कैंसर (Cancer): लक्षण, कारण, इलाज इत्यादि

कैंसर (Cancer): लक्षण, कारण, इलाज इत्यादि

कैंसर (Cancer): लक्षण, कारण, इलाज इत्यादि

आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण व्यक्ति अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पा रहा है जिसके कारण भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं जिसमें से एक बहुत ही गंभीर बीमारी है जिसका नाम है कैंसर। 

यह एक ऐसी बीमारी है जिसका जल्दी से जल्दी पता लग जाने पर इलाज किया जा सकता है, अगर देरी की जाए तो व्यक्ति को अपनी जान से भी हाथ धोने पड़ते हैं कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की सिट्टी पिट्टी गुल हो जाती है। कैंसर के मरीज को यह समझ नहीं आता कि वह क्या करें क्या ना करें।

इसलिए इस आर्टिकल में आज हम बात करेंगे कि कैंसर क्या है क्यों होता है कैंसर से बचाव क्या है कैंसर के लक्षण, उपाय, कैंसर (Cancer) क्या है कैंसर (Cancer) कैसे होता है ट्यूमर क्या है कैंसर के मुख्य लक्षण कैंसर के प्रकार पित्त की थैली का कैंसर बड़ी आंत का कैंसर प्रोस्टेट कैंसर त्वचा का कैंसर मुंह का कैंसर स्तनों का कैंसर थायराइड कैंसर  और  डॉक्टर को कब दिखाना चाहिएं।  निष्कर्ष और कैंसर से बचने के लिए हम क्या क्या सावधानियां रख सकते हैं।

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कैंसर (Cancer) क्या है - What is cancer

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो शरीर के लगभग हर हिस्से में हो सकती है यह 100 से ज्यादा बीमारियों का एक कलेक्शन है।

हर साल पूरी दुनिया में लगभग 9600000 और भारत में 800000 से ज्यादा लोग कैंसर के कारण मर जाते हैं।

World health organisation (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर है।

कैंसर (Cancer) कैसे होता है - How does cancer works in Hindi

हमारा संपूर्ण शरीर अलग-अलग अंगों से मिलकर बना होता है जैसे लिवर, किडनी, दिल और फेफड़े आदि। हमारे शरीर के सभी अंग छोटी-छोटी कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं और इन कोशिकाओं का अलग-अलग काम होता है यह कोशिकाएं लगातार विभाजित होकर बढ़ती रहती हैं पुरानी और क्षतिग्रस्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और इनकी जगह नई कोशिकाएं आ जाती हैं।

DNA शरीर की कोशिकाओं का सॉफ्टवेयर होता है जो कोशिकाओं को यह बताता है कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। हमारे शरीर में कोशिकाओं का विभाजित होना या ना होना यह सब DNA द्वारा ही तय किया जाता है।

कभी-कभी DNA में गड़बड़ी के कारण खराब कोशिकाओं का भी निर्माण हो जाता है जिसे कैंसर की कोशिका (cancer cell) कहते हैं कैंसर की कोशिकाएं बढ़ती रहती हैं और अपना काम ठीक ढंग से नहीं करती।

हर रोज हमारी रोजमर्रा के जीवन में ऐसी गड़बड़ियां होती रहती हैं जिसके कारण कैंसर की कोशिकाएं बनती रहती हैं।इसलिए कहा जाता है कि साधारण से स्वस्थ शरीर में भी कैंसर की कोशिकाएं होती हैं।

लेकिन यह कैंसर की कोशिकाएं कैंसर की बीमारी में तब्दील इसलिए नहीं होती है क्योंकि हमारा शरीर इन कोशिकाओं की जांच कर उसी समय इन कोशिकाओं को नष्ट कर देता है परंतु जब हमारा शरीर इन खराब कोशिकाओं की ग्रोथ को नहीं रोक पाता तब यह खराब कैंसर की कोशिकाएं इकट्ठा होकर कैंसर का रूप ले लेती हैं।

क्योंकि कैंसर की यह कोशिकाएं अपना काम सही ढंग से नहीं करती हैं और बिना किसी वजह बढ़ती रहती हैं और शरीर के जिस हिस्से में यह कोशिकाएं बढ़ती रहती हैं वह अपना कार्य करना बंद कर देता है या सही ढंग से नहीं करता जिसका बुरा प्रभाव हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है इसे कैंसर की बीमारी कहते हैं।

ट्यूमर क्या है - What is tumor in Hindi 

कैंसर की कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं और एक जगह इकट्ठा होकर एक गुच्छा सा बना लेती हैं जिसे ट्यूमर कहते हैं और इस प्रकार के कैंसर को शुरुआती कैंसर या प्राइमरी स्टेज कैंसर कहते हैं।

