गर्भवास्था (Pregnancy) के बारे में जानकारी

Pregnancy के बारे में सुनते ही पूरे घर में खुशी की लहर दौड़ जाती है क्योंकि घर में एक नया मेहमान आने वाला है परंतु प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है और इन सभी समस्याओं से बचने के लिए  गर्भवती महिला को हर कोई अपनी-अपनी राय देता है।
 
इस सब में गर्भवती महिला को समझ में नहीं आता कि कौन सी राय सही है कौन सी गलत, और उसके मन में यह सब प्रश्न घूमते रहते हैं कि pregnancy के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या करना चाहिए जो मां और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो इसलिए इस आर्टिकल में आज हम पढ़ेंगे pregnancy के बारे में की pregnancy क्या हैpregnancy के लक्षण, गर्भधारण के लिए सबसे उचित समय क्या है, pregnancy के दौरान क्या-क्या समस्याऐ आ सकती हैं उनके इलाज और काफी कुछ।

Table of Contents

गर्भावस्था (Pregnancy) क्या है- What is pregnancy in Hindi

Pregnancy एक ऐसी अवस्था को कहते हैं जो तब होती है जब एक महिला और पुरुष आपस में संभोग करते हैं। संभोग के दौरान पुरुष का स्पर्म महिला के गर्भ में स्थापित हो जाता है और जब ऐसा होता है तब धीरे धीरे यह  स्पर्म विकसित होने लगता है और एक निश्चित अवधि के बाद एक संपूर्ण शिशु के रूप में विकसित हो जाता है इस पूरी प्रक्रिया को संपन्न होने में अर्थात शिशु का जन्म होने में लगभग 9 महीने लगते हैं इस अवस्था को गर्भावस्था या pregnancy कहते हैं।
 
 

गर्भावस्था (Pregnancy) के लक्षण-Symptoms of pregnancy in Hindi

गर्भवास्था (Pregnancy) के बारे में जानकारी

Pregnancy में महिलाओं के शरीर में काफी कुछ बदलाव होते हैं जैसे कि हार्मोन में बदलाव जिसके कारण उन्हें भिन्न-भिन्न लक्षण महसूस होते हैं जैसे

मासिक धर्म रुक जाना

मासिक धर्म रुक जाना प्रेगनेंसी का पहला लक्षण होता है परंतु ऐसा नहीं है कि आपका मासिक धर्म रुक गया है तो आप प्रेग्नेंट हो गए हो खासकर तब जब आपका मासिक धर्म अनियमित हो।

सर दर्द

गर्भावस्था की शुरुआत में सर में दर्द होना एक साधारण सी बात होती है क्योंकि हमारे शरीर मे हार्मोन कि गड़बड़ी हो जाती है जिसके कारण शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और सर दर्द होता है परंतु अगर महिला को ज्यादा सर दर्द हो रहा है तो उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

शरीर का वजन बढ़ना

गर्भावस्था के पहले कुछ महीनों में शरीर का वजन बढ़ता है।

उच्च रक्तचाप

कभी-कभी pregnancy में महिलाओं को उच्च रक्तचाप की समस्या हो जाती है इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे 
  • अधिक वजन या मोटापा 
  • धूम्रपान या शराब का सेवन
  • फैमिली हिस्ट्री।

पेट में जलन

Pregnancy के दौरान शरीर के हार्मोन में बदलाव के कारण पेट में जलन हो सकती है और एसिडिटी की समस्या हो भी सकती है।

कब्ज की समस्या

अक्सर देखा गया है कि pregnancy के दौरान महिलाओं को कब्ज की समस्या आमतौर पर हो जाती है क्योंकि हार्मोन के बदलाव के कारण शरीर का पाचन तंत्र धीमा हो जाता है।

पेट में ऐठन

जैसे-जैसे शिशु बढ़ता है वैसे वैसे गर्भाशय की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है इसके कारण पेट में ऐठन महसूस हो सकती है जो मासिक धर्म में होने वाली ऐठन जैसी ही होती है।

