मासिक धर्म (Periods): लक्षण, इलाज, और अन्य जानकारी

मासिक धर्म (Periods): लक्षण, इलाज, और अन्य जानकारी

"अभी तो गया था, फिर से आ गया" कुछ ऐसा ही महिलाऐ और लड़कियां सोचतीं हैं  periods के बारे में। Periods महिलाओं के जीवन का एक अहम पहलू हैं मासिक धर्म के बारे में जानकारी ना होने के कारण महिलाओं और लड़कियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है खासकर शुरुआत में लड़कियों को मासिक धर्म के कारण काफी परेशानी होती है।

तो इस आर्टिकल में हम बात करेंगे पीरियड्स के बारे में पीरियड्स क्या है, पीरियड्स में होने वाली समस्याएं, लक्षण और इलाज

Table of contents

मासिक धर्म (periods) क्या होते हैं -What is periods in Hindi

हमारे पेट के निचले हिस्से में गर्भाशय होता है आगे चलकर गर्भाशय में ही बच्चा बनता है गर्भाशय के दोनों तरफ अंडाशय होते हैं जिनमें से हर महीने एक अंडा गर्भाशय में आता है।

गर्भाशय अंडे को सुरक्षित रखने के लिए गर्भाशय में एक दीवार बनाता है यह दीवार खून और पोषक तत्वों की बनी होती है और जब अंडे को स्पर्म नहीं मिलता है तब वह टूटने लगता है साथ ही खून और पोषक तत्वों से बनी दीवार भी टूटने लगती है और टूटा हुआ अंडा रक्त के साथ योनि के द्वारा बाहर निकल जाता है इसे रजोधर्म, मासिक, मासिक चक्र, महावारी कहां जाता है और अंग्रेजी में इसे पीरियड्स और mensuration cycle कहते हैं।

Periods 10 से 15 वर्ष की आयु में शुरू हो जाते हैं और पीरियड शुरू होने का मतलब है कि आप गर्भधारण के योग्य हो चुकी हैं।

मासिक धर्म (periods) के दौरान दर्द क्यों होता है - Why we feel pain during periods in Hindi

पीरियड्स के दौरान दर्द क्यों होता है

Periods के दौरान सभी महिलाओं को दर्द होता है किसी को थोड़ा होता है तो किसी को ज्यादा होता है पीरियड्स में होने वाले दर्द को dysmenorrhea या menstrual cramps कहते हैं यह आमतौर पर पेट के निचले हिस्से या pelvic भाग के अंदर होता है इसके दौरान महिलाओं को पेट के निचले हिस्से (lower abdominal) में और कमर में दर्द होता है यहां तक की पीरियड्स की वजह से पैरों में भी दर्द हो सकता है कुछ मामलों में तो महिलाओं को दर्द के साथ-साथ जी घबराना, उल्टी जैसा लगना और डायरिया की भी समस्या होती है।

मुख्य रूप से महिलाओं को पेट में, कमर में और पैरों में दर्द होता है जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है यह दर्द कम होता जाता है छोटी बच्चियों में जब पीरियड्स की शुरुआत होती है तब उनमें ज्यादा दर्द की समस्या, आमतौर पर देखने को मिलती है।

मासिक धर्म (periods) के दौरान दर्द होने के कारण - Causes of pain during periods in Hindi

Periods के दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण शरीर से prostaglandins निकलते हैं जिसके कारण बच्चेदानी सिकुड़ने लगती है बच्चेदानी के सिकुड़ने के कारण उसमें खून की नसें दबने लगती हैं इससे बच्चेदानी में जा रहे रक्त की मात्रा कम हो जाती है और रक्त की मात्रा कम होने से दर्द होना शुरू हो जाता है।

यह दर्द किसी-किसी महिला को periods शुरू होने से एक-दो दिन पहले से होने लगता है और किसी किसी महिला को बाद में शुरू होता है।