लेकिन जब यह कैंसर की कोशिकाएं खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाती हैं तब इसे सेकेंडरी स्टेज का कैंसर कहते हैं सेकेंडरी औस्टेज के रोगी को ठीक करना प्राइमरी स्टेज के रोगी को ठीक करने से मुश्किल होता है।

कैंसर हमारे शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है पूरी दुनिया में ज्यादातर लोगों को छाती या फेफड़ों का कैंसर होता है।

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कैंसर (Cancer) के मुख्य लक्षण - Symptoms of cancer in hindi

  • असामान्य मासिक चक्र आना, 
  • पीरियड्स के दौरान ,पेट में ऐठन, और सर में तेज दर्द।
  • बाथरूम की आदतों में बदलाव
  • व्यक्ति को दस्त होना, 
  • मल में काला या लाल रक्त आना, 
  • अधिक, और लगातार पेशाब लगना और 
  • मूत्र में रक्त आना।


सूजन

फूला हुआ पेट महसूस करना, 2 हफ्तों से अधिक फूला हुआ पेट महसूस होने पर gastrointestinal cancer an ovarian कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

स्तनों में परिवर्तन होना

स्तनों में गांठ, रंग में परिवर्तन आना, निप्पल के आसपास परिवर्तन आना क्योंकि ज्यादातर महिलाओं को स्तनों का कैंसर होता है।

लंबे समय से खांसी

2 हफ्तों से अधिक समय से खांसी होना, विशेष रूप से सूखी खांसी होना फेफड़ों के कैंसर होने का संकेत हो सकता है।

लंबे समय से सिर में दर्द रहना

2 हफ्तों से अधिक तेज सिर दर्द मस्तिष्क में होने वाले ट्यूमर के कारण से हो सकता है।

निगलने में कठिनाई

भोजन आदि को निगलने में कठिनाई होना, गले में खाना फंसा फंसा महसूस होना, अत्याधिक चोट लगना आदि भी कैंसर के लक्षण होते हैं।

बार बार बुखार आना या संक्रमण होना

बार बार बुखार उतरना चढ़ना या व्यक्ति को इन्फेक्शन होना यह सब कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

मुंह में परिवर्तन

मुंह में लगातार घाव होना, दर्द होना। यह विशेष रूप से उन लोगों को होता है जो धूम्रपान करते हैं या फिर शराब पीते हैं

त्वचा में बदलाव होना

जैसे फटी फटी सी त्वचा हो जाना, त्वचा पर धब्बे पर जाना मस्सा बड़ा होना, मस्सा बड़ा होकर घाव जैसा बन जाना आदि।

लगातार थकान महसूस होना

लगातार थकान महसूस होना शरीर का थका थका महसूस करना शरीर में ऊर्जा स्तर का कम हो जाना।

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कैंसर के प्रकार - Types of cancer in Hindi

  • पित्त की थैली का कैंसर
  • बड़ी आंत का कैंसर
  • प्रोस्टेट कैंसर
  • त्वचा का कैंसर
  • मुंह का कैंसर
  • स्तनों का कैंसर
  • थायराइड कैंसर


पित्त की थैली का कैंसर 

भारत में आज पित्त की थैली के कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं इसके ज्यादातर मामले उत्तर प्रदेश बिहार दिल्ली हरियाणा में पाए जाते हैं इसके किसी विशेष कारण से होने का आकलन अभी तक नहीं हुआ है पित्त की थैली के कैंसर होने का मुख्य कारण है पित्त की थैली में अधिक पथरी होना।

पित्त की थैली के कैंसर के लक्षण

पित्त की थैली के कैंसर के लक्षण लगभग पित्त की थैली में पथरी के कारण होने वाले लक्षणों के समान हो सकते हैं।

  • जैसे पीलिया हो जाना
  • पेट के दाहिने तरफ दर्द महसूस होना
बीमारी के अधिक बढ़ने पर होने वाले लक्षण
  • अधिक दर्द महसूस होना
  • कम भूख लगना
  • अचानक वजन घटने लगना

पित्त की थैली के कैंसर की पहचान

सबसे पहले ऐसी कोई समस्या आने पर डॉक्टर एक्स-रे कराने के लिए रेफर करता है।

अगर पेट में कोई गांठ महसूस होती है तो CT scan or PET scan कराना चाहिए। CT SCAN हमारे पेट के अंदर की स्थिति के बारे में अच्छे से बता देता है

