना
  • वजन घटना
  • अनिद्रा की समस्या
  • आंखो में जलन 

थायराइड‌ का कारण

थायराइड हार्मोन की मात्रा अधिक होने के कारण होता है वैसे इसका कोई प्रमाणित साक्ष्य नहीं है।

थायराइड कैंसर

थायराइड कैंसर का विकास तब होता है जब कोशिकाएं परिवर्तित होती हैं और बढ़ती रहती हैं। 

थायराइड में असाधारण रूप से कोशिकाओं की बढ़ोतरी के कारण अत्याधिक कोशिकाएं ट्यूमर का विकास करती हैं‌। थायराइड कैंसर थायराइड की बीमारी का सबसे ज्यादा भयंकर रूपों में से एक रूप है।

थायराइड कैंसर के प्रकार

  • पैपिलरी थायराइड कैंसर
  • कूपिक थायराइड कैंसर
  • मॉड्यूलरी कैंसर
  • एनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर

थायराइड कैंसर के लक्षण

  • गर्दन और गले में दर्द
  • गर्दन में गांठ महसूस होना
  • चीजें निगलने में कठिनाई महसूस होना
  • आवाज बदल जाना या बोलने में कठिनाई महसूस होना
  • खांसी

थायराइड की बीमारी की जांच – Diagnosis of thyroid disease in hindi

थायराइड की बीमारी की जांच दो प्रकार से की जाती है। पहला, व्यक्ति को होने वाले लक्षणों के आधार पर।‌ जैसे सूखी त्वचा, वजन घटना या बढ़ना, ‌तेज थकान महसूस होना आदि और दूसरा ब्लड टैस्ट से, ब्लड टैस्ट में टी एस एच औ(TSH) थायराइड हार्मोन, थायरोक्सिन की जांच की जाती है शरीर में थायरोक्सिन हार्मोन का निम्न स्तर और (TSH) हार्मोन का उच्च स्तर होने पर व्यक्ति में थायराइड की बीमारी की पुष्टि की जाती है।

थायराइड की बीमारी का इलाज – Treatment of thyroid disease 

थायराइड की बीमारी का मान्यता प्राप्त इलाज, प्रतिदिन सिंथेटिक थायराइड हार्मोन का उपयोग है यह मौखिक दवा है।इसके सेवन से हाइपोथाइरॉएडिज्म में होने वाले संकेतों और लक्षणों पर नियंत्रण होता है और यह शरीर में थायराइड हार्मोन के स्तर को पुनर्स्थापित करता है।

थायराइड के उपचार करने के बाद व्यक्ती को जल्द ही अच्छा महसूस होने लगता है साथ ही यह दवा धीरे-धीरे कोलेस्ट्रोल के स्तर को भी कम करती है और व्यक्ति का बढ़ा हुआ वजन सामान्य हो जाता है। लेवोथायराक्साईन की दवाई व्यक्ति को जिंदगी भर खानी पढ़ती है परंतु डॉक्टर की सलाह से दवाई की सही खुराक लेना जरूरी होता है।

थायराइड की बीमारी के लिए योगा – Yoga for thyroid

थायराइड की बीमारी के लिए ज्यादातर लोग दवाइयों का सेवन करते हैं और व्यक्ति को जिंदगी भर थायराइड की दवाइयां खानी पड़ती हैं लेकिन नियमित रूप से योगा करने से थायराइड की बीमारी में राहत मिलती है।

नियमित रूप से योगा करने से शरीर का रक्त चाप संतुलन में रहता है और हलासन जैसे कुछ आसन हाइपोथाइरॉएडिज्म बीमारी में काफी लाभदायक होते हैं। योगा करने से थायराइड की बीमारी के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों में भी लाभ मिलता है और व्यक्ति स्वस्थ जीवन जीता है।

थायराइड की बीमारी के लिए कुछ प्रमुख योगासन

  1. हलासन
  2. सर्वांगासन
  3. उत्तिष्ठ आसन
  4. सेतुबंध आसन

थायराइड के दौरान खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ – Best foods to help your thyroid in Hindi

थायराइड के दौरान खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ

आजकल थायराइड की समस्या पूरे विश्व में बहुत कॉमन है इसलिए यदि आपको थायराइड की समस्या है तो आप अपने खाद्य सामग्री में इन सभी खाद्य सामग्रियों को शामिल करें क्योंकि यह सभी खाद्य सामग्रियां थायराइड की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती हैं।

चिकन

चिकन में भरपूर मात्रा में जिंक होता है जो आपके थायराइड को पोषण देता है। आहार में जिंक की कमी से हाइपोथाइरॉएडिज्म बीमारी होती है इसलिए हफ्ते में कम से कम एक बार चिकन का सेवन जरूर करें।

सेब

सेब फाइबर से भरपूर होते हैं जो हैवी से हैवी खाद्य सामग्री को पचाने में मदद करते हैं थायराइड से ग्रस्त व्यक्ति को खाना पचाने में समस्या होती है।

चिया के बीज

छोटे-छोटे चिया के बीजों में अधिक मात्रा में खनिज पदार्थ होते हैं विशेषकर मैग्नीशियम जो थायराइड हार्मोन के लेवल कंट्रोल में रखता है।

कद्दू के बीज

कद्दू के बीजों में भी जिंक और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होते हैं इसलिए हफ्ते में चार से पांच बार एक मुट्ठी कद्दू के बीजों को जरूर खाना चाहिए।

पालक

पालक में खनिज मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होते हैं जो शरीर में थायराइड हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है साथ ही तनाव दूर करता है शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने से थायराइड की समस्या हो सकती है जैसे हाइपोथाइरॉएडिज्म।