आमतौर पर यह दर्द 2 या 3 दिन रहने के बाद अपने आप ठीक हो जाता है और अगर किसी को यह दर्द अधिक होता है तो 4 से 5 दिन तक भी हो सकता है।

कुछ महिलाओं को यह दर्द काफी अधिक होता है जिसके कारण महिलाऐं बेहोश तक हो जाती हैं।

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मासिक धर्म (periods) के दौरान होने वाले दर्द के प्रकार - Types of pain during periods in Hindi

पीरियड्स के दौरान होने वाला यह दर्द दो प्रकार का होता है।

  1. प्राइमरी डिश मेंनेरिया (primary dysmenorrhea)
  2. सेकेंडरी डिश मेंनेरिया(secondary dysmenorrhea)

प्राइमरी डिश मेंनेरिया (primary dysmenorrhea)

Primary dysmenorrhea में महिलाओं में कोई भी शारीरिक विकार नहीं होता, महिलाएं पूर्ण रूप से स्वस्थ होती हैं परंतु हार्मोन में कुछ बदलाव के कारण यह दर्द होता है।

आमतौर पर 70% से 80% महिलाओं में पीरियड्स के दौरान प्राइमरी डिशमेंनेरिया के कारण दर्द होता है

Primary dysmenorrhea में महिलाओं को कोई बीमारी नहीं होती सिर्फ हार्मोन की गड़बड़ी के कारण दर्द होता है।

इस प्रकार के दर्द के उपाय

  • हीटिंग पैड से सिकाई करना
  • और गर्म पानी से भरी बोतल को कपड़े में लपेटकर पेट के निचले हिस्से में रखने से बड़ा आराम मिलता है

Primary dysmenorrhea के दर्द के इलाज के लिए आमतौर पर ली जाने वाली दवाइयां

  • नेपरोक्सिन
  • ब्रूफेन 
  • मेफटाल स्पास

इसके बाद भी अगर महिलाओं में यह दर्द और अधिक बढ़ जाता है तब उन्हें हार्मोनल ट्रीटमेंट दिया जाता है जिससे यह दर्द ठीक हो जाता है।

सेकेंडरी डिश मेंनेरिया (secondary dysmenorrhea)

पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द , किसी बीमारी के कारण हो सकता है बीमारी जैसे गर्भाशय में इंफेक्शन या कोई पुरानी सर्जरी। इस प्रकार के दर्द को secondary dysmenorrhea कहते हैं और secondary dysmenorrhea रोग का पता सोनोग्राफी से लगाया जाता है 

इस प्रकार के दर्द का इलाज मुख्य बीमारी के इलाज के द्वारा ही संभव है

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मासिक धर्म (periods) के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के उपाय

पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाऐ। और इन बातों का विशेष ध्यान रखें।

एक्सरसाइज

नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से शरीर में हार्मोन का स्तर संतुलन में रहता है जिससे पीरियड के दौरान दर्द में राहत मिलती है और दर्द कम होता है।

हाइड्रेशन

Periods के दौरान आपके शरीर में पानी की कमी ना होने दें हमेशा पानी और तरल चीजों का सेवन करें जैसे शरबत, दूध, ‌दही, लस्सी, छाछ, नींबू पानी और नारियल पानी आदि।

कैफीन का सेवन कम करें

पीरियड्स के दौरान चाय कॉफी का सेवन कम कर दें

फैट वाला खाना खाने से बचें

फैट का सेवन कम करने से हारमोंस को संतुलन में रहने में मदद मिलती है

विटामिन बी और विटामिन ई

विटामिन बी और विटामिन ई का नियमित रूप से सप्लीमेंट लेने से भी पीरियड के दौरान होने वाला दर्द, थोड़ा कम हो जाता है।

सप्लीमेंट का उपयोग स्मॉल डोसेज में करने से उसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता परंतु डॉक्टर की सहायता से ही सप्लीमेंट का उपयोग करना चाहिए।

धूम्रपान और शराब

जो महिलाऐं अधिक धूम्रपान और शराब का सेवन करतीं हैं पीरियड के दौरान उन्हें अधिक दर्द होता है।

