Kuru रोग क्या है | Kuru रोग की जानकारी

Kuru रोग क्या है | Kuru रोग की जानकारी 1930 के दशक तक दुनिया के अधिकांश लोगों को यह पता नहीं था कि पापुआ (ऑस्ट्रेलिया में एक जगह) की ऊंचाई वाले इलाकों में लोग रहते थे।

जब वहां सर्वेक्षण किया गया ऑस्ट्रेलियन सरकार के द्वारा तब पता चला कि वहां पर लगभग एक लाख से ज्यादा लोग रहते थे सूचित और अनुसूचित जनजाति के। जब सरकार द्वारा वहां पर सर्वेक्षण किया गया था तो अधिकारियों ने पाया कि वहां पर कुछ गड़बड़ है।

उस क्षेत्र में एक लाइलाज और घातक बीमारी फैली हुई थी जिसका नाम था कुरु। इस आर्टिकल में हम kuru बीमारी के बारे में पढ़ेंगे की कुरु रोग क्या है, kuru रोग के लक्षण, कुरु रोग फैलने के कारण और kuru रोग का इलाज क्या है। 

kuru रोग क्या है – What is kuru diseases in hindi

kuru रोग क्या है

कुरु रोग एक लाइलाज और घातक मानसिक बीमारी है जो दिमाग में abnormal protein की वजह से होती है जो दिमाग और शरीर के कोआर्डिनेशन पर बुरा प्रभाव डालती है।

पापुआ के पहाड़ों पर fore नाम की जनजाति में यह बीमारी फैली हुई थी। kuru रोग की वजह से वहां पर 11000 लोगों की जनजाति में से 200 से ज्यादा लोग इस बीमारी का शिकार होकर मर गए थे। 

एक बार अगर किसी व्यक्ति को कुरु बीमारी हो जाती थी तो फिर उसके बाद उसकी मौत तय थी।  

कुरू रोग से ग्रस्त लोगों में कई विचित्र लक्षण देखने को मिलते थे जैसे कि लोगों को चलने में परेशानी होती थी, लोग अपने अंगों पर नियंत्रण खो देते थे, ढंग से काम नहीं कर पाते थे, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो देते थे। 

अकारण ही हंसने या रोने लगते थे इसी कारण से kuru रोग को लोगों द्वारा “हंसी की मौत ” कहा गया। 

जिन लोगों को यह बीमारी हो जाती थी वह 1 साल के अंदर खुद खड़े होने लायक नहीं रहते थे, वह खुद खाना भी नहीं खा पाते थे और अपने शरीर पर बिल्कुल नियंत्रण खो देते थे जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाया करती थी। 

वहां के कई स्थानीय लोगों का मानना था कि यह जादू टोना है या फिर किसी का कोई बुरा साया है उस जगह पर मुख्य रूप से जो वयस्क महिलाएं थी। और जो 8 साल से छोटे बच्चे थे। 

उन सब में यह बीमारी बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ रही थी और वहां के कुछ गांव में तो लगभग औरतें खत्म हो गई थी कोई भी महिला नहीं बची थीं।  

 kuru रोग के लक्षण – Symptoms of kuru in hindi

कुरु रोग से ग्रस्त व्यक्ति को निम्न प्रकार की कठिनाइयां और लक्षण सहने पड़ते हैं। 

• जैसे चलने में दिक्कत

• शरीर और दिमाग पर संतुलन ना बना पाना

• खाने को निगलने में दिक्कत

• व्यवहार में बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन

• तनावपूर्ण स्थिति

• सामान को पकड़ने में दिक्कत

• चीजों को समझने में दिक्कत 

• बिना मतलब किसी भी बात पर हंसना या रोना

• पागलपन

• शारीरिक कमजोरी रद्द 

• शरीर की मांसपेशियों का सुकुड जाना

• पूरे शरीर का पतला हो 

 kuru रोग तीन के चरणों में होता है कुरु रोग का पहला लक्षण है सिर दर्द और जोड़ों का दर्द। 

यह बहुत ही मामूली लक्षण है जिसके कारण लोग यह  जान नहीं पाते हैं की यह किसी भी बड़ी बीमारी के प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं। 

पहले चरण में कुरु रोग से ग्रस्त व्यक्ति अपने शरीर पर नियंत्रण खो देता है और साथ ही अपने शरीर के posture को बनाए रखने में उसे कठिनाई होती है। 

 कुरु रोग के दूसरे चरण में व्यक्ति चलने में असमर्थ हो जाता है और शरीर में कंपन, अनैच्छिक झटके और हलचल भी महसूस होते हैं। 

कुरु रोग के तीसरे चरण में व्यक्ति आमतौर पर अपाहिज और असंयमी हो जाता है अपनी बोलने की क्षमता खो देता है। 

उसे अलग अलग तरीके के भ्रम होने लगते हैं उसके व्यवहार में परिवर्तन आने लगता है और इसका बहुत बुरा प्रभाव उसके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। 

उसे खाना खाने में और खाने को निगलने में कठिनाई होती है और 1 साल के भीतर भुखमरी और कुपोषण के कारण आमतौर तक पर व्यक्ति की मौत हो जाती है। 

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kuru रोग के कारण – Causes of kuru in hindi

कुरू रोग एक ऐसे रोगों के वर्ग से संबंधित है जिसे transmissible spongiform encephalopathies(TSEs) कहते हैं और इसे prion disease भी कहा जाता है।

कुरू रोग मुख्य रूप से हमारे दिमाग के सेरीब्रम हिस्से को प्रभावित करती है सेरीब्रम हमारे दिमाग का वह हिस्सा है जो हमारे शरीर के समन्वय और संतुलन के लिए जिम्मेदार होता है। 

ज्यादातर सभी बीमारियां और महामारी संक्रमणीय संक्रामक एजेंटों के द्वारा होती हैं लेकिन कुरू बीमारी में ऐसा नहीं है। 

कुरु बीमारी किसी भी बैक्टीरिया या वायरस के कारण नहीं होती है कुरू बीमारी होने का मुख्य कारण है दूषित प्रोटीन (infectious abnormal protein.)