Pregnancy के दौरान होने वाले कुछ अन्य लक्षण जैसे

  • पीठ में दर्द
  • दस्त
  • कूल्हे में दर्द होना
  • उल्टी आना
  • अधिक पेशाब लगना 
  • जी मचलाना 
  • ज्यादा भूख लगना 
  • मूड स्विंग 
  • पेट में गैस बनना
  • थका थका महसूस करना 
  • छाती में दर्द होना 
  • स्तनो का सूज जाना
  • अनिद्रा 
  • डिप्रेशन 
  • खून की कमी 
  • पीठ दर्द 
  • मुहासे

गर्भावस्था (Pregnancy) से बचने के उपाय- How to avoid pregnancy in Hindi

गर्भवास्था (Pregnancy) के बारे में जानकारी

जिन महिला या पुरुषों को संभोग करने के उपरांत बच्चा नहीं चाहिए या जो महिलाएं संभोग के बाद गर्भवती नहीं होना चाहती वें निम्नलिखित तरीकों का उपयोग कर सकती हैं ताकि प्रेगनेंसी ना हो। 
 

गर्भनिरोधक गोलियां

सभी गर्भनिरोधक गोलियां 99% तक काम करती हैं साथ ही यह गोलियां संभोग करने के कुछ तय समय तक ही खा सकते हैं उसके बाद खाने से इनका कोई फायदा नहीं होता है।
 

कंडोम 

कंडोम एक ऐसा साधन है जिसे संभोग के समय पुरुष अपने लिंग पर पहनता है और इसके द्वारा पुरुष का स्पर्म महिला की योनि में नहीं जा पाता है यह काफी कारगर तरीका होता है परंतु इसमें दिक्कतें आ सकती हैं जैसे कंडोम का फट जाना।

Copper-t 

इसका उपयोग महिलाओं द्वारा किया जाता है और इससे प्रेगनेंसी होने के संभावना बहुत कम हो जाती है यह लंबे समय के लिए उपलब्ध होती है और कम समय के लिए भी।
 

गर्भावस्था (Pregnancy) से बचने के प्राकृतिक उपाय

Pregnancy से बचने के कुछ प्राकृतिक उपाय हैं जैसे कि

 

  1. सुरक्षित अवधि में संभोग करना यानी महावारी के पहले 8 दिन और 20 दिन के बाद संभोग करने से प्रेगनेंसी होने की संभावना बहुत ज्यादा कम हो जाती है।
  2. दूसरा तरीका यह है कि जिसमें महिला और पुरुष संभोग करते हैं और संभोग के दौरान जब स्पर्म निकलने वाला होता है तब पुरुष अपने लिंग को योनि से बाहर निकाल कर डिस्चार्ज करता है अर्थात स्पर्म योनि में नहीं जाता इससे प्रेगनेंसी नहीं होती है।

लेकिन यह सभी तरीके 100 % कारगर नहीं हैं इसलिए कंडोम Copper-t और दवाइयों का सहारा लेना ज्यादा अच्छा होता है

गर्भावस्था (Pregnancy) में खाया जाने वाला खाना- Food to eat during pregnancy in Hindi

गर्भवास्था (Pregnancy) के बारे में जानकारी
 
गर्भावस्था में महिला के शरीर में एक और शरीर बढ़ रहा होता है जिसके कारण महिलाओं को अधिक पोषक तत्व और ताकत की जरूरत होती है जो सिर्फ अच्छी खानपान के द्वारा ही ली जा सकती है इसलिए गर्भावस्था में महिलाओं के खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए खाने में उचित मात्रा में निम्नलिखित चीजें होनी चाहिऐ।
  • कोंप्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स
  • प्रोटीन
  • सब्जियां और फल
  • अनाज और फलियां
  • स्वास्थ्य वसा
 
प्रेगनेंसी के दौरान खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है क्योंकि Pregnancy में शरीर को उचित मात्रा में पोषक तत्व जैसे प्रोटीन विटामिन और आयरन की आवश्यकता होती है जिसकी पूर्ति खाने द्वारा ही की जाती है।
 

ब्रोकली

ब्रोकली में उचित मात्रा में कैल्शियम और follett होते हैं जो एक स्वस्थ Pregnancy के लिए आवश्यक होते हैं।
 

दूध

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को उचित मात्रा में कैल्शियम की आवश्यकता होती है जिसकी पूर्ति के लिए दूध का सेवन करना चाहिए क्योंकि दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है।
 