पीरियड्स के दौरान दर्द आमतौर पर बच्चियों को ज्यादा होता है इसके लिए उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है परंतु अगर दर्द 2 या 3 दिन से ज्यादा और अधिक मात्रा में हो रहा हो और दवाइयों के सेवन से भी कम नहीं हो रहा हो तब आपको डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

प्राकृतिक तरीके

पीरियड के दौरान मेथी दाने का उपयोग करने से दर्द में राहत मिलती है इसका इस्तेमाल इसे भिगोकर किया जाता है।

मासिक धर्म (periods) आने के लक्षण

Periods आने से पहले ही महिलाओं को महसूस हो जाता है की पीरियड आने वाले हैं उन्हें अपने शरीर में कुछ परिवर्तन महसूस होने लगते हैं। जैसे

ऐठन

आमतौर पर जब पीरियड आते हैं तब महिलाओं को पेट या पीठ के निचले हिस्से में ऐठन महसूस होती है साथ ही दर्द महसूस होता है।

पेट फूलना

पीरियड आने से पहले महिलाओं को उनका पेट फुला-फुला हुआ सा महसूस होता है।

पिंपल्स

पीरियड आने से पहले पिंपल आना एक साधारण बात है

गला खराब होना

पीरियड आने से पहले महिलाओं का गला खराब हो सकता है।

थकान महसूस होना

पीरियड आने से पहले लड़कियां और महिलाऐं थकान महसूस करती हैं।

भावनाओं पर नियंत्रण न होना

आपके व्यवहार में बदलाव आता है कभी आप अच्छा महसूस करते हो तो कभी चिड़चिड़ापन और कभी बहुत ज्यादा गुस्सा।

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रजोनिवृत्ति क्या है।

महिलाओं के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब उन्हें पीरियड आना बंद हो जाते हैं उसे menopause या रजोनिवृत्ति कहते हैं आमतौर पर रजोनिवृत्ति का समय 45 वर्ष के बाद ही आता है पर यह थोड़ा पहले भी आ सकता है।

जब महिलाओं को कम से कम 1 वर्ष तक पीरियड नहीं होते हैं तो उसे मोनोपॉज या रजोनिवृत्ति कहा जाता है।

रजोनिवृत्ति के कारण

रजोनिवृत्ति होने का कारण यह है कि महिलाओं में अंडाशय द्वारा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का उत्पादन बंद हो जाता है जिसके कारण पीरियड आना बंद हो जाते हैं।

रजोनिवृत्ति के लक्षण

रजोनिवृत्ति के लक्षण रजोनिवृत्ति होने से कुछ साल पहले से भी दिखाई दे सकते हैं जैसे कि

  • पीरियड्स में बदलाव जैसे जल्दी आना या देर से आना ब्लड कम आना या बहुत ज्यादा ब्लड आना
  • बहुत अधिक पसीना आना या गर्मी लगना
  • नींद में परेशानी
  • योनि में सूखापन महसूस होना
  • बार-बार व्यवहार में बदलाव जैसे खुश रहना या दुखी रहना या चिड़चिड़ापन
  • थकावट महसूस करना
  • चेहरे पर बाल आना

रजोनिवृत्ति का उपचार

रजोनिवृत्ति कोई बीमारी नहीं है जिसका उपचार हो परंतु आपको यह पता होना चाहिए कि यह रजोनिवृत्ति ही है या फिर किसी और कारण से पीरियड्स आना बंद हो गए हैं। अगर ऐसा है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें उसे अपनी पूरी स्थिति से अवगत कराएं साथ ही डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री और परिवार की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी बताएं।

मासिक धर्म (periods) कितने दिन तक होना चाहिए

एक महिला या लड़की का मासिक चक्र 28 दिनों का होता है लेकिन यह जरूरी नहीं है कि यह 28 दिनों का ही हो। मासिक चक्र 18 से लेकर 35 दिनों का भी हो सकता है।