पित्त की थैली के कैंसर का इलाज

इसका मुख्य इलाज है ऑपरेशन,ऑपरेशन में पित्त की थैली से जिगर का एक हिस्सा हटाया जाता है और गांठों की सफाई की जाती है।

इस प्रक्रिया के होने के बाद मरीज की स्टेजिंग की जाती है और स्टेजिंग के हिसाब से आगे का ट्रीटमेंट दिया जाता है। मरीज का आने वाला समय मरीज के स्टेजिंग पर निर्भर करता है जिसके अनुसार मरीज को कीमोथेरेपी या रेडियोथैरेपी दी जाती है।


बड़ी आंत का कैंसर 

बड़ी आंत का कैंसर पूरी दुनिया में कॉमन बीमारी है बड़ी आंत में कैंसर पॉलिप द्वारा होता है। पॉलिप कोशिकाओं का एक छोटा गुच्छा होता है। जो शुरुआत में हानिकारक नहीं होते हैं  परंतु बाद में कैंसर की कोशिकाएं फैलती रहती हैं और रक्त में घुलकर पूरे शरीर में फैल जाती हैं।

बड़ी आंत के कैंसर के लक्षण

  • बाथरूम जाने की आदतों में बदलाव 
  • डायरिया 
  • अपच की समस्या
  • मलद्वार से रक्त का आना
  • अचानक से वजन घटना
  • एनीमिया की बीमारी होना /हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होना
  • काम करने में थकान महसूस होना 
  • लगातार पेट में दर्द होना 

उपरोक्त सभी लक्षण बड़ी आंत के कैंसर के दौरान मरीज को होते हैं।अगर आपको यह सभी लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आपको देरी नहीं करनी चाहिए आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए डॉक्टर आप की जांच करेंगे और यह बात कंफर्म करेंगे कि आपको कोलन कैंसर या बड़ी आंख का कैंसर है या नहीं 

बड़ी आंत का कैंसर होने के कारण

  • जरूरत से ज्यादा धूम्रपान
  • जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन
  • बहुत ज्यादा जंक फूड का सेवन करना 
  •  या कोई फैमिली हिस्ट्री 
  • मोटापा 
  • बढ़ती हुई उम्र

 

बड़ी आंत का कैंसर की जांच

कोलोनोस्कोपी

कोलोनोस्कोपी में व्यक्ति के मलद्वार में एक लंबी पतली ट्यूब डाली जाती है जिसकी सिर पर कैमरा होता है जिससे आंत के अंदर की तरफ से देखा जाता है जिसमें अगर डॉक्टरों को कुछ गांठ दिखाई देती है तब डॉक्टर्स मरीज की बायोप्सी करते हैं बायोप्सी का मतलब होता है गांठ के छोटे से टुकड़े को जांचना। फिर यह बात सिद्ध हो जाती है कि मरीज को कोलन कैंसर है या नहीं।

अगर कैंसर है तब मरीज की स्टेजिंग की जाती है स्टेजिंग का मतलब होता है कि यह जांच करना कि कैंसर कहां तक पहुंचा है इसमें दो प्रकार से जांच की जाती है कि कैंसर अपनी ही जगह पर कितना बड़ा है दूसरा वह अपनी जगह को छोड़कर कहीं और तो नहीं गया इन सभी चीजों की जानकारी CT स्कैन या PET स्कैन द्वारा की जाती है अगर व्यक्ति का कैंसर सही टाइम पर पता चल जाता है तब इसका इलाज संभव है।


बड़ी आंत के कैंसर का इलाज

बड़ी आंत के कैंसर का इलाज

ऑपरेशन द्वारा कैंसर को निकालना जिसमें बड़ी आत के जिस हिस्से में कैंसर है उस हिस्से को ऑपरेशन कर निकालना होता है साथ ही उसके आसपास की ग्रंथियों को भी निकाला जाता है और फिर उसके आगे और पीछे की आंत को जोड़ दिया जाता है पहले इस प्रकार से ऑपरेशन किया जाता था लेकिन अब ऑपरेशन लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से किया जाता है

जिसमें पेट में छोटे-छोटे छेद करके यह ऑपरेशन किया जा सकता है इसके कई फायदे होते हैं जैसे हॉस्पिटल में कम समय रहना पड़ता है व्यक्ति जल्दी काम पर जा सकता है ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है और अन्य ऑपरेशन से जुड़े काम कम हो जाते हैं। 

अगर कोलोन कैंसर की स्टेज अधिक है तो फिर कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है ताकि इस कैंसर का आगे होने का खतरा और कम हो जाए अगर कोलन कैंसर का सही समय पर पता लगा लिया जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए तो व्यक्ति ठीक हो सकता है।