दूध और दूध से बने उत्पाद

दूध और दूध से बने उत्पाद का सेवन करने से थायराइड की समस्या में राहत मिलती है और थायराइड से होने वाले लक्षणों में भी सुधार आता है।

थायराइड की बीमारी में इन पदार्थों का सेवन ना करें – Foods to Avoid with Thyroid in Hindi

थायराइड से ग्रस्त व्यक्ति को अपने खान-पान पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि कभी-कभी कुछ चीजें खाने से व्यक्ति की थायराइड की दिक्कत बढ़ सकती है इसलिए व्यक्ति को इन सभी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जैसे

  1. अधिक मिर्च मसाले वाले खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  2. तेरे हुए खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।
  3. चीनी चाय कॉफी शराब आदि का सेवन कम करना चाहिए।
  4. सॉफ्ट ड्रिंक पैन केक का सेवन कम करना चाहिए।
  5. ब्रोकली पत्ता गोभी बंद गोभी शलगम नहीं खाने चाहिए।
  • फूलगोभी
  • शकरकंदी
  • मूंगफली
  • पत्ता गोभी

बच्चों में थायराइड की बीमारी – Thyroid in kids in hindi

आजकल बच्चों में भी थायराइड की बीमारी बहुत ज्यादा कॉमन हो गई है बच्चों में थायराइड की बीमारी होने का मुख्य कारण वंशानुगत होता है मतलब कि अगर माता-पिता या दादा-दादी में से किसी को भी थायराइड की बीमारी है तो बच्चे को भी थायराइड की बीमारी होने की पूरी संभावना है। 

ग्रेव्स रोग या हाशिमोटो जैसी बीमारी आमतौर पर बच्चों में यौवन के आरंभ में दिखाई देती हैं यह बीमारियां लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में ज्यादा समानतय पाई जाती है।

थायराइड बीमारी की वजह से कई अन्य बीमारियां

थायराइड की बीमारी का बुरा असर व्यक्ति के पूरे जीवन पर पड़ता है और इस बीमारी की वजह से कई अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं जैसे कि

हृदय संबंधी रोग

थायराइड से ग्रस्त व्यक्ति को हृदय संबंधी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है जैसे कि हार्ट अटैक।

बांझपन

कई महिलाओं में देखा गया है कि जिन महिलाओं को थायराइड की समस्या होती है उनको बच्चा पैदा करने में समस्याएं होती हैं और बांझपन की शिकायत हो सकती है।

जन्मजात समस्याएं

कई मामलों में देखा गया है कि जिन महिलाओं को थायराइड है उनके बच्चों में भी थायराइड की समस्या होती है या अन्य बीमारियां होती हैं।

मोटापा

थायराइड की बीमारी का सबसे बड़ा और कॉमन दुष्प्रभाव यह है कि व्यक्ति का वजन अचानक से बढ़ने लगता है और व्यक्ति के शरीर का आकार बिगड़ जाता है

निष्कर्ष

हमने इस आर्टिकल में थायराइड के बारे में बताया है की थायराइड क्या है, थायराइड की बीमारी क्या है, थायराइड के लक्षण, थायराइड के कारण, थायराइड के घरेलू उपचार, थायराइड कितने प्रकार के होते हैं, थायराइड की बीमारी के लिए योगा, बच्चों में थायराइड की बीमारी इत्यादि इन सभी विषयों पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी है।

मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा अगर आपके कोई सवाल या सुझाव हैं तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपके सवालों का जवाब देने का प्रयास जरूर करेंगे।

प्रश्न और उत्तर

थायराइड कैसे ठीक होगा?

थायराइड का ऐसा कोई इलाज अभी तक उपलब्ध नहीं है जो इसे जड़ से खत्म करे अर्थात थायराइड ऐसी बीमारी है जिस पर कंट्रोल किया जा सकता है परंतु उसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता थायराइड की गोलियां व्यक्ति को जिंदगी भर तक खानी पड़ सकती हैं।

थायराइड बढ़ने से क्या होगा

शरीर में थायराइड हार्मोन की मात्रा बढ़ने से थायराइड की बीमारी हो जाती है और मुख्य रूप से यह दो प्रकार की होती हैं।

थायराइड बढ़ने से व्यक्ति को भिन्न भिन्न प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं जैसे कि व्यक्ति की त्वचा रूखी हो सकती है, व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है और कई गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं जैसे कि हार्ट अटैक इनफर्टिलिटी आदि।

क्या थायराइड की बीमारी में केला खाना ठीक है?

हां थायराइड की बीमारी में केला खाना बिल्कुल सही है क्योंकि इससे थायराइड में राहत मिलती है।

थायराइड में किस प्रकार का भोजन नहीं करना चाहिए?

थायराइड की बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को गोभी, मूली के पत्ते और सरसों के पत्ते आदि का सेवन नहीं करना चाहिए इन से थायराइड में दिक्कत होती है।

शरीर में थायराइड के असंतुलन से क्या होता है?

शरीर में थायराइड के असंतुलन से भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं क्योंकि थायराइड का सीधा संबंध हमारे इम्यून सिस्टम से होता है जो हमारे शरीर कि हर बीमारी के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

महिलाओं में थायराइड के क्या लक्षण है?

महिलाओं में थायराइड के लक्षण है सर्दी लगना कमजोरी महसूस करना थका थका महसूस करना अनिद्रा मोटापा पतलापन रूखी त्वचा आदि।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में थायराइड की शिकायत ज्यादा क्यों होती है?

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में थायराइड की शिकायत इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि महिलाओं में आयोडीन की कमी होने की संभावना अधिक होती है और आयोडीन की कमी से थायराइड रोग होता है।

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