पीरियड होने का मतलब है कि आपका शरीर गर्भधारण के लिए परिपक्व हो गया है मासिक धर्म पहले पीरियड के 14 दिन के बाद हर महीने होता हैं

14 वें दिन ओवुलेशन होता है मतलब महिला के शरीर में अंडाशय में से अंडा निकलता है इस दौरान अगर अंडे को स्पर्म नहीं मिलता है तो अंडा टूट जाता है ब्लड के साथ बहकर योनि से बाहर निकलने लगता है। इसे ही पीरियड आना कहते हैं।

इसलिए महिलाओं को पीरियड होना ओवुलेशन होने के दिन पर निर्भर करता है इसलिए जिन महिलाओं का पीरियड देरी से होता है उनमें ओवुलेशन 14 वें दिन ना होकर 18 वें या 20 वें होता है लेकिन अगर आपका पीरियड इसे भी देरी से हो रहा हो या नहीं हो रहा हो तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।

इसके अलावा अगर 14 वें दिन अंडे को कोई स्पर्म मिल जाता है तो गर्भधारण हो जाता है जिसके कारण पीरियड नहीं होते हैं।

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मासिक धर्म (periods) ना होने या मिस होने के कारण

पीरियड क्यों रुक जाते हैं


कुछ लड़कियों को शुरू शुरू में अनियमित मासिक धर्म की समस्या होती है इसमें कोई घबराने की बात नहीं है शुरू शुरू में ऐसा होना सामान्य है।

वजन का बढ़ना

मोटापा बढ़ने के कारण शरीर में कुछ हार्मोन उचित रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं जिसके कारण पीरियड ना आने या लेट आने, जैसी समस्याएं होती हैं।

इससे बचने के लिए यह जरूरी है कि आप एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं अच्छी डाइट, एक्सरसाइज और योगा के द्वारा अपने वजन को कम करें।

डाइटिंग

कुछ महिलाएं जल्दी वजन घटाने के लिए डाइटिंग करती हैं और खाना पीना छोड़ देती है जिसके कारण शरीर को उचित मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता है जिससे ईटिंग डिसऑर्डर भी कहते हैं उचित पोषक तत्व ना मिल पाने का दुष्प्रभाव मासिक धर्म पर भी पड़ता है जिससे पीरियड लेट आने या मिस होने की समस्या होने लगती है।

वजन कम होना

वजन का सामान्य से कम होना भी पीरियड में होने वाली समस्याओं का कारण होता है जिन महिलाओं का शरीर दुबला पतला और कमजोर होता है उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में एस्ट्रोजन हार्मोन नहीं बनते हैं जिसके कारण अनियमित पीरियड आने की समस्या उत्पन्न हो जाती है इसका इलाज यह है कि लड़कियां अपना शारीरिक वजन बढ़ाए, पीरियड्स में होने वाली समस्याएं अपने आप दूर हो जाएंगी।

ज्यादा एक्सरसाइज करना

कुछ लड़कियां फिट बॉडी पाने के लिए जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करती हैं ऐसी लड़कियों में पीरियड लेट हो ना या मिस होने की समस्या सबसे ज्यादा होती है यहां तक की कुछ लड़कियों के पीरियड पूरे साल तक नहीं होते ऐसा ज्यादा एक्सरसाइज करने से होता है इसलिए एक्सरसाइज करें लेकिन एक लिमिट में।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम polycystic ovary syndrome (PCOS)

पीरियड मिस होने या लेट होने का कारण पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम भी होता है यह एक बीमारी है इससे ज्यादा वजन वाली महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं इससे शुगर और ह्रदय संबंधी रोग भी हो सकते हैं।

थायराइड

थायराइड का रोग भी मासिक चक्र को प्रभावित करता है जिसकी वजह से पीरियड्स मिस होने या लेट होने की समस्या हो सकती है।

इसका इलाज यह है कि अगर आपको थायराइड है तो समय-समय पर थायराइड की जांच करानी चाहिए और थायराइड का इलाज कराना चाहिए।