अच्छा खानपान

खाने में ज्यादा तला हुआ खाना नहीं खाना चाहिए ज्यादा जंक फूड नहीं खाना चाहिए प्रोसेस्ड फूड नहीं खाना चाहिए शुगर से बनी चीजें कम से कम लेनी है फैट वाला खाना कम खाएं फ्रूट और वेजिटेबल जो सामान्य और नेचुरल चीजें होती हैं उनको अधिक खाना चाहिए।

एक्सरसाइज

आज के व्यक्ति की जीवन शैली बहुत ज्यादा व्यस्त हो गई है व्यक्ति भागता दौड़ता रहता है और अपनी सेहत का बिल्कुल ध्यान नहीं रखता जिसकी वजह से भिन्न भिन्न प्रकार की समस्याएं होती हैं इसलिए रेगुलर एक्सरसाइज बहुत जरूरी  है अगर आप जिम जॉइन कर सकते हैं तो बहुत अच्छा नहीं कर सकते हैं तो सुबह शाम लंबे समय के लिए walk करना बहुत जरूरी है।

अच्छी नींद लेना

एक व्यक्ति के लिए 6 से 8 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी होता है और हमें उस पर ध्यान देना चाहिए।

अगर हम इन सभी बातों का ध्यान रखें तो इन सभी बीमारियों से बचा जा सकता है जिसमें कैंसर भी शामिल है।

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प्रोस्टेट कैंसर

प्रोस्टेट ग्रंथि पेशाब के नीचे स्थित एक ग्रंथि है यह एक अखरोट के आकार के बराबर होती है प्रोस्टेट एक दूधिया रंग का तरल पदार्थ का निर्माण करता है जो वीर्य का एक अंश होता है। इस ग्रंथि का कैंसर उम्र के साथ संबंधित है जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

बार बार पेशाब का आना पेशाब का महसूस ना होना और अचानक से पेशाब होना रात को बार बार पेशाब के लिए जाना या कभी-कभी पेशाब में जलन होना ऐसा जरूरी नहीं है कि यह सभी लक्षण प्रोस्टेट के कैंसर में हो नॉन कैंसर कंडीशन जिसे benign prostate hyperplasia (bph) में भी हो सकते हैं

प्रोस्टेट कैंसर की जांच

क्योंकि यह सभी लक्षण प्रोस्टेट कैंसर के अलावा डीपीएच के द्वारा भी हो सकते हैं इसीलिए जांच के द्वारा यह पता लगाया जाता है कि लक्षण प्रोस्टेट के कारण हैं या पीपीएच के कारण

पहली जांच होती है Digital rectal examination कि जिसमें एक प्रशिक्षित शल्य चिकित्सक द्वारा जांच को किया जाता है जिसमें वह यह बताता है कि कोई गांठ है या नहीं उसके बाद आगे की जांच कराई जाती है दूसरी जांच होती है पीएसए के एक तरीके खून की जांच है जिसके मात्रा से यह पता चलता है कि पीपीएच है या प्रोस्टेट कैंसर।

तीसरी जांच होती है transrectal ultrasound जिससे प्रोस्टेट कैंसर की गांठ के साइज का पता चलता है।

इसके अलावा गांठ में कुछ खराबी होने पर बायोप्सी की जाती है

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज

स्टेज वन और स्टेज 2 प्रोस्टेट कैंसर का इलाज या तो सर्जरी के साथ किया जाता है या फिर रेडियोथैरेपी के साथ किया जाता है।

सर्जरी करने से पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाता है

  • मरीज की उम्र कितनी है
  • या मरीज की सर्जरी सहने की क्षमता है या नहीं।
  • बीमारी का स्टेज

एडवांस स्टेज के प्रोस्टेट कैंसर के ट्रीटमेंट में हार्मोन अल ट्रीटमेंट दिया जाता है यह दो प्रकार से होता है जिसमें या तो सर्जरी करके टेस्टिकल के ग्लैंड को निकाला जाता है और फिर टेबलेट फॉर्म में हारमोंस की दवाई दी जाती है फिर जरूरत पड़ने पर अगर प्रोस्टेट कैंसर हड्डियों तक पहुंच चुका है तो हड्डियों की रेडियोथैरेपी की जाती है।

कभी-कभी एडवांस स्टेज के प्रोस्टेट कैंसर में कीमोथेरेपी का प्रयोग भी किया जाता है


स्तनों का कैंसर

स्तन कैंसर की बीमारी पूरे विश्व में महिलाओं में होने वाली सबसे आम कैंसर की बीमारी है ऐसे कई कारक है जो स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं

स्तन के कैंसर के कारण

  • व्यायाम ना करना
  • मोटापे के कारण
  •  30 वर्ष के बाद गर्भ धारण करने से
  • बच्चों को स्तनपान ना कराने के कारण भी हो सकता है।
  • कैंसर का कोई पारिवारिक इतिहास


स्तन कैंसर की जांच

  • स्तन की जांच करानी चाहिए।
  • 20 वर्ष से अधिक होने पर स्तनों की जांच स्वयं नियमित रूप से करनी चाहिए।


स्तन कैंसर के लक्षण

  • स्तनों में गांठ महसूस होना
  • स्तनों के निप्पल में बदलाव आना
  • स्तनों के निप्पल से खून का रिसाव होना
  • बगल में गांठ होना या
  • गले में गांठ होना

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण हो तो आपको जरूर डॉक्टर को दिखाना चाहिए डॉक्टर आपकी बायोप्सी करेगा और यह बात कंफर्म करेगा कि क्या आप को स्तन कैंसर है या नहीं।


स्तन कैंसर से बचाव

  • स्वस्थ जीवन शैली अपनाना
  • शरीर का वजन न बढ़ने देना
  • शिशु को स्तनपान कराना
  • नियमित व्यायाम करना
  • संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करना
  • धूम्रपान ना करना
  • शराब ना पीना
  • 30 वर्ष से पूर्व गर्भ धारण करना

तो आप इससे काफी हद तक बचाव कर सकते हैं स्तनों में कोई बदलाव होने पर जल्द ही विशेषज्ञ को दिखाएं जल्द पहचान और सही इलाज से स्तन के कैंसर को ठीक किया जा सकता है।

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मुंह का कैंसर

मुंह के कैंसर से पीड़ित रोगियों की संख्या हमारे देश में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है दुख की बात यह है कि 60 से 70% मरीज तब डॉक्टर को दिखाते हैं जब वे एडवांस स्टेज में होते हैं।

लक्षण

  • होठों पर या मुंह के अंदर सफेद चकत्ते पड़ जाना
  • जिनमें दर्द नहीं होता है
  • खाना निगलने में दिक्कत आती है
  • दांतों से खून निकलना बिना बात के
  • कभी-कभी मुंह में अंगों को महसूस ना कर पाना
  • वजन घट जाना

अगर आपको यह सभी लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं डॉक्टर देख परख कर बताएगा कि यह समस्या साधारण है या गंभीर।

कारण

अधिक धूम्रपान करना

धूम्रपान करना सेहत के लिए हानिकारक होता है साथ ही धूम्रपान करने से मुंह का कैंसर भी हो सकता है।

अत्यधिक शराब का सेवन

अत्यधिक शराब का सेवन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता इससे भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं और साथ ही कैंसर की बीमारी भी हो सकती है

धूप

बहुत ज्यादा धूप में रहने से भी कैंसर की बीमारी हो सकती है।

कमजोर रोग प्रतिरोधक

जिस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उसे कई प्रकार की बीमारियां लगने की संभावना अधिक होती है इसलिए व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होनी चाहिए।


बचाव

  • धूम्रपान को कम करना
  • अल्कोहल का सेवन कम करना
  • अगर व्यक्ति धूप में रहकर ज्यादा काम करता है तो लिप बाम का इस्तेमाल करना
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रयास

जांच

जांच में बायोप्सी की जाती है बायोप्सी मे जहां मुंह में कैंसर है वहां का एक छोटा सा हिस्सा लिया जाता है और उसका टैस्ट किया जाता है और यह पता लगाया जाता है कि क्या यह कैंसर है या नहीं।

इलाज

  • रेडियोथैरेपी
  • कीमोथेरेपी
  • अंत में सर्जरी में व्यक्ति के जिस हिस्से में कैंसर होता है उस हिस्से को सर्जरी द्वारा हटा दिया जाता है


त्वचा का कैंसर

त्वचा का कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो व्यक्ति के शरीर को किसी भी प्रकार से इफेक्ट नहीं करेगा जिससे व्यक्ति की रोज की दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आएगा अगर आपके कोई पुराना मस्सा है या कोई दाग है जब आप उस पर ध्यान से मॉनिटर करेंगे तब आपको पता चलेगा कि इसमें कैंसर डिवेलप हो रहा है या नहीं।