केले

केले में भरपूर मात्रा में पोटैशियम होता है जो स्वस्थ Pregnancy के लिए आवश्यक होता है।
 

नारियल पानी

नारियल पानी में उचित पोषक तत्व होते हैं जो हमारे शरीर को पोषण देते हैं साथ ही हमारे शरीर के पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं।
 

अंडे

अंडों में उचित मात्रा में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और बच्चे के लिए आवश्यक होता है पर ध्यान दे कि अंडों को अच्छे से पकाया जाए।
 

ओटमील

ओटमील में पोषक तत्व होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं साथ ही ओटमील हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को संतुलन में रखता है।
 

पालक

पालक में उचित मात्रा में आयरन होता है जिससे कई प्रकार की जन्मजात बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है साथ ही पालक हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी होती है।
 

संतरा और संतरे का जूस

संतरे में उचित मात्रा में विटामिन C और फाइबर होते हैं। Pregnancy के दौरान संतरे का सेवन करना बहुत लाभदायक होता है।
 

अखरोट 

अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड और आयरन होता है जो आंख और दिमाग के विकास के लिए आवश्यक होता है और साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान अखरोट का सेवन करना बहुत अच्छा माना जाता है
 

ऑलिव ऑयल

खाने में ऑलिव ऑयल का प्रयोग करें इसमें उचित मात्रा में विटामिन ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन E होते हैं जिनका सेवन Pregnancy के दौरान काफी लाभदायक होता है
 

मुनक्का

प्रेगनेंसी के दौरान मुनक्के का सेवन करना बहुत अच्छा माना जाता है मुनक्के में विटामिन ए फाइबर और विटामिन के होता है जिसका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान लाभदायक होता है मुनक्का का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान कॉन्स्टिपेशन की समस्या नहीं होती है।
 

शकरकंद

प्रेगनेंसी के दौरान शकरकंद खाना बहुत लाभदायक माना जाता है क्योंकि शकरकंद में विटामिन और पोषक तत्व उचित मात्रा में होते हैं और शकरकंद खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता हैै जिसके कारण गैस नहीं बनती और स्वास्थ्य ठीक रहता है।
 

गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान होने वाली समस्याएं- Problems during pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में हमारे शरीर में काफी सारे बदलाव होते हैं जिससे हमारे शरीर पर बुरा और अच्छा प्रभाव दोनों पड़ते हैं साथी कई दिक्कतें और परेशानियां हो सकती हैं जैसे चिड़चिड़ापन उल्टी दस्त आदि यहां तक की Pregnancy के दौरान कई महिलाओं को डिप्रेशन भी हो जाता है।
 

तनाव 

प्रेगनेंसी एक खुशी की बात है परंतु इसकी वजह से डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जिसके कारण तनाव और डिप्रेशन की समस्या भी हो सकती है।
 

दस्त

गर्भावस्था के दौरान डायरिया और अपच जैसी समस्याएं बहुत आम बात होती हैं क्योंकि शरीर में बड़े बड़े बदलाव होते हैं जैसे हार्मोन परिवर्तन जिसके कारण दस्त और डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
 

कूल्हे का दर्द

आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पीछे की तरफ यानी कूल्हों में काफी दर्द महसूस होता है जो कई कारणों से हो सकता है जैसे Pregnancy के दौरान बैठने और  खड़े होने के तरीके के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
 

उल्टी आना

Pregnancy के दौरान उल्टी आना तो एक बहुत ही ज्यादा कॉमन समस्या है और यह आमतौर पर 4 महीने तक होती है उल्टी होना साधारण है परंतु ज्यादा उल्टी होने से कई दिक्कतें हो सकती हैं इसलिए ज्यादा उल्टियां होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
 

स्तनों में बदलाव

Pregnancy के दौरान स्तनों में बदलाव आता है स्तन कोमल या सूजे हुए से लग सकते हैं जिसका कारण हार्मोन में बदलाव होता है साथ ही स्तनों के निप्पल भी बड़े संवेदनशील हो जाते हैं हुए से लगते।
 