ज्यादा अभ्यास करना

अक्सर कुछ महिला खिलाड़ी अपना स्टेमिना और परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए काफी ज्यादा अभ्यास करती हैं जिसका बुरा प्रभाव उनके एस्ट्रोजन हार्मोन पर पड़ता है जिससे पीरियड मिस होने की समस्या आने लगती है इसका इलाज यह है कि आप एक अच्छी डाइट लेकर और कुछ दिन आराम करके अपने अनियमित पीरियड को सामान्य कर सकती हैं।

शारीरिक रोग

कुछ शारीरिक रोगों का इलाज लंबे समय तक चलता है जिसमें कई तरह की दवाइयां खानी पड़ती है जिससे पीरियड मिस होने या लेट होने की दिक्कत हो सकती है 

इसका इलाज: रोगों का इलाज हो जाने के बाद पीरियड्स अपने आप सामान्य होने लगते हैं

दिनचर्या में बदलाव

अचानक से दिनचर्या में बदलाव होने से पीरियड लेट होने या मिस होने की समस्या हो सकती है जैसे 

कुछ कामकाजी महिलाओं को रात में नौकरी करनी पड़े तो उनका सोने और जागने का समय बदल जाता है 

इसके अलावा एग्जाम की तैयारी कर रही लड़कियों के सोने-जागने का समय अचानक से बदल जाऐ तो उसका असर पीरियड पर भी पड़ता है और उनके पीरियड्स लेट या मिस होने लगते हैं।

शादी के बाद पीरियड ना होने के कारण

प्रेगनेंसी

शादी के बाद पीरियड लेट या मिस होने का पहला कारण होता है प्रेगनेंसी, अगर आप ने हाल ही में शारीरिक संबंध बनाए हैं तो प्रेगनेंसी की जांच करानी चाहिए और प्रेगनेंसी को कंफर्म करना चाहिए

गर्भनिरोधक दवाएं

शादी के बाद अक्सर महिलाएं गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल करती हैं दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल के कारण इसका बुरा असर पीरियड्स पर भी पड़ता है अगर गर्भ निरोधक दवाएं खाने से आपको पीरियड में समस्या आ रही हो तो अपने डॉक्टर से बात करें।

तनाव

तनाव का बुरा असर शरीर के हार्मोन पर पड़ता है जिससे हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है और फिर पीरियड ना आने या लेट आने की समस्या होती है इसका इलाज है कि आप अपने आप को तनावमुक्त रखें

सफर करने का असर

ज्यादा सफर करने का असर खानपान, जीवनशैली और नींद पर पड़ता है जिससे पीरियड लेट होने की समस्या होती है अच्छी नींद और डाइट से इसको सामान्य किया जा सकता है।

धूम्रपान और शराब का सेवन

ऐसा देखा गया है कि शराब और धूम्रपान का सेवन करने वाली महिलाओं को पीरियड की समस्याएं ज्यादा आती हैं इसलिए किसी भी तरीके के नशे से दूर रहना चाहिए।

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मासिक धर्म (periods) में होने वाली समस्याएं - Problems during periods in Hindi

पीरियड्स महिलाओं के जीवन का एक अहम पेहलू होता है पीरियड्स के दौरान महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि

  • पेट में मरोड़
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द
  • पैरों में दर्द
  • कमर में दर्द
  • चक्कर आना
  • शरीर में खून की कमी हो जाना
  • उल्टी आना
  • दस्त लगना
  • कमजोरी
  • थकान महसूस करना
  • व्यवहार में बदलाव
  • जी मचलाना और
  •  सूजन

मासिक धर्म (periods) के दौरान क्या खाएं - What to eat during periods in Hindi

पीरियड्स के दौरान क्या खाएं क्या नहीं खाएं


पीरियड्स के दौरान इन सभी समस्याओं से बचने के लिए हमें अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अपने खाने की सामग्री में निम्नलिखित चीजों को शामिल करें।