आपको बहुत देर तक पता नहीं चलेगा जब आपको स्किन कैंसर होगा क्योंकि इसमें बॉडी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है वहीं पर कैंसर बढ़ता रहेगा काफी बढ़ने पर आप नोटिस करेंगे कि यह हुआ है इसमें कोई दर्द नहीं होगा इसके कोई लक्षण नहीं है इसलिए लोग इसकी पहचान बहुत देर से करते हैं जब भी आप देखें कि आपका कोई दाग या मस्सा चेंज हो रहा है आपके डॉक्टर के पास जाएं और उसकी जांच करें।

लक्षण

स्किन के कैंसर में सिम्टम्स नहीं होते हैं इसलिए स्कूल जांच के लिए समय-समय पर जांच करानी चाहिए अगर आपकी बॉडी पर कोई दाग या कोई निशान है और उसमें कोई चेंज हो जा रहे हैं तो आप अपने डॉक्टर को दिखाएं स्किन कैंसर बहुत ज्यादा तेजी से नहीं फैलता है इसलिए यह ज्यादा गंभीर नहीं है लेकिन अगर हो गया तो आपको दिक्कत हो सकती है 

त्वचा कैंसर के प्रकार

  • Basal cell carcinoma cancer
  • Melanoma cancer


थायराइड कैंसर

थायराइड की गांठ को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए अगर थायराइड की गांठ उस चीज की सोनोग्राफी और अन्य जांचें जरूर करवानी चाहिए डॉक्टर की सलाह से थायराइड की गांठ में कभी कबार कैंसर पाया जाता है हमारे देश में papillary carcinoma of thyroid बहुत कॉमन है हमारे देश में लगभग 1000000 करोड कैंसर के मरीज हैं लोग इसे सामान्य गांठ समझते हैं लेकिन यह गांठ धीरे-धीरे शरीर में फैलती रहती है।

जांच

इसकी मुख्य रूप से दो प्रकार से जाचे होती है पहली सोनोग्राफी और दूसरी पानी खींचने वाली जांच यानी एफएनएसी की जांच डॉ अकोला कमेंट करेंगे कुछ किस चीज में डॉक्टर सिटी और m.r.i. भी कमेंट करते हैं।

इलाज

इसका सीधा सिंपल उपचार है

सर्जरी

सर्जरी द्वारा थायराइड की पूरी की पूरी ग्रंथि को निकाल दिया जाता है जिसके बाद व्यक्ति को रेडियोएक्टिव आयोडीन की जरूरत पड़ती है रेडियोएक्टिव आयोडीन देने के बाद बस ट्रीटमेंट पूरा हो जाता है और सर्वाइवल बहुत अच्छा है थायराइड कैंसर होते हैं।

फेफड़ों का कैंसर

90% से ज्यादा मामलों में मरीजों को फेफड़ों के कैंसर के बारे में तब पता चलता है जब बीमारी हद से ज्यादा बढ़ चुकी होती है इसलिए सतर्कता जरूरी है।


फेफड़ों के कैंसर के लक्षण

निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं यह है फेफड़ों का कैंसर होने का संकेत हो सकता है।

  • लंबे समय तक खांसी रहना
  • खांसी में खून आना
  • आवाज में बदलाव आना
  • सांस लेने में दिक्कत
  • शरीर का वजन कम होना तेजी से
  • सिर में दर्द होना
  • बहुत ज्यादा कमजोरी आना

यह सारे लक्षण फेफड़ों के कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

फेफड़ों के कैंसर के प्रकार

फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है

  • Small cell lung cancer
  • Non small cell lung cancer

दोनों प्रकार के फेफड़ों के कैंसर का ट्रीटमेंट बिल्कुल अलग अलग होता है


फेफड़ों के कैंसर की जांच

  • शुरुआत में चैस्ट x-ray देखने को कहा जाता है
  • उसके बाद सीटी स्कैन  pet scan कराने के लिए कहा जाता है।
  • सिटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड गाइडेड बायोप्सी जिसमें सुई को छाती के द्वारा कैंसर की गांठ में डालते हैं और उसके बाद कैंसर की जांच की जाती है।


ब्रोंकोस्कॉपी

इस तरीके में दूरबीन के द्वारा आपकी सांस की नली में पाइप डाली जाती है और कैंसर की गांठ का पता लगाया जाता है।

मीडियास्टेनोस्कोपी

इस तरीके में गर्दन में छेद कर एक दूरबीन डाली जाती है जिससे कैंसर की गांठ का पता लगाया जाता है और कैंसर का टुकड़ा लिया जाता है जांच करने के लिए।