अनिद्रा

Pregnancy के दौरान महिलाओं को अनिद्रा की समस्या का सामना करना पड़ता है जिसके कारण महिलाओं को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जैसे थकान तनाव और पाचन तंत्र में गड़बड़ी आदि
 

खून की कमी

गर्भवती महिलाओं में गर्भावस्था के कारण खून की कमी होने की समस्या बहुत बढ़ जाती है जिसके कारण महिलाओं को हल्का पन महसूस हो सकता है या चक्कर आ सकते हैं साथ ही महिलाओं को शारीरिक रूप से भी दिक्कतें हो सकती हैं।
 

गर्भावस्था के दौरान होने वाली कई अन्य समस्याएं जैसे

  • गर्भवती महिलाओं में कब्ज की समस्या बहुत ज्यादा कॉमन हो जाती है।
  • पेट में ऐठन होना महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पेट में ऐठन सनसनी और सुन आहट महसूस हो सकती है।
  • पीठ और कमर का दर्द, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पेट और कमर में दर्द महसूस हो सकता है।

गर्भावस्था (Pregnancy) में होने वाली समस्याओं से बचाव- Problems to avoid during pregnancy in Hindi

 
प्रेगनेंसी के दौरान सभी महिलाओं को अत्यधिक पीड़ा और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है साथ ही यह सभी कठिनाइया कष्ट देती हैं परंतु इनका गर्भावस्था में आमतौर पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ता है।
 
हालांकि ज्यादातर कठिनाइयां हमारी जीवन शैली और हमारे खान-पान पर निर्भर करते हैं अगर हम अपने खान-पान और जीवनशैली पर नियंत्रण रखें तो हमें कम कठिनाइयां का सामना करना पड़ेगा।
 

गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

Pregnancy के दौरान निम्नलिखित चीजों को करने से गर्भवती महिला का स्वास्थ्य ठीक रहेगा और बच्चा भी स्वस्थ्य होगा
 

नियमित रूप से मल्टीविटामिन लेना

गर्भावस्था के दौरान हमारे शरीर में कई विटामिंस और मिनरल्स की कमी हो जाती है जिसके लिए हमें डॉक्टर की सलाह से मल्टीविटामिन दवाइयों का सेवन करना चाहिए इससे हमारे शरीर में पोषक तत्त्वों की कमियों की पूर्ति होती है।
 

पर्याप्त नींद लेना

गर्भावस्था के दौरान छोटी-मोटी परेशानियों के चलते महिलाएं ढंग से नींद नहीं ले पाती हैं जिसके कारण यह सभी परेशानियां काफी हद तक बढ़ जाती हैं इसलिए गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए क्योंकि अगर महिलाएं पर्याप्त नींद नहीं लेंगी तो उनके स्वास्थ्य पर इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा साथ ही कब्ज और एसिडिटी की प्रॉब्लम जो महिलाओं में गर्भावस्था के समय सबसे अधिक होती है उससे भी राहत मिलती है
 

सुरक्षित सेक्स करना

गर्भावस्था के दौरान हमें सुरक्षित सेक्स करना चाहिए सुरक्षित सेक्स से तात्पर्य है कि सेक्स बहुत ज्यादा कठोर ना हो जिससे महिलाओं को तकलीफ ना हो और उनके बच्चे पर कोई दुष्प्रभाव ना पड़े खासकर पांचवे महीने से लेकर डिलीवरी होने तक।
 

हल्की-फुल्की चहल कदमी करना

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को बहुत ज्यादा एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए और ना ही बहुत ज्यादा आराम करना चाहिए हल्की-फुल्की चहल कदमी करते रहने से स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है और अपच, कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
 

दवाइयां

गर्भावस्था में कौन सी दवाई लें यह निर्धारित करना साथ ही अगर दवाई का साइड इफेक्ट हो गया तो यह बच्चे के लिए काफी नुकसानदाई हो सकता है इसलिए कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेना हानिकारक हो सकता है यहां तक कि आपकी बच्चे की जान का खतरा भी हो सकता है।
 