पानी

पीरियड्स के दौरान शरीर में पानी की कमी होना बहुत ही आम बात है जिसके कारण सिर में दर्द होता है इससे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिए और अपने आपको हमेशा हाइड्रेट रखें।

हरी पत्तेदार सब्जियां और फल

पीरियड्स के दौरान शरीर में आयरन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण सिर दर्द, चक्कर और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं इससे बचने के लिए भरपूर मात्रा में फल और हरी सब्जियों का सेवन करें।

अदरक

अदरक की चाय पीरियड्स के दौरान होने वाले कई समस्याओं पर नियंत्रण रखती है साथ ही शरीर की मांसपेशियों को शांत करती हैं

अदरक से बनी चाय का सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है लेकिन पीरियड के दौरान अदरक का ज्यादा सेवन करने से पेट दर्द भी हो सकता है

चिकन और मछली

चिकन में आयरन और पोषक तत्व होते हैं और मछली में आयरन, पोषक तत्व और ओमेगा 3 फैटी एसिड्स होते हैं यह सभी पोषक तत्व पीरियड्स के वजह से शरीर में होने वाली आयरन की कमी और अन्य समस्याओं को कम करते हैं।

दाल और फलियां

जो लोग मांस मछली का सेवन नहीं करते हैं उन्हें दाल और फलियो का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए क्योंकि दाल और फलियों में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व और आयरन होता है जो पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं को कम करता है।

मेवे

मेवे जैसे काजू बादाम में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व, आयरन, विटामिन और मैग्नीशियम होते हैं जो पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं और शरीर में होने वाली थकान को दूर करते हैं।

पीरियड्स के दौरान निम्नलिखित चीजों का सेवन बिल्कुल ना करें यह सब खाद्य सामग्री पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं को और बढ़ा सकते हैं।

नमक

खाने में नमक का सेवन कम करें नमक का अधिक सेवन करने से पीरियड के दौरान होने वाली समस्याएं बहुत अधिक बढ़ सकती हैं

चीनी

चीनी से बने खाद्य सामग्री का सेवन या चीनी का सेवन करने में कोई समस्या नहीं है लेकिन चीनी का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पीरियड के दौरान होने वाली समस्याएं बहुत अधिक बढ़ सकती हैं साथ ही व्यक्ति को चक्कर आना उल्टी आना जैसी कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं

कॉफी का सेवन करने से महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि डायरिया और सिर दर्द।

शराब और धूम्रपान

शराब और धूम्रपान का सेवन स्वास्थ्य के लिए तो बहुत है ज्यादा हानिकारक है साथ ही पीरियड्स के दौरान धूम्रपान और शराब का सेवन करने से इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है महिलाओं को सूजन उल्टी दस्त जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है

ज्यादा मसालेदार खाना

ज्यादा मसालेदार खाना, पीरियड के दौरान महिलाओं पर काफी बुरा प्रभाव डालते हैं जिसके कारण पीरियड में होने वाली समस्याएं काफी हद तक बढ़ सकती हैं इसलिए ज्यादा मसाले वाले खाना खाने से बचें।

अत्यधिक रक्तस्राव क्या होता है - What is heavy bleeding in Hindi

अत्यधिक रक्तस्राव से मतलब है कि जब महिलाओं को नियमित रूप से अत्यधिक रक्त का श्राव होता है साथ ही जिसमें महिला को बार-बार सेनेटरी पैड बदलने पड़ते हैं जो महिला की जीवन शैली को प्रभावित करता है जैसे महिलाओं को खाने में समस्या आती है काम करने में समस्या आती है उनका व्यवहार में परिवर्तन आता है साथ ही बहुत अधिक मात्रा में रक्त का स्राव होता है और blood clots भी होता है। तब उसे अत्यधिक रक्तस्राव कहते हैं।