फेफड़ों के कैंसर के स्टेज

फेफड़ों के कैंसर को चार स्टेजो में विभाजित किया गया है

  • स्टेज 1 में बीमारी छोटी होती है और एक ही फेफड़ों में स्थित होती है।
  • स्टेज 2 में बीमारी एक फेफड़े में रुकी हुई होती है और उसका साइज 3 सेंटीमीटर से ज्यादा हो जाता है।
  • स्टेज 3 में बीमारी का साइज 7 सेंटीमीटर से ज्यादा हो जाता है और वह फेफड़ों के लिंफ नोड्स को भी इंवॉल्व करता है।
  • स्टेज 4 में बीमारी या तो दूसरे फेफड़ों में फैल चुकी होती है या फेफड़ों के पानी को इंवॉल्व कर चुकी होती है।

फेफड़ों के कैंसर का इलाज

जब ट्यूमर छोटा होता है तब सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है और ट्यूमर को निकाल दिया जाता है।

और जब अगर यह छाती के अंदर फैल जाता है तब कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के द्वारा इसे हटाया जाता है।

और लास्ट स्टेज जब फेफड़े का कैंसर फेफड़े को छोड़कर कहीं और भी फैल जाता है तब कीमो थेरेपी टारगेट थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी अन्य तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।


किडनी का कैंसर

किडनी के कैंसर के बारे में खास बात यह है कि यह एजेंट अरोमैटिक होते हैं परी है आजकल काफी कॉमन बीमारी बन चुकी है।

लक्षण

  • पेट में दर्द होना 
  • वजन लगातार घटना
  • कमजोरियां थकावट महसूस करना
  • पैरों में सूजन आना 
  • भूख न लगना


गुर्दे के कैंसर के कारण

  • अधिक मात्रा में तंबाकू धूम्रपान करना
  • परिवार में इसके अन्य मरीज होना यानी फैमिली हिस्ट्री होना
  • लंबे समय तक गुर्दे में पथरी होना भी एक बड़ा कारण हो सकता है

गुर्दे के कैंसर की जांच

  • ब्लड टैस्ट किया जाता है
  • पेशाब टैस्ट किया जाता है
  • अल्ट्रासाउंड होता है सिटी स्कैन होता है
  • m.r.i. होता है

इन सभी के द्वारा इस अवस्था का पता लगाया जा सकता है

इलाज

गुर्दे के कैंसर का मुख्य इलाज ऑपरेशन ही है जिसमें किडनी को बचाते हुए ट्यूमर वाले हिस्से को काटकर अलग कर दिया जाता है।


गुर्दे के कैंसर से बचाव

  • गुर्दे के कैंसर का मुख्य कारण है शराब धूम्रपान आदि तो हमें मुख्य रूप से इनके सेवन करने से बचना चाहिए और अच्छा और स्वस्थ खाना खाना चाहिए।
  • डेली एक्सरसाइज करें कम से कम 20 मिनट तक हल्की फुल्की और 10 मिनट तक भारी एक्सरसाइज जरूर करें।
  • अच्छा और पौष्टिक खाना खाए और रेड मीट का सेवन कम से कम करें।


लिंफोमा कैंसर

लिंफोमा कैंसर एक प्लेट से जुड़ा हुआ कैंसर है यह है मुख्य रूप से श्वेत रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है।

कारण

  • कमजोरी रोधक क्षमता
  • पर्यावरण पोलूशन केमिकल एंड रेडिएशन
  • EBV के साथ संक्रमण
  • अस्वस्थ खाना
  • एचआईवी एड्स
  • अधिक धूम्रपान करना और एडमिट का अधिक सेवन
  • डीएनए और जींस में कुछ परिवर्तन आदि।


लिंफोमा कैंसर के लक्षण

लिंफोमा कैंसर में शरीर में adenoids बढ़ जाते हैं।

  • ठंड लगने लगती है
  • वजन घटने लगता है
  • थकान महसूस होना
  • पेट में सूजन होना या पेट फुला हुआ होना
  • भोजन की थोड़ी मात्रा के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना।
  • सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
  •  खांसी की तकलीफ होना।


लिंफोमा कैंसर की जांच

  • ब्लड टैस्ट
  • चेस्ट x-ray
  • मॉलिक्यूलर टैस्ट
  • एम आर आई
  • बोन मैरो एस्प्रिन और बायोप्सी
  • Pet स्कैन

इलाज

  • कीमोथेरेपी
  • दवाइयों द्वारा
  • विकिरण चिकित्सा
  • Bone marrow ट्रांसप्लांट

अग्नाशय का कैंसर

पेनक्रिएटिक कैंसर के लक्षण बहुत ही समय बाद दिखाई देते हैं और तब तक कैंसर काफी हद तक बढ़ चुका होता है