गर्भावस्था के दौरान इन सब चीजों से बचें।

धूम्रपान

धूम्रपान करना हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है खासकर गर्भावस्था में धूम्रपान करना मतलब आप अपने शिशु को सिगरेट पिला रहे हैं।
 
pregnancy में धूम्रपान करने से शिशु के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है साथ ही शिशु को जन्मजात कई बीमारियां हो सकती हैं।
 

शराब 

शराब पीना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक होता ही है साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए शराब पीना बहुत ज्यादा नुकसानदेह होता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को शराब और धूम्रपान दोनों से परहेज करना चाहिए।
 

कच्ची चीजें खाने से बचें

कच्ची चीजें जैसे कच्चे मांस क्रीम डेयरी उत्पाद आदि को कच्चा खाने से बचें क्योंकि ऐसी चीजें खाने से पेट खराब हो सकता है इसका मुख्य कारण यह है कि गर्भावस्था के दौरान हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। जिसके कारण कोई भी चीज पचाने में असमर्थता हो जाती है।
 
जब आप कच्ची चीजों का सेवन करते हैं उनके पचने में दिक्कत आती है जिसके कारण गैस अपच और कब्ज की समस्या हो जाती है।
 

मोटापा

Pregnancy के दौरान शरीर का ध्यान रखें और शरीर का वजन बिल्कुल भी ना बढ़ने दे इसका दुष्प्रभाव होने वाले बच्चे पर पड़ सकता है साथ ही मोटापे के कारण कई बीमारियां हो सकती हैं और बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है।
 

आईवीएफ के द्वारा गर्भधारण/ टैस्ट ट्यूब बेबी

आई वी एफ एक प्रक्रिया है जिसे टैस्ट ट्यूब बेबी भी कहा जाता है इसमें भ्रूण को महिला के गर्भ में स्थापित किया जाता है यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें संभोग की आवश्यकता नहीं होती है।
 
आईवीएफ एक काफी कारगर प्रक्रिया है इस प्रक्रिया का उपयोग वो लोग ज्यादा करते हैं जिन्हें संतान होने में दिक्कत होती है या वे संतान हीन होते हैं उदाहरण के लिए किसी दंपत्ति में बच्चा करने की क्षमता नहीं है तो वह टैस्ट ट्यूब बेबी के द्वारा बच्चा कर सकती है।
 

गर्भावस्था (Pregnancy) के लिए सही समय क्या है – What is the right time for pregnancy in Hindi

 
हर महीने स्त्री के शरीर में एक स्त्री बीज तैयार होता है अंडाशय में आम तौर पर अगर 28 दिन का मासिक चक्र होता है तो वह अंडा 14 से 15 दिनों में फुटकर ओवम रिलीज करता है।
 
जिस समय स्त्री का ओवुलेशन होता है उस समय पुरुष और स्त्री के संभोग करने से गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है।
 
Pregnancy का सबसे बेहतर समय होता है जिस दिन ओवुलेशन होता है उस से 5 दिन या 6 दिन पहले और उसके 5 या 6 दिन बाद तक का समय गर्भधारण करने के लिए सबसे अच्छा होता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्पर्म योनि में 5 दिनों तक जीवित रह सकता है।
 
मतलब आसान भाषा में जिस दिन पीरियड्स होते हैं पीरियड्स होने वाले दिन से 5 दिन या 6 दिन पहले से 5 या 6 दिन बाद तक अर्थात महीने में आठवें नौवें दिन से लेकर 20 वें दिन के दौरान संभोग करने से गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है।
 

निष्कर्ष

हमारे आर्टिकल में pregnancy के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है मैं आशा करता हूं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और अगर आपको हमारे साथ आर्टिकल में कोई समस्या दिखती है या फिर आकर आप कुछ पूछना चाहते हैं तो आप हमें नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं, धन्यवाद।
 

गर्भावस्था के दूसरे सप्ताह के लक्षण क्या होते है?

गर्भावस्था के दूसरे सप्ताह में गर्भवती महिलाओं को थकान और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं साथ ही हाथ पैरों में सूजन और पेट में ऐठन भी महसूस हो सकती है लेकिन इन सभी लक्षणों के द्वारा यह बताना मुश्किल होता है कि महिला प्रेग्नेंट है या नहीं।

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या है?