अत्यधिक रक्तस्राव के लक्षण

  • लगातार कई घंटों तक बार-बार सेनेटरी पैड बदलना।
  • पीरियड्स के दौरान डबल सेनेटरी पैड का उपयोग करना।
  • रात को सोते समय पैड बदलना।
  • थका थका महसूस करना।
  • पेट में ऐठन महसूस करना।

अत्यधिक रक्त स्राव के उपाय

गर्भनिरोधक दवाएं

ऐसा देखा गया है कि गर्भनिरोधक दवाई खाने से अधिक रक्तस्राव की समस्या कम होती है क्योंकि गर्भनिरोधक दवाएं शरीर में हार्मोन के इंबैलेंस को ठीक करती हैं।

दवाइयों का उपाय प्रयोग

अत्यधिक रक्तस्राव की बीमारी के उपचार में डॉक्टर्स द्वारा दवाइयों का प्रयोग करके इस बीमारी को ठीक किया जाता है।

सर्जरी

जब दवाइयों द्वारा अत्याधिक रक्त स्राव की समस्या का उपचार नहीं होता तब डॉक्टर ऑपरेशन द्वारा इस बीमारी का इलाज करते हैं।

सनेटरी पैड क्या है - What is sanitary pad in Hindi

मासिक धर्म के कारण योनि से रक्तस्राव होता है यह कभी भी हो सकता है जिसके कारण कई बार महिलाओं के कपड़े खराब हो जाते हैं इस समस्या से बचने के लिए सेनेटरी पैड का उपयोग किया जाता है सेनेटरी पैड एक कपड़े की तरह होता है जिसमें एक विशेष प्रकार की रुई का उपयोग होता है जो रक्त को सोख लेती है और कपड़ों को खराब होने से बचाती है।

साथ ही कई महिलाएं सेनेटरी पैड की जगह कपड़े या सूखी घास का उपयोग भी करती हैं जिसके कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि योनि में इन्फेक्शन।

सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरीके से धोना चाहिए।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने बताया है कि मासिक धर्म (periods) क्या होते हैं, क्यों होते हैं और पीरियड्स्स की क्या आवश्यकता होती है। मैं आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा इस आर्टिकल में periods के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई है अगर आपका कोई सवाल का जवाब है तो आप हमें कमेंट कर सकते हैं।

प्रश्न और उत्तर

पीरियड्स के दौरान चक्कर क्यों आते हैं?

पीरियड के दौरान चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे महिलाओं के शरीर में रक्त की कमी होना या कमजोरी और किसी दवाई का रिएक्शन भी हो सकता है।

क्या मासिक धर्म में व्रत करना उचित है?

यह बात महिला पर निर्भर करती है अगर महिला स्वस्थ है और मासिक धर्म के समय उसे कोई दिक्कत नहीं आती है तो महिला व्रत कर सकती है लेकिन अगर मासिक धर्म के समय महिला को चक्कर आना उल्टी आना या तबीयत खराब होनेकी समस्या आती है तो महिला बिल्कुल भी व्रत ना करें।

क्या पीरियड के दौरान सेक्स करना ठीक है? 

पीरियड्स के दौरान सेक्स करने में कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन कई बार पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से ब्लड फैलने लगता है जो काफी खराब लगता है अगर पीरियड्स के दौरान महिला को सेक्स करने से कोई दिक्कत आ रही है तो महिला सेक्स ना करें।

संदर्भ (References):

Menstruation and menstrual problems. (n.d.). https://www.nichd.nih.gov/. https://www.nichd.nih.gov/health/topics/menstruation

Productivity loss due to menstruation-related symptoms: A nationwide cross-sectional survey among 32 748 women. (2019, June 1). BMJ Open. https://bmjopen.bmj.com/content/9/6/e026186

Measurement in the study of menstrual health and hygiene: A systematic review and audit. (2020, June 4). PLOS. https://journals.plos.org/plosone/article?id=10.1371/journal.pone.0232935

Menstrual cycle. (n.d.). ScienceDirect.com | Science, health and medical journals, full text articles and books. https://www.sciencedirect.com/topics/medicine-and-dentistry/menstrual-cycle





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