लक्षण

  • पेट में दर्द होना 
  • वजन घटना 
  • भूख कम लगना

कारण

इसका मुख्य कारण है 

  • स्मोकिंग जो लोग ज्यादा स्मोकिंग करते हैं उनमें यह कैंसर मुख्य रूप से देखा गया है
  • मोटापा : मोटे लोगों में यह कैंसर होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
  • जेनेटिक : परिवार में अगर किसी को यह बीमारी है तो आने वाले बच्चे को भी यह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।

इलाज

  • सर्जर शाल्य चिकित्सा
  • कीमोथेरेपी 
  • रेडिएशन थेरेपी आदि।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए

जब व्यक्ति को ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण हो रहे हो तो व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि यह एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज जितना देरी से शुरू होता है उतना ही समस्याएं होती हैं।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने बताया है कि कैंसर क्या है क्यों होता है कैंसर से बचाव क्या है कैंसर के लक्षण, उपाय, कैंसर (Cancer) क्या है कैंसर (Cancer) कैसे होता है ट्यूमर क्या है कैंसर के मुख्य लक्षण कैंसर के प्रकार इन सभी विषयों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी है मैं आशा करता हूं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी अगर आपका कोई सवाल य जवाब है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते हैं।

प्रश्न और उत्तर

सारे कैंसर में से सबसे खतरनाक कैंसर कौन सा है?

सारे कैंसर में से सबसे खतरनाक कैंसर ब्लड कैंसर होता है क्योंकि ब्लड कैंसर पूरी बॉडी में फैल जाता है और समय पर ट्रीटमेंट ना मिलने से मरीज की बचने की कोई उम्मीद नहीं रहती।

कैंसर के क्या क्या लक्षण हैं?

कैंसर के लक्षण हैं जैसे थकान महसूस होना, बहुत दर्द होना, ब्लीडिंग होना, वजन घटना, लिंम्फ नोड्स में सूजन, न्यूरोलॉजी और मस्कुलर लक्षण, श्वसन लक्षण आदि

कैंसर कैसे ठीक होता है

कैंसर का इलाज जितना जल्दी हो सके शुरू कर देना चाहिए क्योंकि जितना लेट करते है उतना ही कैंसर को ठीक होने में समस्या उत्पन्न होती है और व्यक्ति को ज्यादा कष्ट होता है कैंसर का इलाज मुख्य रूप से या तो सर्जरी होता है या कीमो थेरेपी या फिर रेडिएशन थेरेपी।

महिलाओं में कैंसर के लक्षण क्या होते हैं

महिलाओं में कैंसर के लक्षण मुख्य रूप से हैं जैसे पीरियड्स का ना होना पीरियड्स कम आना अत्यधिक ब्लीडिंग कम ब्लीडिंग और स्तनों के आकार में परिवर्तन स्थानों में परिवर्तन आदि होते हैं।

कैंसर से बचने के उपाय

कैंसर से बचने के उपाय यही हैं कि अच्छी जीवनशैली हो जिसमें अच्छा खानपान नियमित व्यायाम और स्वच्छ हवा हो।

मुंह में कैंसर के शुरुआती लक्षण

मुंह में होने वाले कैंसर में जीभ पर छाले पड़ जाते हैं सफेद दाग हो जाते हैं या फिर होंठ पर छाले पड़ जाते हैं आदि इसका इलाज यह होता है कि जिस हिस्से में कैंसर होता है उस पूरे हिस्से को निकाल दिया जाता है।

कैंसर के प्रकार क्या है

कैंसर कई प्रकार का हो सकता है कैंसर की कोशिकाएं शरीर के जिस हिस्से में चली जाती हैं वहां पर कैंसर हो जाता है मुख्य रूप से कैंसर के प्रकार हैं छाती का कैंसर मुंह का कैंसर थायराइड का कैंसर किडनी का कैंसर आदि।

संदर्भ

Cancer treatment research. (2019, July 30). National Cancer Institute. https://www.cancer.gov/about-cancer/treatment/research


What is cancer research? (2020, January 23). American Association for Cancer Research (AACR). https://www.aacr.org/patients-caregivers/about-cancer/what-is-cancer-research/


National cancer institute (NCI). (2019, November 27). National Institutes of Health (NIH).

https://www.nih.gov/about-nih/what-we-do/nih-almanac/national-cancer-institute-nci


Innovative approaches for cancer treatment: Current perspectives and new challenges. (n.d.). PubMed Central (PMC).

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6753017/


State of cancer research around the globe. (2019, May 14). Cancer Network.https://www.cancernetwork.com/view/state-cancer-research-around-globe