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण हैं जैसे पीरियड मिस हो जाना या थका थका महसूस करना रक्तस्राव या ऐठन सिर दर्द होना कब्ज हो जाना अगर आपको ऐसे सभी सिम्टम्स हो रहे हैं तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप गर्भवती हैं इसका मतलब यह है कि आप गर्भवती हो सकती हैं इसको कंफर्म करने के लिए आप प्रेगान्यूज़ किट का सहारा ले सकती हैं।

प्रेगनेंसी क्या है?

प्रेगनेंसी या गर्भावस्था एक ऐसी स्थिति को कहते हैं जिसमें महिला के गर्भाशय में भ्रूण स्थापित होता है जो वहीं पर 9 महीने तक विकसित होता है और 9 महीने के बाद वह योनि मार्ग द्वारा बाहर निकल आता है और वह पूर्ण विकसित होकर बच्चा बन जाता है यानी यह एक प्रजनन प्रक्रिया का हिस्सा है

गर्भवती होने पर पेट में कैसा महसूस होता है?

गर्भवती होने पर पेट में सूजन आ सकती है पेट में दर्द हो सकता है साथ ही महिला को पेट में हल्का पर भी महसूस हो सकता है यह एक संकेत होते हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि आप गर्भवती हैं।

गर्भावस्था में क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

गर्भावस्था में महिलाओं को भारी काम नहीं करना चाहिए।कच्ची सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए कुछ भी खाएं तो सोच समझ कर खाएं खाने में पोषक तत्व जरूर होने चाहिए हल्की-फुल्की चहल कदमी जरूर करनी चाहिए इससे गैस की समस्या कम होती है धूम्रपान बीड़ी पान तमाखू इन सभी से दूर रहना चाहिए क्योंकि यह बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं।

गर्भावस्था (Pregnancy) का पता कैसे लगाएं?

प्रेगनेंसी का पता लगाने के लक्षण, पीरियड में सो जाना सर दर्द होना उल्टी आना बार-बार पेशाब लगना थकान महसूस करना होते हैं। साथ ही प्रेगनेंसी को कंफर्म करने के लिए मार्केट में काफी सारे उपकरण उपलब्ध है जिसके द्वारा आप बिना किसी टेंशन की प्रेगनेंसी को कंफर्म कर सकते हैं।

गर्भावस्था (Pregnancy) के किस महीने में बच्चे की हलचल महसूस होने लगती है?

गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के 16 से 25 महीने में बच्चों की हलचल महसूस होने लगती है खासकर यह उन महिलाओं के लिए बहुत सुखद अनुभव होता है जो पहली बार मां बन रही होती हैं।

क्या गर्भावस्था (Pregnancy) में पीरियड्स होते हैं?

नहीं प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स नहीं आते हैं अगर किसी महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान योनि में से रक्त निकल रहा है इसका मतलब है कि कुछ गड़बड़ है आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए अन्यथा यह समस्या का कारण बन सकता है।

गर्भावस्था में किस तरह का भोजन करना चाहिए?

गर्भावस्था में महिलाओं को पोषण से भरा हुआ भोजन खाना चाहिए जिसमें उचित मात्रा में पोषण हो और ध्यान रखना चाहिए कि बिल्कुल भी कोई कच्चा खाद्य पदार्थ ना खाए कुछ भी खाएं उसे अच्छे से पका कर खाएं अन्यथा महिला की तबीयत पर इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

प्रेग्नेंट होने के कितने दिन बाद लक्षण दिखाई देते हैं?

प्रेग्नेंट होने के बाद प्रेगनेंसी के लक्षण दिखाई देने का कोई निश्चित समय नहीं है क्योंकि यह महिला के शरीर पर निर्भर करता है की प्रेगनेंसी के लक्षण कितने समय बाद दिखाई देंगे प्रेगनेंसी के लक्षण 1 दिन में भी दिखाई दे सकते हैं और कुछ मामलों में तो प्रेगनेंसी के लक्षण 1-2 महीने तक भी नहीं दिखाई देते हैं।

संदर्भ (References):

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Research priorities for preventing unintended pregnancy: Moving beyond emergency contraceptive pills. (n.d.). PubMed Central (PMC). https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4643745/

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