जिसे prions के नाम से भी जाना जाता है prions जीवित जीव नहीं होते हैं और ना ही यह प्रजनन कर सकते हैं। Prions निर्जीव होते हैं।  

Prions दिमाग पर बुरा प्रभाव डालते हैं और व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता के साथ साथ बॉडी कोआर्डिनेशन को धीमा कर देते हैं। 

kuru रोग फैलने के कारण 

कुरू बीमारी फैलने का एक मुख्य कारण यह था कि वहां के लोग नर भक्षण किया करते थे वहां पर एक प्रथा थी कि मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार लोगों द्वारा उसके शरीर को खाकर किया जाता था।

मतलब अगर कोई व्यक्ति मर जाया करता था तो उसके आस पड़ोस वाले उस व्यक्ति के शरीर को खा जाया करते थे। 

और नर भक्षण के कारण यह बीमारी बढ़ी क्योंकि जिस abnormal प्रोटीन के कारण कुरू रोग होता है वह दिमाग में होता है। 

और नरभक्षण करने के दौरान दूषित प्रोटीन दूसरे व्यक्ति के शरीर में चला जाता है और दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हो जाता है। 

इस प्रथा में महिलाओं को मृत व्यक्ति का दिमाग खाने को दिया जाता था और दिमाग में ही सबसे अधिक मात्रा में दूषित प्रोटीन होता है। 

महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को भी दिमाग खाने को दिया करती थी और दिमाग में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है जो कुरु रोग का कारण बनता है इसीलिए उस स्थान पर महिलाएं और बच्चे अधिक मात्रा में संक्रमित हो रहे थे। 

Kuru रोग की जांच – Diagnosis of kuru in hindi

न्यूरोलॉजिकल जांच

डॉक्टर कुरु रोग के निदान के लिए एक न्यूरोलॉजिकल जांच करेगा जिसमें व्यक्ति की अच्छे तरीके से जांच की जाती है इस जांच में यह सब चीजें होती हैं।

• व्यक्ति के पहले वह किसी इलाज के बारे में जानना (व्यक्ति के मेडिकल हिस्ट्री के बारे में)

• मानसिक तंत्रिका संबंधी कुछ test

• ब्लड टेस्ट जिसमें थायराइड फोलिक एसिड के स्तर को चेक किया जाता है।

• और गुर्दे और किडनी की कार्य क्षमता का test किया जाता है जिसके द्वारा हो रहे लक्षणों का पता लगाया जाता है।

इलेक्ट्रो डायग्नोस्टिक जांच

इस जांच में कुछ test आते हैं जैसे

• Electroencephalogram (EEG) दिमाग में हो रही इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीज को जानने के लिए किया जाता है।

• ब्रेन स्कैन जैसे कि एम आर आई (MRI)। लेकिन MRI. kuru रोग का पता लगाने में ज्यादा कुछ काम नहीं आता।

kuru रोग का इलाज – Treatment of kuru in hindi 

अभी तक कुरु रोग का कोई भी इलाज नहीं है kuru रोग एक लाइलाज बीमारी है क्योंकि prions जिनकी वजह से कुरु जैसी बीमारी होती है उन्हें खत्म करना आसान बात नहीं है। यहां तक की कुरू बीमारी कई व्यक्तियों में बहुत सालों के बाद भी अपने लक्षण दिखा सकती हैं। 

kuru रोग से बचाव – Prevention of kuru in hindi 

इस बीमारी का कोई भी बचाव नहीं है कुरु रोग एक बहुत ही ज्यादा दुर्लभ रोग है यह केवल उन लोगों को होता है जो संक्रमित ब्रेन टिशु का सेवन करते हैं और कुछ प्राणियों को संक्रमित प्राणियों में घाव के संपर्क में आने से हो सकता है।  

बीसवीं सदी के मध्य में सरकार और गैर सरकारी संस्थानों द्वारा इस नर भक्षण की प्रथा के खिलाफ प्रोटेस्ट किया गया था और एन आई एन डी एस (NINDS) की एक रिपोर्ट के अनुसार यह बीमारी पूरी तरीके से खत्म हो चुकी है।

Kuru रोग अपने लक्षण दिखाने में बहुत अधिक समय भी ले सकता है। kuru रोग के लक्षण आपको 30 साल के बाद भी दिखाई दे सकते हैं।

इसी वजह से जब इस प्रथा को बंद किया गया उसके 30 साल के बाद भी कुछ मामले देखने को मिले थे। आज के समय में कुरु बीमारी बहुत ही दुर्लभ रोग है। और कुरु रोग से संबंधित कोई भी मामले अब नहीं मिलता है। 

 

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